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Home Prabhat Khabar Special श्रमिकों का गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, ये हैं बड़ी वजहें?

श्रमिकों का गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, ये हैं बड़ी वजहें?

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श्रमिकों का गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, ये हैं बड़ी वजहें?
नोएडा में श्रमिकों का प्रदर्शन

Noida Protests : नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद से अबतक 300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है. गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को बताया कि इस मामले में 7 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. 13 तारीख को श्रमिकों के उग्र हुए प्रदर्शन को शांत करने के लिए गिरफ्तारियां की गई हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों देश में कई जगहों पर श्रमिक आंदोलन कर रहे हैं.

क्यों बढ़ रहा है श्रमिकों का गुस्सा?

श्रमिकों का गुस्सा अचानक फूटा हो, यह बात सही नहीं है. श्रमिकों में काफी लंबे समय से असंतोष मौजूद है. इसकी सबसे बड़ी वजह है उनका वेतनमान और काम के घंटे. साल 2026 में देश के कई इलाकों से श्रमिकों के असंतोष की खबरें सामने आईं, जिनमें हरियाणा, बिहार और गुजरात में हुआ श्रमिकों का आंदोलन शामिल है. हर जगह श्रमिकों की शिकायतें एक ही तरह की हैं और सम्मानित वेतन ना मिलना सबसे बड़ी समस्या.

वेतनमान में वृद्धि सहित ये हैं श्रमिकों की मांगें

श्रमिकों की सबसे बड़ी समस्या उनका कम वेतन और बढ़ती हुई महंगाई है. महंगाई के इस जमाने में कम वेतन की वजह से श्रमिकों को जीवन की बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाती हैं. इस वजह से वे ना तो खुद को और ना अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दे सकते हैं. इस वजह से उनके अंदर एक असंतोष पैसा होता है. इसी वजह से वे अपने वेतनमान में वृद्धि की मांग कर रहे हैं. कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के तहत श्रमिकों की नियुक्ति करती हैं और उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं, जबकि वे काम समान ही करते हैं. इसी वजह से श्रमिक वेतनमान में वृद्धि की मांग कर रहे हैं. साथ ही काम के घंटे निर्धारित करने और अतिरिक्त समय के लिए ओवरटाइम देने की मांग कर रहे हैं. इसके अतिरिक्त नौकरी की सुरक्षा जैसी मांगे भी श्रमिकों की हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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