[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special Tipu Sultan : कौन था लीजेंड टीपू सुल्तान जिसके लिए आज कहा जा रहा है-टीपू-ईपू को समुद्र में फेंको

Tipu Sultan : कौन था लीजेंड टीपू सुल्तान जिसके लिए आज कहा जा रहा है-टीपू-ईपू को समुद्र में फेंको

0
Tipu Sultan : कौन था लीजेंड टीपू सुल्तान जिसके लिए आज कहा जा रहा है-टीपू-ईपू को समुद्र में फेंको
टीपू सुल्तान

Tipu Sultan : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों से मुगल शासक अकबर और मैसूर के सुल्तान टीपू के नाम के आगे से महान या लीजेंड शब्द हटाए जाने के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर एनसीईआरटी (NCERT) ने ऐसा किया है, तो सही किया है. ये टीपू-ईपू को बाहर करो. इन्हें समुद्र में फेंक देना चाहिए. हिमंत बिस्वा सरमा की इस प्रतिक्रिया के बाद एक नई बहस छिड़ गई है कि आखिर टीपू सुल्तान और अकबर कैसे शासक थे? आखिर अबतक उन्हें क्यों ग्रेट माना जा रहा था और अचानक ऐसा क्या हुआ कि एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों से उनके लिए प्रयुक्त शब्द महान और लीजेंड को हटा दिया गया है. आइए समझते हैं-

कौन था टीपू सुल्तान?

टीपू सुल्तान मैसूर का राजा था. उसका पूरा नाम सुल्तान फतेह अली साहब टीपू था. उसके पिता का नाम हैदर अली था. टीपू सुल्तान 1782 से 1799 तक शासक रहे थे. उनका जन्म 1751 में हुआ था. टीपू सुल्तान की मौत महज 47 वर्ष की आयु में हो गई थी. टीपू सुल्तान ने हमेशा अंग्रेजों का विरोध किया और मैसूर को उनके शासन से बचाकर रखा. टीपू सुल्तान की मौत भी श्रीरंगपट्टना में ब्रिटिश सेना के खिलाफ युद्ध लड़ते हुए हुई थी. टीपू सुल्तान को रॉकेट आर्टिलरी जैसे हथियारों का जनक माना जाता है, जिसके उपयोग से टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों की हालात खराब कर दी थी. दरअसल रॉकेट आर्टिलरी वह हथियार था, जिसमें लोहे के रॉकेटों का इस्तेमाल कर दुश्मन पर हमला किया जाता था. टीपू के राॅकेट 1-2 किलोमीटर तक की मारक क्षमता के थे. रॉकेट आर्टिलरी के जरिए एक साथ कई रॉकेटों को छोड़ा जाता था, जिसकी वजह से लक्ष्य को बर्बाद करना आसान था. मैसूर के युद्ध में जब रॉकेट आर्टिलरी का इस्तेमाल हुआ तो अंग्रेज घबरा गए थे. हालांकि टीपू सुल्तान को अंग्रेजो ने धोखे से मार दिया था. टीपू सुल्तान को महान योद्धा और शासक इसलिए भी माना जाता है क्योंकि उसने नई सिक्का प्रणाली और भूमि राजस्व प्रणाली को विकसित किया. उसके अंग्रेजों को टक्कर दी, इसी वजह से उनका नाम आजादी के दीवानों में शामिल है. इतिहासकारों की मानें, तो उन्होंने टीपू को महत्व इसलिए दिया क्योंकि उसने अंग्रेजों को सीधी टक्कर दी थी.

From-Trade-To-Territory-The-Company-Establishes-Power
एनसीईआरटी की किताब जिसमें टीपू को लीजेंड और टाइगर बताया गया है.

कौन था अकबर?

Mughal King Akbar
Tipu sultan : कौन था लीजेंड टीपू सुल्तान जिसके लिए आज कहा जा रहा है-टीपू-ईपू को समुद्र में फेंको 4

अकबर मुगल साम्राज्य का तीसरा शासक था. उसका पूरा नाम अबुल-फतह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था. वह हुमायूं का बेटा था. उसे अकबर महान, अकबर ए आजम, शहंशाह अकबर और महाबली अकबर के नाम से भी जाना जाता है. उसका जन्म 1542 ई में हुआ था और उसने 11 फरवरी 1556 – 27 अक्टूबर 1605 तक शासन किया. उसने अपने साम्राज्य को काफी विस्तार दिया और उत्तर और दक्षिण भारत के अधिकांश भूभाग पर अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी. उसने पूरे भारत को एकीकृत राज्य के रूप में स्थापित किया और एक केंद्रीय सत्ता स्थापित की. अकबर को महान शासक कहने के पीछे सबसे बड़ी तर्क यह दी जाती है कि उसे बहुसंख्यक प्रजा जो हिंदू थी, उन्होंने भी स्वीकार किया और उसकी प्रशंसा की. उसने हिंदुओं पर लगने वाले जजिया कर को हटा दिया और हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने के लिए कई कोशिशें की. उसने समझौते के तौर पर कई हिंदू राजकुमारियों से शादी भी की. अकबर ने हिंदुओं को अपने प्रशासन में महत्वपूर्ण भागीदारी दी, अकबर के नौ रत्नों में बीरबल, तानसेन, टोडरमल और मानसिंह जैसे लोग शामिल थे. यही वजह है कि अकबर को सबसे महान मुगल शासकों में गिना जाता है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

अकबर और टीपू सुल्तान को महान कहने पर क्या है आपत्ति?

अकबर और टीपू सुल्तान दोनों के बारे में यह कहा जाता है कि वे महान योद्धा और शासक थे. लेकिन कई ऐसे दावे सामने आए हैं जिसमें अकबर और टीपू सु्ल्तान को बर्बर और हिंदुओं के प्रति असहिष्णु कहा गया है. अकबर पर यह आरोप है कि उसने कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा और हिंदू लड़कियों को जबरन अपनी हरम में रखा. टीपू सुल्तान पर भी इस तरह के आरोप लगते हैं. कोडावों और नायर समुदाय के लोगों ने टीपू सुल्तान को असहिष्णु और क्रूर बताया. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने भी अकबर और टीपू को महान कहने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि महाराणा प्रताप सहित कई हिंदू राजाओं के साथ अकबर ने क्रूरता की थी, तो फिर वह महान कैसे हो सकता है. इतिहास में कई ऐसी बातें हुई हैं, जिसके आधार पर इन दोनों शासकों को महान कहना गलत है. इनका दावा है कि उनके दरबारी कवियों ने उन्हें शासक के रूप में चित्रित कर दिया, जबकि सच्चाई कुछ और ही है. एनसीईआरटी की किताबों में अकबर को तो महान शासक के रूप में चित्रित किया गया है, लेकिन टीपू सुल्तान को टाइगर और लीजेंड कहा गया है. इसकी वजह यह है कि अकबर का शासन तो उत्तर से दक्षिण भारत तक था, लेकिन टीपू सुल्तान मैसूर तक सीमित थे.

ये भी पढ़ें : Sabarimala Temple : भगवान शंकर और विष्णु के मोहिनी रूप के पुत्र हैं अयप्पा स्वामी, मकर संक्राति पर यहां जुटती है लाखों की भीड़

Previous article Paneer Cheese Balls Recipe: घर पर बनाएं ये एक्स्ट्रा क्रिस्पी, मेल्टी और सुपर टेस्टी चीजी बॉल्स – बच्चों से लेकर गेस्ट्स तक सबकी फेवरेट
Next article Ladki Bahin Yojana : जिनके पति की हो चुकी है मृत्यु वो कैसे करें e-KYC? मंत्री ने बताया तरीका
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel