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Home Opinion मंदी है, तो कार फेंक कर बताओ!

मंदी है, तो कार फेंक कर बताओ!

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

puranika@gmail.com

चालू विश्वविद्यालय ने मंदी पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है-

मंदी है, ऐसी बातें फिजूल में कही जा रही हैं. वास्तव में मंदी कहीं नहीं है. यूं आंकड़े बता रहे हैं कि देश की सबसे बड़ी कार कंपनी की बिक्री जुलाई 2019 में जुलाई 2018 के मुकाबले करीब 36 प्रतिशत गिरी. पर ये आंकड़े झूठे टाइप लग रहे हैं.

जब टमाटर के भावों में मंदी होती है, आलू के भावों में मंदी होती है, तो किसान आलू टमाटर को सड़क पर मुफ्त में फेंक जाते हैं, तो हम मानते हैं कि मंदी सचमुच में है. हमने तलाशने की बहुत कोशिश की कि कार बनानेवाले कारों को मुफ्त में पटक जाते हैं या नहीं? पूरे भारत में एक भी ठिकाना ऐसा ना मिला, जहां कारें पटक कर छोड़ गयी हों.

हमारे शोधकर्ताओं ने जगह-जगह जाकर पता करने की कोशिश की कि इस तरह से शराब कारोबार भी मंदी का शिकार हो गया है क्या? शराब कंपनियां मुफ्त में अपने आइटम सड़क पर पटक कर जा रही हैं क्या?

ऐसे ठिकाने भी पूरे देश में ना मिले, जिनसे साबित होता हो कि शराब कंपनियां भी मंदी का शिकार हैं. देश की सबसे बड़ी शराब कंपनी का शेयर तीन महीने में सात प्रतिशत से ज्यादा कूद गया है. हमारे शोधकर्ताओं ने शहर-शहर बाजार-बाजार जाकर चेक किया कि कहीं मंदी के शिकार फ्रिज कारोबारी, एसी कारोबारी, टीवी कारोबारी अपने-अपने आइटमों को कहीं सड़क पर डाल कर तो नहीं जा रहे हैं. पर कहीं किसी शोधकर्ता को फ्रिज, एसी और टीवी सड़क पर पड़े हुए नहीं मिले. इससे साबित होता है कि मंदी का हल्ला फर्जी है.

सोने के भाव तीन महीनों में 11 प्रतिशत उछल गये हैं. भारत में आम आदमी शादी के लिए और उसके बाद शादीजनित मसलों के लिए जीता है. शादी के बैंक्वेट हालों की बुकिंग आसानी से ना मिल रही है. शादी जनित बच्चों की कोचिंग पर लोग इस कदर खर्च करने को आमादा हैं कि जिस ट्यूशन कंपनी के ब्रांड एंबेसडर शाहरुख खान हैं, उसकी कीमत में पूरा पंजाब नेशनल बैंक खरीदा जा सकता है. बैंकेट हाल भरे हुए हैं. कोचिंग सेंटर भरे हुए हैं. सोने के शोरूम चकाचक चल रहे हैं. विधायकों के भावों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो है. बताइये मंदी कहां है?

ऐसे में विकास के आंकड़ों को अगर कर्नाटक के विधायकों के रेट से नापा जाये, तो भारत की अर्थव्यवस्था चीन के मुकाबले बहुत तेजी से विकास करती हुई दिखेगी.

हरेक कोई अपनी अपनी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए जिम्मेदार है. शराब वालों की अर्थव्यवस्था चकाचक चल रही है. सोना वालों की अर्थव्यवस्था चकाचक चल रही है. अब अगर आलू के भावों में मंदी चल रही है, तो आलू कारोबारियों को उस वैज्ञानिक की तलाश करनी चाहिए, जिसका वह बयान बहुचर्चित हुआ था- एक मशीन में इधर से आलू डालूंगा, तो उधर से सोना निकलेगा.इस निबंध को लिखनेवाले छात्र को सरकार ने अपना आर्थिक प्रवक्ता बनाने की बात मान ली है!

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