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Home Prabhat Khabar Special क्या नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी राजनीति में इंट्री को है तैयार, क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित?

क्या नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी राजनीति में इंट्री को है तैयार, क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित?

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क्या नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी राजनीति में इंट्री को है तैयार, क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित?

Raihan Vadra : क्या राजनीति में नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी इंट्री करने के लिए तैयार है? यह सवाल लोगों के मन में इसलिए उठ रहा है क्योंकि राहुल गांधी ने दीपावली के शुभ मौके पर अपने साथ अपने भांजे यानी प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान राजीव वाड्रा का एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में राहुल गांधी ने रेहान को दिवाली की तैयारियों में लगा रखा है और वे उसे जीवन की सच्चाइयों से रूबरू कराते नजर आ रहे हैं. लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी की राजनीति में इंट्री के संकेत हैं.

प्रियंका गांधी वाड्रा के हैं दो बच्चे

प्रियंका गांधी वाड्रा और राॅबर्ट वाड्रा के दो बच्चे हैं, जिसके नाम है रेहान राजीव वाड्रा और मिराया वाड्रा. प्रियंका गांधी की शादी 1997 में 25 साल की उम्र में राॅबर्ट वाड्रा से हुई थी. रेहान वाड्रा उनकी पहली संतान हैं, जिनका जन्म वर्ष 2000 में हुआ था, यानी अभी उनकी उम्र 24 साल की है. बेटी मिराया वाड्रा का जन्म वर्ष 2002 में हुआ था और वो अभी 22 साल की हैं. प्रियंका गांधी और राहुल गांधी बचपन से ही राजनीतिक माहौल में रहे और कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार में भी अपने माता-पिता और दादी के साथ दिखते थे, लेकिन रेहान और मिराया राजनीति से दूर रहते हैं. उन्हें वोटिंग के दौरान देखा जाता है इसके अलावा वे बहुत कम ही नजर आते हैं. राहुल गांधी के नामांकन के दौरान भी कभी-कभार प्रियंका गांधी के बच्चे नजर आए हैं.

रेहान वाड्रा की राजनीति में इंट्री को लेकर क्यों हैं चर्चा?

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रेहान की राजनीति में इंट्री को लेकर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि वे अब 24 साल के हो गए हैं और राहुल गांधी वीडियो में यह कहते भी नजर आ रहे हैं कि वे उन्हें जीवन की सच्चाइयों से परिचित कराना चाहते हैं. वे रेहान को असली भारत से मिलवाना चाहते हैं और वे पूरे वीडियो में एक तरह से रेहान को सीखा रहे हैं, भारत के बारे में बता रहे हैं. बस यहीं से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि राहुल गांधी रेहान को राजनीति में इंट्री दिलाने के लिए ट्रेनिंग शुरू कर चुके हैं और इसके परिणाम आने वाले कुछ वर्षों में दिखेंगे. राहुल गांधी अब 54 साल के हो गए हैं और सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से एक तरह से मुख्यधारा की राजनीति से अलग होती जा रही हैं, यही वजह है कि प्रियंका गांधी भी अब सीधे तौर पर राजनीति में आ चुकी हैं और पहली बार वायनाड से चुनाव भी लड़ रही हैं. उनकी उम्र भी 52 वर्ष की है. ऐसे में राहुल -प्रियंका को अपनी अगली पीढ़ी तैयार करनी है चूंकि राहुल गांधी ने शादी की नहीं है, इसलिए आगे की पीढ़ी के रूप में प्रियंका गांधी के बच्चे ही नेहरू-गांधी परिवार को आगे बढ़ाएंगे.

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क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित

गांधी परिवार के करीबी और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का कहना है कि रेहान राजनीति में सक्रिय होंगे इसकी संभावना ना के बराबर है. पिछले एक दशक से नेहरू-गांधी परिवार संकट के दौर से गुजर रहा है. इन्हें राजनीति में खुद को स्थापित करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. इनपर वंशवाद का भी आरोप लगा है, तो मुझे नहीं लगता है कि राहुल-प्रियंका के बाद नेहरू-गांधी परिवार का कोई व्यक्ति सक्रिय राजनीति में आएगा. राहुल गांधी ने जो वीडियो शेयर किया है उसके पीछे वजह यह है कि वे भारतीय संस्कृति से अपने जुड़ाव को बताना चाहते हैं, क्योंकि उनपर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं. जहां तक बात राहुल और रेहान के संबंधों की है, तो जो एक मामा-भांजे के बीच बाॅडिंग होती है उसी तरह की उनके बीच भी है. राहुल अकेले हैं और रेहान उनकी बहन के बच्चे हैं, तो वो उनके लिए अपने बच्चे की तरह ही है और उनके बीच बहुत मजबूत संबंध है. राहुल बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ना चाहते हैं, इस वीडियो का बस यही मतलब मुझे लगता है. रेहान और मिराया दोनों की स्कूलिंग देश के बाद विदेश में हुई है.

पंडित नेहरू से अबतक राजनीति में कौन-कौन आए

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पंडित नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू भी राजनीति में सक्रिय थे और वे दो बार कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे. एक बार 1919 में और दूसरी बार 1928 में लेकिन उनकी मृत्यु आजादी से पहले ही हो गई थी, इसलिए वे सत्ता तक नहीं पहुंचे. पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री थे. उनके बाद इंदिरा गांधी ने उनकी विरासत संभाली और 1966 में पहली बाार देश की प्रधानमंत्री बनी. तीसरी पीढ़ी के रूप में राजीव गांधी और संजय गांधी राजनीति में आए. हालांकि संजय गांधी जो ज्यादा सक्रिय थे उनकी मौत एक दुर्घटना में हो गई थी, जिसकी वजह से राजीव गांधी राजनीति में सक्रिय हुए. राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने विरासत संभाली और उनके बाद राहुल गांंधी राजनीति में आए और आज राजीव और सोनिया के दोनों बच्चे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी राजनीति में सक्रिय हैं. अगर प्रियंका के बेटे रेहान राजनीति में आते हैं तो यह नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी होगी.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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