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Home Prabhat Khabar Special ईरान का दावा: अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागा, ट्रंप के शांति वार्ता का दिया जवाब

ईरान का दावा: अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागा, ट्रंप के शांति वार्ता का दिया जवाब

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ईरान का दावा: अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागा, ट्रंप के शांति वार्ता का दिया जवाब
अब्राहम लिंकन एयरबेस

USS Abraham Lincoln : ईरान ने दावा किया है कि उसने नेवी की चेतावनी के ठीक एक घंटे बाद अमेरिका के विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन पर क्रूज मिसाइल से हमला किया है.हालांकि ईरान के इस दावे पर अमेरिका की ओर से कोई कंफर्मेशन या जवाब नहीं आया है. ईरान ने अब्राहम लिंकन पर हमला करने का दावा सरकारी टीवी पर किया है.

चाबहार के पास अब्राहम लिंकन पर किया गया हमला!

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार उन्होंने अमेरिका के चलते-फिरते युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर कोस्टल क्रूज मिसाइल दागी है. इस मिसाइल के दागे जाने से कितना नुकसान हुआ, इसकी भी अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि अपुष्ट खबरों के अनुसार ईरान ने चाबहार बंदरगाह के पास अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागा है. यह डेवलपमेंट तेहरान की बढ़ती बयानबाजी के बीच हुआ है, वह भी तब, जब अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्री शांति योजना भेजी थी.

https://twitter.com/INNewx/status/2036773297745219611

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क्या है अब्राहम लिंकन की खासियत?

अब्राहम लिंकन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थे और उनके नाम पर ही अमेरिकी एयरबेस यानी विमानवाहक पोत का नाम अब्राहम लिंकन रखा गया है.यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता है. यह एक चलता-फिरता एयरबेस है, जिसपर 60–70 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात हो सकते हैं.यह युद्धपोत पानी में रहकर ही हवाई हमले कर सकता है और अपनी रक्षा भी कर सकता है. यह युद्धपोत परमाणु ऊर्जा से चलता है और इसमें परमाणु रिएक्टर लगे होते हैं. यह सालों तक बिना ईंधन भरे काम कर सकता है. यह लगभग 333 मीटर लंबा युद्धपोत है.इसपर 5000 लोग सवार हो सकते हैं, जिसमें क्रू मेंबर और एयरविंग शामिल होते हैं. अब्राहम लिंकन कहां तैनात होता है इसकी सही लोकेशन के बारे में जानकारी सिर्फ अमेरिकन नेवी को ही होती है. यह प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अरब सागर और फारस की खाड़ी में भी भ्रमण करता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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