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Home National Explainer: निर्भया केस और अन्ना आंदोलन को हथियार बनाकर केजरीवाल ने कांग्रेस का किया शिकार, दिल्ली पर किया कब्जा

Explainer: निर्भया केस और अन्ना आंदोलन को हथियार बनाकर केजरीवाल ने कांग्रेस का किया शिकार, दिल्ली पर किया कब्जा

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Explainer: निर्भया केस और अन्ना आंदोलन को हथियार बनाकर केजरीवाल ने कांग्रेस का किया शिकार, दिल्ली पर किया कब्जा
arvind Kejriwal Anna

Explainer: अन्ना हजारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से पहले शायद ही कोई अरविंद केजरीवाल को जानता था. उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के आंदोलन को अपना मजबूत हथियार बनाया. भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की नौकरी छोड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल ने ‘सूचना का अधिकार’ के लिए जमकर काम किया, फिर अन्ना आंदोलन में शामिल हुए. कुछ ही समय में केजरीवाल अन्ना के दाहिना हाथ बन गए. जब अन्ना आमरण अनशन में बैठे थे, तो मंच पर उनके बगल में अरविंद केजरीवाल नजर आते थे. अन्ना को जरूरी मंत्रणा केजरीवाल ही दिया करते थे.

अन्ना आंदोलन के शिल्पकार अरविंद केजरीवाल

जन लोकपाल को लेकर समाजसेवी अन्ना आंदोलन अपने समर्थकों के साथ 5 अगस्त 2011 को दिल्ली के जंतर-मंतर में आमरण अनशन पर बैठ गए. जिसमें अरविंद केजरीवाल, देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी, सुप्रीम कोर्ट के फेमस वकील प्रशांत भूषण भी शामिल हुए. अन्ना आंदोलन को जन आंदोलन में तब्दिल करने में अरविंद केजरीवाल का हाथ रहा. हर मोर्चे पर अन्ना के साथ दिखने वाले केजरीवाल को आंदोलन का शिल्पकार भी माना जाता है. आंदोलन के दौरान केजरीवाल मीडिया के फोकस में रहे. उन्होंने आक्रोशित राष्ट्र के गुस्से को सरकार के दरवाजे तक पहुंचाया. जब 9 अगस्त 2011 को अन्ना हजारे ने अपना अनशन समाप्त किया, तो युवाओं की भीड़ ने काली मूंछ वाले छोटे कद के व्यक्ति को घेर लिया और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. वह आदमी कोई और नहीं बल्कि अरविंद केजरीवाल थे.

Arvind Kejriwal Anna Movement
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अन्ना आंदोलन के रास्ते केजरीवाल ने राजनीति में की एंट्री

2011 में अन्ना आंदोलन ने देश को आंदोलित कर दिया था. उसका लाभ अरविंद केजरीवाल को मिला. अन्ना ने 9 अगस्त को अपना अनशन समाप्त किया, लेकिन उसी दिन से केजरीवाल का नया जन्म हुआ. उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जागी और सियासी राह पर चलने का फैसला लिया. उन्होंने आंदोलन का चोला उतारा और राजनीति के अखाड़े में उतर गए. हालांकि अन्ना हजारे केजरीवाल के इस फैसले से दुखी हुए और अपनी राह अलग कर ली. इधर केजरीवाल ने अपने सपने को साकार करने के लिए 2 अक्टूबर 2012 को आम आदमी पार्टी का गठन किया.

निर्भया केस से अरविंद केजरीवाल को मिली संजीवनी

16 दिसंबर 2012 का दिन शायद ही कोई भूल पाएगा. जब 23 साल की लड़की के साथ चलती बस पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. हैवानों ने उस घटना को जिस तरह से अंजाम दिया था, उसे यादकर आज भी रूह कांप उठती है. बहरहाल, निर्भया कांड से पूरा देश गुस्से में था. देश के गुस्से को अरविंद केजरीवाल ने हवा दी. अन्ना आंदोलन समाप्त होने के बाद केजरीवाल को निर्भया का मुद्दा मिल गया, जो उनके लिए संजीवनी का काम किया. उन्होंने अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और लोगों को यह बताने में सफल रहे कि निर्भया कांड के लिए दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार जिम्मेदार है. उन्होंने विकल्प के रूप में खुद को पेश किया. इस घटना का जिक्र देश के जाने-माने पत्रकार, लेखक और मीडिया आलोचक दयाशंकर मिश्र ने अपनी पुस्तक ‘राहुल गांधी – सांप्रदायिकता, दुष्प्रचार, तानाशाही से एतिहासिक संघर्ष’ में की है. उन्होंने लिखा, “अरविंद केजरीवाल टीवी चैनलों पर लगातार भ्रष्टाचार पर मुखर थे. विकल्प के रूप में स्वंय को आक्रामक रूप से पेश कर रहे थे. लोकपाल की मांगें पूरी होने के बाद अन्ना आंदोलन समाप्त हो गया. इसके बाद केजरीवाल को एक ऐसा मुद्दा मिला, जिसने उनको नई संजीवनी दे दी. यह जानते हुए भी कि दिल्ली पुलिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कोई नियंत्रण नहीं है, अरविंद केजरीवाल और उनके संगठन ने दिल्ली में आक्रामक विरोध प्रदर्शनों और टेलीविजन पर मीडिया कवरेज की मदद से ऐसा वातावरण निर्मित किया, जिससे सीधे तौर पर संदेश गया कि निर्भया केस के लिए शीला दीक्षित जिम्मेदार हैं. शीला दीक्षित बार-बार यह कहती रहीं, लेकिन उनके बयानों को कहीं महत्व नहीं दिया गया. यह विडंबना है कि निर्भया मुद्दे का राजनीतिकरण करने के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार बनाने में कामयाब हो जाते हैं.”

कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन और उसी की गोद में जा बैठे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे के साथ जब जन लोकपाल को लेकर आंदोलन की शुरुआत की थी, उस समय केंद्र में कांग्रेस की अगुआई में यूपीए की सरकार थी. केजरीवाल ने केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ पूरा माहौल बनाया और दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए. अन्ना आंदोलन और निर्भया केस को लेकर केजरीवाल ने ऐसा माहौल तैयार किया कि 2013 की दिल्ली चुनाव में 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे. लेकिन अपने बच्चों की कसम (“मैं अपने बच्चों की कसम खाता हूं कि न भाजपा के साथ गठबंधन करेंगे और न ही कांग्रेस से हाथ मिलाएंगे.”) खाने वाले केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के लिए कांग्रेस की गोद में जा बैठे. हालांकि 49 दिनों में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया. लंबे इंतजार के बाद 2015 में जब फिर से चुनाव हुए तो केजरीवाल ने विस्फोटक जीत दर्ज की. उन्होंने 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में अकेले 67 सीटों पर कब्जा कर लिया. कांग्रेस का आम आदमी पार्टी ने पूरी तरह से सफाया कर दिया. उस चुनाव के बाद अबतक कांग्रेस दिल्ली में वापसी नहीं कर पाई है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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