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Home National पुणे मर्डर : ‘बैठने का इशारा’ और सिया की सुरक्षा का प्लान, क्राइम सीन री-क्रिएशन में हुआ ये खुलासा

पुणे मर्डर : ‘बैठने का इशारा’ और सिया की सुरक्षा का प्लान, क्राइम सीन री-क्रिएशन में हुआ ये खुलासा

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पुणे मर्डर : ‘बैठने का इशारा’ और सिया की सुरक्षा का प्लान, क्राइम सीन री-क्रिएशन में हुआ ये खुलासा
पुणे मर्डर क्राइम सीन रीक्रिएशन (Photo: PTI)

पुणे ग्रामीण पुलिस रविवार (28 जून) को सिया गोयल को लेकर लोहागढ़ किला पहुंची, जो अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या की आरोपी है. हत्या के वक्त उसके साथ उसका प्रेमी भी मौजूद था. पुलिस ने 18 जून को हुई वारदात से पहले की पूरी घटनाओं को समझने के लिए क्राइम सीन री-क्रिएशन किया. कड़ी सुरक्षा के बीच रविवार सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुआ क्राइम सीन री-क्रिएशन लगभग तीन घंटे तक चला.

क्या सिया और चेतन के बीच कोई फिक्स ‘सिग्नल’ था?

इस दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले. जांच में यह भी सामने आया कि 25 वर्षीय केतन अग्रवाल को कथित तौर पर खाई में धक्का देने से पहले सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी के बीच एक फिक्स ‘सिग्नल’ था, जिसकी जानकारी अब पुलिस जुटा रही है. पुलिस ने 20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर साजिश रची और पुणे के किले में केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर उसकी हत्या की. मामले की जांच जारी है और पुलिस साजिश से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है.

क्राइम सीन री-क्रिएशन क्यों किया पुलिस ने?

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में पुणे ग्रामीण के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस संदीप सिंह गिल ने बताया कि आरोपी को लोहागढ़ किले ले जाकर पूरी घटना को दोबारा दोहराया गया. पुलिस ने उस रास्ते की जांच की, जहां से सभी गए थे. साथ ही, घटना के समय कौन कहां खड़ा था और वारदात किस तरह हुई, इसकी भी पुष्टि की गई. पुलिस ने यह क्राइम सीन री-क्रिएशन इसलिए किया ताकि केतन अग्रवाल की मौत से पहले की घटनाओं की सही तस्वीर सामने आ सके. साथ ही, यह भी पता लगाया जा सके कि वारदात कैसे हुई? इसमें आरोपियों की क्या भूमिका थी? पुलिस अब चेतन चौधरी को भी अलग से लोहागढ़ किले ले जाकर क्राइम सीन री-क्रिएशन कराएगी.

सिया गोयल ने चेतन को किया इशारा

क्राइम सीन री-क्रिएशन के दौरान केतन अग्रवाल की लंबाई और वजन के बराबर एक डमी का इस्तेमाल किया गया. जांच के दौरान सिया गोयल ने कथित तौर पर बताया कि उसने बैठकर चेतन चौधरी को इशारा दिया था. पुलिस के अनुसार, योजना के तहत सिया के बैठते ही चेतन को आगे बढ़कर अनजान केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देना था. जांच एजेंसियां इस कथित ‘सिग्नल’ को साजिश की अहम कड़ी मान रही हैं.

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पुलिस जांच के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने पहले से एक सिग्नल तय कर रखा था. योजना के तहत सिया गोयल को या तो पानी पीने के बहाने बैठना था या फिर जूते के फीते बांधने का नाटक करना था. इसी हरकत को चेतन चौधरी के लिए इशारे के तौर पर इस्तेमाल किया जाना था, जिसके बाद उसे कथित तौर पर अगला कदम उठाना था.

सिया गोयल का बैठना उसकी सुरक्षा की गारंटी थी?

जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, सिया गोयल का बैठना सिर्फ इशारा देने के लिए नहीं था, बल्कि उसकी अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी यह योजना बनाई गई थी. अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों को डर था कि अगर चेतन चौधरी केतन को धक्का दे और गिरते समय वह सिया को पकड़ने की कोशिश करे, तो सिया भी खाई में गिर सकती थी. इसलिए कथित तौर पर ऐसा सिग्नल चुना गया, जिससे वारदात के वक्त सिया केतन की पहुंच से दूर रहे.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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