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सरकार का विजन दस्तावेज

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आशुतोष चतुर्वेदी
प्रधान संपादक, प्रभात खबर
कोई भी सरकार जब अपना बजट पेश करती है, तो वह आर्थिक बही खाते के साथ साथ एक राजनीतिक संदेश भी देती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट के भी कई निहितार्थ हैं. सबसे पहले तो उन्होंने परंपरा से अलग हटते हुए बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में न लेकर एक लाल रंग के कपड़े में रखा, जिसके ऊपर अशोक स्तंभ का चिह्न लगा था.
सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुब्रमण्यन ने संदेश स्पष्ट किया कि वित्त मंत्री ने लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज को रखा है क्योंकि यह एक भारतीय परंपरा है. साथ ही यह पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने का प्रतीक है. सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यह बजट नहीं बही खाता है.
मेरा मानना है कि यह एक तरह से मोदी सरकार का विजन दस्तावेज है, जिसमें बताया गया है कि सरकार अगले पांच साल में क्या करना चाहती है. इस बजट के केंद्र में गांव, गरीब, किसान और महिलाएं रहीं. सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा भी कि असल भारत गांव में ही बसता है. 2019 के लोक सभा चुनावों में महिलाओं की रिकॉर्ड हिस्सेदारी रही है और मोदी सरकार को सत्ता तक पहुंचाने में इनकी अहम भूमिका रही है.
इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी पहले कभी नहीं देखी गयी है. साथ ही 78 महिलाओं का लोक सभा में चुन कर पहुंचना कोई साधारण घटना नहीं है. यही वजह है कि उन पर विशेष ध्यान दिया गया है. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एक लाख तक के लोन का लाभ मिलेगा. उन्हें पांच हजार तक के ओवर ड्राफ्ट की सुविधा भी मिलेगी. साथ ही स्टार्ट अप पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि युवा स्वयं उद्यमी बन सकें.
सरकार गरीबों पर मेहरबान रही है और उसने अमीरों पर सरचार्ज बढ़ा दिया है. मध्य वर्ग को मामूली राहत मिली है. प्रधानमंत्री मोदी हर अवसर का लाभ उठाने में माहिर हैं. मोदी सरकार ने बजट के जरिये गरीब, किसान और महिलाओं के प्रति जैसे कृतज्ञता जतायी है जिन्होंने उन्हें सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. ये तबके आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं.
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