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Home National समंदर का नया सिकंदर INS महेंद्रगिरी! उन्नत मिसाइलों और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस, ताकत देख कांपेंगे दुश्मन

समंदर का नया सिकंदर INS महेंद्रगिरी! उन्नत मिसाइलों और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस, ताकत देख कांपेंगे दुश्मन

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समंदर का नया सिकंदर INS महेंद्रगिरी! उन्नत मिसाइलों और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस, ताकत देख कांपेंगे दुश्मन
आईएनएस महेंद्रगिरी, फोटो- एएनआई

INS Mahendragiri: समुद्र में अब दुश्मनों को हर चाल का करारा जवाब मिलेगा. चाहे चीन हो या पाकिस्तान या फिर कोई और… भारतीय नौसेना की ताकत अब और बढ़ने जा रही है. अत्याधुनिक स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरी जल्द ही नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाला है. अपने नाम की तरह ही यह युद्धपोत शक्ति, साहस और अडिग संकल्प का प्रतीक है. उन्नत स्टील्थ तकनीक, आधुनिक मिसाइल प्रणाली, पनडुब्बी रोधी क्षमता और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस महेंद्रगिरी समुद्र में न सिर्फ दुश्मनों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा को भी नई मजबूती देगा.

शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है महेंद्रगिरी

इस युद्धपोत का नाम प्रसिद्ध महेंद्रगिरी पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है, जो शक्ति, दृढ़ता और अटूट संकल्प का प्रतीक है. यह पहला भारतीय नौसैनिक युद्धपोत है जिसे महेंद्रगिरी नाम दिया गया है. नौसेना को उम्मीद है कि यह पोत अपनी उत्कृष्ट सेवाओं से भारतीय समुद्री इतिहास में एक नई पहचान बनाएगा. महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन किया है. इसका निर्माण मुंबई स्थित मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है. यह प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है, जो भारत की आधुनिक युद्धपोत निर्माण क्षमता को दर्शाता है.

महेंद्रगिरी युद्धपोत की विशेषताएं

  • महेंद्रगिरी को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है, जिससे यह भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में शामिल हो गया है.
  • उन्नत स्टील्थ तकनीक, जिससे रडार पर इसकी पहचान करना बेहद कठिन होता है.
  • कम रडार सिग्नेचर, जिससे दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता बढ़ती है.
  • उच्च स्तर का ऑटोमेशन, जिससे संचालन अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनता है.
  • बेहतर सर्वाइवेबिलिटी, जो युद्ध जैसी परिस्थितियों में इसकी सुरक्षा तय करती है.
  • आधुनिक CODOG (Combined Diesel or Gas) प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System), जो जरूरत के अनुसार डीजल या गैस टरबाइन इंजन का उपयोग कर हाई स्पीड और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है.

अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस

महेंद्रगिरी को आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है. इसमें सतह से सतह (Surface to Surface) मिसाइल प्रणाली लोड है. इसके अलावा सतह से हवा (Surface to Air) मिसाइल प्रणाली भी इसे और घातक बनाती है. अन्य विशेषताओं में

  • उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
  • आधुनिक पनडुब्बी रोधी (Anti Submarine Warfare) प्रणाली
  • एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली (Integrated Combat Management System)
  • इन प्रणालियों की मदद से यह युद्धपोत वायु, समुद्र और पानी के भीतर मौजूद खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है. साथ ही दुश्मनों के युद्धपोत की पानी में ही समाधि बना सकता है.

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित

महेंद्रगिरी के निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. यह आत्मनिर्भर भारत पहल का मजबूत उदाहरण है. इसके निर्माण में देशभर के अनेक उद्योगों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने अहम योगदान दिया है. इससे रोजगार सृजन के साथ भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को भी मजबूती मिली है.

भारतीय नौसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

महेंद्रगिरी का कमीशनिंग प्रोजेक्ट 17ए कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि है. इसके नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता, समुद्री सुरक्षा और परिचालन दक्षता में काफी इजाफा होगा. साथ ही भारत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा.

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में निभाएगा अहम भूमिका

आईएनएस महेंद्रगिरी हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देगा. यह युद्धपोत देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा. अपने आदर्श वाक्य शक्तिशाली, राजसी, अद्वितीय के अनुरूप महेंद्रगिरी भारतीय नौसेना की नई ताकत बनकर राष्ट्र सेवा के लिए पूरी तरह तैयार है. (इनपुट- पीटीआई)

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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