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Home National Himanta Biswa Sarma: ‘बांग्लादेशी मुसलमानों से है हमारी लड़ाई…’ गरजे हिमंता- SIR को लेकर कही यह बात

Himanta Biswa Sarma: ‘बांग्लादेशी मुसलमानों से है हमारी लड़ाई…’ गरजे हिमंता- SIR को लेकर कही यह बात

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Himanta Biswa Sarma: ‘बांग्लादेशी मुसलमानों से है हमारी लड़ाई…’ गरजे हिमंता- SIR को लेकर कही यह बात
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, फाइल फोटो

Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि मतदाता सूचियों के जारी विशेष संशोधन (एसआर) के कारण किसी भी असमिया नागरिक को कोई समस्या नहीं हो रही है बल्कि केवल बांग्लादेशी मुस्लिम लोगों को ही इस प्रक्रिया से दिक्कत हो रही है. मुख्यमंत्री ने डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ‘मिया’ समुदाय के लोगों को राज्य में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. सरमा ने दावा किया कि मतदाता सूची से ‘मिया’ मतदाताओं के नाम हटाना केवल एक प्रारंभिक कदम है, और जब बाद में राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जाएगा, तो बांग्लादेश के मुसलमानों के चार से पांच लाख वोट रद्द कर दिए जाएंगे.

बांग्लादेशी लोग नहीं कर सकें मतदान

सीएम हिमंता ने कहा, ‘‘हां, हम मिया समुदाय के वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें हमारे देश में नहीं, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए. हम यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें.’’ उन्होंने पूछा, ‘‘अगर मिया समुदाय को इस संबंध में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें क्यों चिंतित होना चाहिए?’’ उन्होंने कहा “मुझे बहुत खुशी है कि एसआईआर में कुछ लोग परेशान हो रहे हैं. मैंने अपने भाजपा कार्यकर्ताओं को अधिक से अधिक शिकायतें दर्ज कराने की सलाह दी है ताकि कुछ लोगों को यह एहसास हो सके कि असम में अभी भी किसी न किसी तरह का प्रतिरोध मौजूद है.”

हमें ध्रुवीकरण की राजनीति अपनानी होगी- हिमंता

गुवाहाटी में मीडिया के सामने अपने बयान में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा “असम एक ध्रुवीकृत समाज है. अगर हम जीना चाहते हैं तो अगले 30 वर्षों तक हमें ध्रुवीकरण की राजनीति ही अपनानी होगी. अगर आप आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो कर लीजिए. लेकिन एक असमिया होने के नाते मैं आत्मसमर्पण नहीं करना चाहता. लेकिन ध्रुवीकरण हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नहीं है. ध्रुवीकरण असमिया और बांग्लादेशी के बीच है. यही अंतर है. हम असमिया मुसलमानों से नहीं लड़ते. हम सिर्फ बांग्लादेशी मुसलमानों से लड़ते हैं.”

10 फरवरी को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम में मतदाता सूचियों की समीक्षा का आदेश दिया था, जिसका मकसद नागरिकता का सत्यापन करना था. यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. राज्य में नागरिकता अधिनियम के तहत नागरिकता संबंधी अलग प्रावधान हैं. एकीकृत मतदाता सूची 27 दिसंबर को प्रकाशित की गई थी, जबकि दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया 22 जनवरी तक जारी रही. अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी. (इनपुट भाषा)

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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