ईरान का अमेरिका को दो टूक जवाब: बातचीत मंजूर, गुलामी नहीं
US Iran War: इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग जारी है. दोनों देश एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं. इस बीच ईरान ने अमेरिका से साफ कह दिया है, बातचीत मंजूर है, लेकिन गुलामी नहीं.
US Iran War: मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मुसय्यब मुतलक ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा- अमेरिका, ईरान पर अपनी शर्तें थोपना चाहता है. अगर ईरान अमेरिकी हुक्म मानने को तैयार होता, तो हमें 40 दिनों तक संघर्ष नहीं झेलना पड़ता. ईरान ने हमेशा यह साफ किया है कि वह एक आजाद देश है और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है. जाहिर है, हम बातचीत के लिए तैयार थे, और हम अब भी बातचीत करने के लिए तैयार हैं. हालांकि, हम दुनिया की किसी भी ताकत द्वारा थोपे गए किसी भी हुक्म को स्वीकार नहीं करते.
अमेरिका को युद्ध भड़काने से रोकें भारत, रूस और चीन : ईरान
सईद रजा मुसय्यब मुतलक ने अमेरिका को युद्ध भड़काने से रोकने के लिए भारत, रूस और चीन को आगे आने का आह्वान किया. उन्होंने कहा- भारत, चीन और रूस ने संघर्ष में दखल देने से बचकर यह साबित कर दिया है कि वे शांति चाहते हैं. उन्होंने अमेरिकी हमले को सही नहीं माना और न ही उसका समर्थन किया. उन्होंने कहा- इन तीन प्रमुख शक्तियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके संयुक्त राज्य अमेरिका को युद्ध भड़काना बंद करने के लिए मनाएं. इजराइली शासन पर दबाव डालें.
अमेरिका और इजराइल ने सीजफायर का किया उल्लंघन
बेरूत पर इजराइली हमलों के बारे में ईरान के महावाणिज्य दूत ने कहा- अमेरिका और इजराइल ने सीजफायर का उल्लंघन किया है. उनका आचरण उनके द्वारा किए गए वादों के बिल्कुल विपरीत होता है. उनका व्यवहार कानून और नैतिकता, दोनों के ही विरुद्ध है. उन्होंने कहा- अमेरिका के पास परमाणु जखीरा है. वो एकमात्र ऐसा देश है जिसने किसी दूसरे राष्ट्र के विरुद्ध दो बार परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया है. इजराइल, जिसके पास गैर-कानूनी रूप से परमाणु हथियार मौजूद हैं—इन दोनों ने ही हमारे जैसे देश पर हमला किया है. फिर भी, वे हमसे कहते हैं कि हमें ऐसी क्षमताएं हासिल नहीं करनी चाहिए.
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