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बात अछे दीन की है

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चंचल
सामाजिक कार्यकर्ता
लाल साहेब ने आखिरी बात कही- मतलब यह झूठों का सरदार निकला? इतना नवल के लिए काफी रहा. वे उठे और चलते बने. दो आंखें बारह हाथ से- सुर में गाना शुरू किया- वो तो झूठों का बड़ा सरदार निकला ..
जन्तूला लुट गयी. खबर तो इतनी ही रही, मुला चर्चा बहुत बड़ी और चहुं ओर है. नवल उपाधिया खैनी मलते जा रहे हैं और जन्तूला के लूटने की कहानी, नमक तेल मिर्चा मिला कर बताते जा रहे है. अक्खा चौराहा सुन रहा है. पहले भी चोरी , चकोरी, डकैती ,ठगी सब होत रही, पर बच बा के, और इस पेशे में लगे लोग समाज की निगाह में हिकारत से देखे जात रहे. पर आज? इज्जत पा रहे हैं. बेशर्मी की भी हद होती है, आज उतान होकर चल भी रहे हैं .
अब जन्तूला का मामला देखिये. जान रहें कहें मगर.. बात क्या है वो तो बताओ. लाल साहेब को जल्दी है, सो उन्होंने टोका. आगे बताओ क्या हुआ? नवल सचेत हुए- कल गांव में एक गिरोह आवा रहा. भांति भांति के लोग रहे. सफेद दाढ़ी, काली दाढ़ी, भूरी, माकर खसखसी दाढ़ी. तासा -खझड़ी, झांझ मजीरा लिए, गाते बजाते आये और लूट के चलता बने.
और तो और, जनता भी साथ लिए चल रहे हैं. लखन कहार को अचंभा हुआ- जनता भी साथ में? मद्दूपत्रकार ने खुलासा किया- सीधी-सी बात जान लो, किसी जमाने में घर पर कोई काम-काज पड़ता था, तो लोग ओने ही समान से इंतजाम कर लिया करते थे. फिर जमाना आगे बढ़ा, लोग गांव-गिरांव से इकट्ठा करने लगे. अब जमाना दूसरा है, किराये पर डेरा डंडा, गाजा बाजा, किराये पर कपड़ा लत्ता, और तो और किराये पर आदमी भी. हां, तो बताओ नवल, जन्तूला कैसे लुटी?
-लुटी ऐसे कि एक गिरोह आवा रहा. उसमे एक मुरहा रहा. अचकन पहने, नीचे चूड़ीदार पजामा, कपारे पे पगड़ी, पगड़ी में ललकी कलंगी खोंसे धुआंधार बोलता रहा. लौटन तेली क बीवी बताय रही थी कि ओकरे पास कान ना रहा, केवल मुंह रहा. एक सांस में सब बोलत रहा. वही लूटा. बोला कि सबसे कीमती चीज इस झोले में डाल दे. रात के अंधेरे में अपने सोनेवाले कमरे में एक बर्तन रख देना. मुंह खुला होना चाहिए. अगर मुंह न खुला हो तो खुलवा लेना.
रात के तीन बज कर 37 मिनट पर एक काला शख्स आयेगा और डाल कर चला जायेगा. आओ जल्दी करो और लोग लगे डालने. ले तो गया सबका. कुछ न कुछ. पर जो नहीं डाले थे, वो हंस रहे हैं. जो डाल चुके हैं, उसमें भी तीन तरह के हैं- एक, देकर हाथ मल रहे हैं और अपने बब्बा का नाम ले लेकर कसम खा रहे हैं कि हे दद्दा अब ऐसन गलती ना होई. किया धारा सब माफ. दूसरे ओ हैं जो सांस भी नहीं ले रहे और तीसरे में जन्तूला है.
कहो अछेदीन? कह कर नवल ने कीन को देखा और आँख टीप दी. कीन हत्थे से उखड गये. एक बात सुन लो पंचो! किसी दिन इस चौराहे पर फौजदारी होगी. हम इस नवल का मुह तोड़ कर कुजगहें रख देंगे. यह भी कोई बात होती है? हम इसे नवल की जगह नेउर कहें तो इसे अच्छा लगेगा? यह हमारा नाम बदल्ते घूम रहा है. कल ररा नाई को समझा रहा था कि जाओ अछेदीन बुला रहे हैं, उनका मूंडन करना है.
कयूम मुस्कुराए- अछेदीन? यह कौन सा नाम है. अछेदीन? नवल फिस्स से हंस दिये. नाम करण कहते हैं चचा इसको. ऊपरवाला जब इंसान बनाता है, तो सब कुछ वहीं से बना कर भेजता है, मुंह कान नाक हाथ पेट.. अब बताओ ररा नाऊ के लड़के नाम बोफोर्स है न? जिस साल चेचक क प्रकोप रहा उसी साल मातादीन पैदा भये रहे नाम पड़ा माता दीन. एक हैं कड़े दीन. उसी तर्ज पर कीन का नाम पड़ रहा है अच्छे दीन. तो इसमें सुलग क्यों जाती है. बेचारा नौ महीने से एके बात बोले जात बा-अच्छे दिन आयेंगे, अच्छे दिन आयेंगे? इतना सुनना था कि कीन उपाधिया हत्थे से बाहर, दोनों में फौजदारी की नौबत आ गयी.
लेकिन चिखुरी ने बीच बचाव किया – सुनो कीन यह तुम्हारी गलती नहीं, तुम जहां हो हर कोई ऐसा ही है. आज की खबर जानते हो? तुम्हारे सबसे बड़े नेता ने क्या बोला मालुम है? कह रहा है मोदी प्रधानमंत्री के दावेदार थे, चुनाव के समय उन्होंने यह कहा था कि जीतते ही काला धन वापस लायेंगे और जनता के खाते में पंद्रह-पंद्रह डाल देंगे. यह एक सियासी जुमला था. एक नेता जो अपने झूठ के सहारे देश की जनता को छले और जीत के बाद कहे कि यह तो एक सियासी जुमला था इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा? जनता का इस तरह से मजाक उड़ाना जायज है क्या?
नवल ने सही कहा गांव-गांव में तो तुम्हारे ही जैसे घूमे थे. तो अब उसके गुस्से को भी ङोलो और ऊपर तक आवाज पहुंचाओ. प्रतिरोध तो करो कि सियासत में छल-प्रपंच नहीं चलती. कथनी और करनी के बीच कोइ फर्क मत रखो वरना कार्यकर्ता नंगा होगा. नेता तो जीत कर पत्थर की हवेली में जा बैठेगा लेकिन गांव में जवाब तुम्हें देना है. लाल साहेब ने आखिरी बात कही- मतलब यह झूठों का सरदार निकला? इतना नवल के लिए काफी रहा. वे उठे और चलते बने. दो आंखे बारह हाथ से- सुर में गाना शुरू किया-वो तो झूठों का बड़ा सरदार निकला ..
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