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साइबर अपराध के खिलाफ प्रभात खबर का जन आंदोलन

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साइबर अपराध के खिलाफ प्रभात खबर का जन आंदोलन
साइबर क्राइम

Cyber Crime : मोबाइल हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हो गया है. मोबाइल फोन के बिना तो हमारा जीवन जैसे अधूरा ही है. सूचनाएं हों अथवा कारोबार हो या फिर मनोरंजन मोबाइल फोन की लोगों लत लग गयी है. लेकिन इस मोबाइल ने हमें खतरों के समक्ष भी ला खड़ा किया है. यह जान लीजिए कि टेक्नोलॉजी दो तरफा तलवार है. एक ओर जहां यह वरदान है, तो दूसरी ओर मारक भी है.

तकनीक ने चुपके से कब हमारे जीवन में इतने अंदर तक प्रवेश कर लिया कि हमें पता ही नहीं चला. अब हम सब, जाने अनजाने जब भी मौका मिलता मोबाइल के नये मॉडल और इसके सर्विस प्रोवाइडर की बातें करने लगते हैं. शायद आपने अनुभव किया हो कि यदि आप कहीं मोबाइल भूल जाएं या फिर वह किसी तकनीकी खराबी से वह बंद हो जाए, तो आप कितनी बेचैनी महसूस करते हैं. जैसे जीवन की कोई अहम हिस्सा अधूरा रह गया हो. यह समस्या भारत की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की है. सभी देश इससे जूझ रहे हैं. लेकिन वे समस्या का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन भारत में अब तक इस दिशा में कोई विचार नहीं हुआ है.

मोबाइल के प्रचार प्रसार के साथ साइबर अपराध की दुनिया बड़ी होती जा रही है. हर वर्ग के लोग चाहें, वह पढ़े लिखे हों या कम पढ़े लिखे, सभी इसका शिकार बन रहे हैं. जो सबसे सामान्य अपराध है, उसमें साइबर अपराधी विभिन्न तरीकों से ओटीपी हासिल कर आपके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं. अगर साइबर अपराध की संख्या पर नजर डालें तो पाएंगे, अगस्त, 2019 से मार्च, 2024 तक 38.5 लाख से अधिक साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए गए. 2024 के पहले नौ महीनों में साइबर अपराध की वजह से 11 हजार 333 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है. इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के अनुसार, 2025 तक साइबर फ्रॉड से भारतीयों को 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है.बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए प्रभात खबर ने उसके खिलाफ जन आंदोलन छेड़ा है.हमारा मानना है कि साइबर अपराध का फलक इतना व्यापक है कि जब तक इसमें लोगों की भागीदारी नहीं होगी, यह सफल होने वाला नहीं है.

यह मुद्दा इतना व्यापक हो चुका है कि केंद्र सरकार तक इसका संज्ञान ले रही है. साइबर अपराधों में नए तरीके डिजिटल अरेस्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को अपने रेडियो कार्यक्रम- मन की बात में, इसका जिक्र किया था. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मामला कितना गंभीर हो चुका है. साइबर ठग लोगों को भावनात्मक जाल में फंसाकर लूट ले रहे हैं. चिंताजनक पक्ष यह है कि डिजिटल अरेस्ट का शिकार ज्यादातर वे लोग हो रहे हैं, जो आमतौर पर कानून और व्यवस्था का सम्मान करने वाले लोग हैं. साइबर अपराधी आपकी कोई निजी जानकारी हासिल कर या कोई झूठे मामले का जिक्र कर आपको ब्लैकमेल करते हैं. वे लोगों को ऐसे मायाजाल में फंसाते हैं कि लोग अपनी सामान्य समझ बूझ भी भुला बैठते हैं और अपराधियों के हाथ में अपनी सारी जमा पूंजी दे बैठते हैं.

डिजिटल अरेस्ट के लिए आपको अचानक ही एक फोन कॉल आएगा जिसमें कॉलर बताएगा कि आपने अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या अन्य प्रतिबंधित पार्सल भेजा था या आपको यह मिला है यानी आपने इसे रिसीव किया है. कई बार आपको निशाना बनाने के लिए यह फोन कॉल आपके रिश्तेदारों या दोस्तों को भी जा सकती है, जिन्हें बताया जाएगा कि आपके दोस्त या आपके रिश्तेदार ऐसे अपराध में शामिल हैं. आपको जैसे ही दोस्त या रिश्तेदार से यह सूचना मिलेगी, आप घबरा जायेंगे. इसके बाद अपराधी आपको स्काइप या अन्य वीडियो कॉल के माध्यम से आपसे संपर्क करेंगे. वे खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी के अधिकारी के रूप में पेश करेंगे. वे किसी फर्जी पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय में बैठे दिखेंगे ताकि आपको विश्वास हो जाए. आपसे वो मामले को बंद करने के लिए पैसे मांगेंगे. इन्हीं अपराधियों से लोगों को बचाने के लिए प्रभात खबर साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान चला रहा है. आइए इस आंदोलन में शामिल होइए और समाज को इन खतरों से बचाइए.

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