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Home National महाराष्ट्र बीजेपी के नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा-ऑपरेशन टाइगर क्या है मुझे नहीं पता, हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

महाराष्ट्र बीजेपी के नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा-ऑपरेशन टाइगर क्या है मुझे नहीं पता, हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

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महाराष्ट्र बीजेपी के नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा-ऑपरेशन टाइगर क्या है मुझे नहीं पता, हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं
महाराष्ट्र बीजेपी के नेता चंद्रशेखर बावनकुले

Operation Tiger : महाराष्ट्र की राजनीति में जारी उठा-पटक के बीच बीजेपी के नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेताओं में दलबदल कराने की किसी कोशिश से उनकी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ऑपरेशन टाइगर क्या है, इसलिए इसके बारे में कुछ कहना मेरे लिए उचित नहीं है.

संजय राउत के आरोपों पर नहीं की टिप्पणी

चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना (उबाठा) के कुछ सांसदों के पार्टी से अलग होकर नया गुट बनाने की अटकलों के बीच यह टिप्पणी की है. संजय राउत ने मंगलवार देर रात और फिर बुधवार को मीडिया के सामने यह दावा किया था कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जा रही है. बावनकुले ने इन अटकलों और राउत के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर नागपुर में संवाददाताओं से कहा- मुझे ऑपरेशन टाइगर के बारे में कोई जानकारी नहीं है. मैं नहीं जानता कि ऑपरेशन टाइगर क्या है. मुझे इसकी जानकारी नहीं है इसलिए इस मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

बीजेपी का पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है

संजय राउत ने आरोप लगाया है कि बीजेपी पाला बदलने के लिए सांसदों को धन की पेशकश कर रही है. इस पर बावनकुले ने कहा कि उनकी पार्टी का इस मामले से कोई संबंध नहीं है.उन्होंने कहा कि हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और उनके विधायकों से जुड़े फैसले संबंधित दलों के नेतृत्व का मामला है. चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि शिवसेना नेता एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपनी पार्टी के बारे में फैसले करेंगे और उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी के बारे में निर्णय लेंगे. उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे जानते हैं कि उनके दलों में क्या हो रहा है. इस पूरे मामले से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए इस विवाद में बीजेपी और उसके नेताओं को घसीटने की कोशिश अनुचित है.उद्धव ठाकरे के अपने विधायकों और सांसदों को पार्टी छोड़ने से रोक पाने में नाकाम रहने को लेकर आलोचना के बारे में पूछे जाने पर बावनकुले ने कहा कि उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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