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दवाओं की गुणवत्ता का सवाल

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दवाओं की गुणवत्ता का सवाल
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केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा नवंबर में जारी ड्रग अलर्ट ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें जांच के दौरान हिमाचल प्रदेश में बनी 38 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं. इनमें बुखार, रक्तचाप, दमा और कैंसर जैसी बीमारियों की दवायें शामिल हैं. इनमें से कई दवायें बाजार में पहुंच चुकी हैं. सीडीएससीओ के अलावा राज्य दवा नियंत्रक की जांच में भी सैंपल फेल पाये गये हैं. सैंपल फेल होने के बाद ड्रग विभाग ने सभी दवाओं के बैच बाजार से उठाने और कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं, क्योंकि कुछ दवा कंपनियां मुनाफे के लिए लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रही हैं.

जुलाई से नवंबर तक दवाओं के कुल 317 सैंपल हुए फेल

केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन दरअसल हर महीने राष्ट्रीय स्तर पर ड्रग अलर्ट जारी करता है. इसमें जिन दवाओं के सैंपल फेल होते हैं, उनकी सूची जारी की जाती है, ताकि उनका स्टॉक बाजार से वापस मंगवाया जा सके. देश में जुलाई से नवंबर तक दवाओं के कुल 317 सैंपल फेल हुए. इनमें हिमाचल का आंकड़ा 112 है. जुलाई में दवाओं के 31 सैंपल फेल हुए थे, जिनमें हिमाचल में बनी 12 दवायें थीं. अगस्त में राष्ट्रीय स्तर पर 70 दवाओं के सैंपल फेल हुए थे, जिनमें हिमाचल के 20 सैंपल थे. सितंबर में देश भर में फेल हुए 59 दवा सैंपलों में हिमाचल की हिस्सेदारी 19 थी. अक्तूबर में 67 सैंपल फेल हुए थे, जिनमें हिमाचल का आंकड़ा 23 था, तो नवंबर में देश भर में दवाओं के 90 सैंपल फेल हुए थे, जिनमें से 38 दवायें हिमाचल में बनी थीं.

हिमाचल प्रदेश फार्मा हब के नाम से मशहूर

इससे पहले जनवरी से जुलाई तक हिमाचल की 107 दवाओं के सैंपल जांच में फेल हुए थे. इससे फार्मा हब के नाम से मशहूर हिमाचल प्रदेश की छवि खराब हो रही है. हिमाचल में करीब 600 फार्मा कंपनियां सालाना 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करती हैं.

दिल्ली में भी दवाओं के सैंपल हुए थे फेल

हिमाचल की कंपनियों में बनी दवाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मांग है. जाहिर है, हिमाचल अकेला राज्य नहीं है, जहां दवाओं के सैंपल फेल हो रहे हैं. पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दवाओं के कुछ सैंपल फेल होने के मामले सामने आये थे. जबकि उत्तराखंड में विगत मार्च से जुलाई तक सीडीएससीओ की जांच में 48 दवाओं के सैंपल फेल पाये गये थे. इसे देखते हुए ड्रग विभाग ने उपभोक्ताओं को दवा खरीदने के समय सतर्कता बरतने के लिए कहा है. उसने दवाओं की ऑनलाइन खरीद और मुफ्त दवा दिये जाने के अभियानों के प्रति सावधान रहने, दवा के पैकेज और ब्रांड का गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा मैन्यूफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और एमआरपी पर पैनी नजर रखने के लिए कहा है. दवाओं के मामले में व्यापक सतर्कता से ही स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा संभव है.

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