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Home National वीके पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन बीजू जनता दल में शामिल

वीके पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन बीजू जनता दल में शामिल

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वीके पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन बीजू जनता दल में शामिल
सुजाता राउत और नवीन पटनायक


Sujatha Raut Karthikeyan : सुजाता राउत कार्तिकेयन, जो 2000 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं, उन्होंने बृहस्पतिवार को बीजू जनता दल की सदस्यता ले ली. सुजाता राउत ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के सहयोगी वीके पांडियन की पत्नी हैं.

नवीन पटनायक ने की घोषणा

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बीजद के मुख्यालय शंख भवन में हुई एक बैठक के बाद उनके पार्टी में शामिल होने की घोषणा की. पटनायक ने कहा, मैं सुजाता राउत का बीजद में स्वागत करता हूं. वह पार्टी की एक सामान्य सदस्य के रूप में शामिल हो रही हैं. वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी रही हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं. अपने अंतिम दायित्व में उन्होंने बड़ी संख्या में राज्य की महिलाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाली थी.

नई भूमिका निभाने को तैयार हैं सुजाता राउत कार्तिकेयन

नवीन पटनायक ने कहा कि मुझे विश्वास है कि समय के साथ वह अपनी नयी भूमिका में सहज हो जाएंगी. वह लोगों विशेषकर महिलाओं का नेतृत्व करना सीखेंगी. इस बीच, सुजाता के भविष्य में पार्टी की कमान संभालने संबंधी अटकलों के बीच पटनायक ने स्पष्ट किया कि अगले चुनावों में बीजद का नेतृत्व वह खुद करेंगे. उन्होंने कहा कि मैं मीडिया और सभी लोगों की जानकारी के लिए एक बार फिर दोहराना चाहता हूं कि अगले चुनावों में बीजद का नेतृत्व मैं ही करूंगा. मैं इसे पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता हूं.

राज्य के लोगों की सेवा पूरी निष्ठा से करूंगी : सुजाता

केंद्रपाड़ा जिले की रहने वाली सुजाता राउत ने कहा कि वह राज्य के लोगों की सेवा के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगी.पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मुझे नवीन पटनायक के नेतृत्व में 24 वर्षों तक ओडिशा के लोगों की सेवा करने का अवसर मिला. आज उनके नेतृत्व में मुझे एक बार फिर राज्य के लोगों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ, पार्टी नेतृत्व और बीजद के लाखों कार्यकर्ताओं के आशीर्वाद से मैं पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ ओडिशा के लोगों के लिए काम करूंगी.बीजद के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पहले सुजाता के पार्टी में प्रवेश का विरोध किया था. उनका मानना था कि 2024 के चुनावों में बीजद के कमजोर प्रदर्शन के लिए पांडियन काफी हद तक जिम्मेदार थे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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