[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Opinion सहयोग और साझेदारी

सहयोग और साझेदारी

0
सहयोग और साझेदारी

कोरोना वायरस का विश्वव्यापी संक्रमण मनुष्यता के मूल्यों एवं आदर्शों के लिए एक बड़ी कसौटी भी है. शायद ही कोई ऐसा देश बचा है, जहां इसका साया न हो. हर व्यक्ति इस विषाणु का संभावित शिकार है. इसका अनुमान संक्रमितों और मृतकों की बड़ी संख्या से लगाया जा सकता है.

तमाम कोशिशों के बावजूद निश्चित तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि हम कब इस वायरस पर नियंत्रण कर सकेंगे. इस आशंकाग्रस्त माहौल में यह पहलू बेहद सकूनदेह है कि विभिन्न देश अपनी राजनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक तनातनी को किनारे रखकर न सिर्फ एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, बल्कि जहां तक संभव हो रहा है, बहुत सारे देशों तक अपना हाथ बढ़ा रहे हैं.

मध्य मार्च से ही महामारी की आशंका को देखते हुए वैश्विक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मंचों ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी थी. तब तक चीन के बाद इटली में बड़ी संख्या में मौतों का सिलसिला शुरू हो गया था और कई देशों से संक्रमण और मौतों की खबरें आने लगी थीं. जल्दी ही सुर्खियों में बताया जाने लगा कि दक्षिण अमेरिकी महादेश में स्थित एक छोटे से द्वीपीय देश क्यूबा ने यूरोप, अफ्रीका और लातिनी अमेरिका को अपने डॉक्टर, नर्सें और दवाइयां भेजना शुरू कर दिया है.

चीन ने जैसे संक्रमण पर काबू पाया, उसने भी यूरोप और एशिया में मेडिकल साजो-सामान मुहैया कराया. दक्षिण कोरिया, रूस, ताइवान, वियतनाम आदि ने भी मदद में कोई कसर नहीं छोड़ी. विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न इकाइयां भी मैदान में आ डटी थीं. एक बेहद भावुक क्षण तब आया, जब कुछ दिन पहले रूसी का वायु सेना का सबसे बड़ा जहाज लाखों टन राहत सामग्री लेकर न्यूयॉर्क उतरा. दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ सालों से बहुत तनावपूर्ण हैं.

इसी तरह से चीन ने भी अमेरिका को वेंटिलेटरों की आपूर्ति की है. अभी जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन और इटली के साथ अमेरिका संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है. बीते दिनों जब भारतीय जहाज जर्मन नागरिकों को राहत सामग्री के साथ ले जा रहे थे, तब पाकिस्तानी वायु सीमा में वहां के उड्डयन अधिकारियों ने एअर इंडिया को ऐसी संकट की घड़ी में उड़ान के लिए सराहना की और उन्हें अनुकूल हवाई मार्ग दिया. ये जहाज लगातार यूरोपीय नागरिकों को उनके देश पहुंचा रहे हैं तथा चीन से राहत भी ला रहे हैं.

इसी तरह से दुनिया के बड़े धनिकों और कारोबारियों से लेकर आम नागरिक तक विभिन्न सरकारों और संस्थाओं को आर्थिक एवं अन्य सहायता उपलब्ध करायी जा रही है. लोग अपने स्तर पर मास्क बना रहे हैं और खाना बांट रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस, जरूरी चीजें मुहैया करानेवाले, सफाई कर्मियों आदि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है. इंसान तो इंसान, जानवरों का भी ख्याल रखा जा रहा है. जिस स्तर पर समाज और विश्व ने एकजुटता दिखायी है, वह भविष्य के लिए सकारात्मक आश्वासन है. आशा करें, मानवता जल्दी ही इस संकट से निकाल जायेगी.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel