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Home National बेंगलुरु : IT कंपनी के डेकेयर में बच्चों से दुर्व्यवहार, रोने पर बच्चों को वाशिंग मशीन और बाथरूम में किया जाता था बंद

बेंगलुरु : IT कंपनी के डेकेयर में बच्चों से दुर्व्यवहार, रोने पर बच्चों को वाशिंग मशीन और बाथरूम में किया जाता था बंद

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बेंगलुरु : IT कंपनी के डेकेयर में बच्चों से दुर्व्यवहार, रोने पर बच्चों को वाशिंग मशीन और बाथरूम में किया जाता था बंद
बेंगलुरु के कैपजेमिनी डेकेयर में बच्चों से दुर्व्यवहार

Bengaluru Daycare Case : बेंगलुरु पुलिस ने कैपजेमिनी के ब्रुकफील्ड स्थित कैंपस में संचालित डेकेयर सेंटर में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में एक केयरटेकर को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार महिला की पहचान विजयलक्ष्मी के रूप में हुई है, जिसे वायरल वीडियो में बच्चों के साथ मारपीट करते हुए देखा गया है. यह डेकेयर व्हाइटफील्ड के ब्रुकफील्ड में एक IT कंपनी के बेंगलुरु कैंपस के अंदर चल रहा था.

एक केयरटेकर को किया गया गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने विजयलक्ष्मी समेत मंजुला, भवानी, सिंधु और बिंदु के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. अन्य चार आरोपियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन वे अब तक जांच अधिकारियों के समक्ष पेश नहीं हुए हैं. यह मामला 29 जून को HAL पुलिस थाने में दर्ज किया गया था. शिकायत डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के अधिकारी तिलकेश कुमार ने दर्ज कराई थी. शिकायत के आधार पर सामने आए वीडियो में डेकेयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं.

https://twitter.com/SmritiSharma_/status/2072327602744999953

शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहे थे बच्चे

एफआईआर के अनुसार आरोपियों पर बच्चों के साथ मारपीट करने, उन्हें डराने-धमकाने और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप हैं. आरोप है कि रो रहे बच्चों को डराने के लिए वॉशिंग मशीन में बंद कर दिया जाता था. उन्हें पानी से भरे संकरे पाइप में जबरन डाला जाता था तथा बाथरूम जैसी जगहों में बंद कर परेशान किया जाता था.

NCPCR ने लिया स्वत: संज्ञान

नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने व्हाइटफील्ड के ब्रुकफील्ड में एक IT कंपनी के बेंगलुरु कैंपस के अंदर चल रहे एक डेकेयर सेंटर में बच्चों के शारीरिक शोषण के मामले में खुद संज्ञान लिया है. 2 जुलाई, 2026 को बेंगलुरु अर्बन के डिप्टी कमिश्नर पी एस कंथाराजू को लिखे एक लेटर में, NCPCR ने कहा कि सीनियर टेक्निकल एक्सपर्ट परेश शाह की लीडरशिप में उनकी टीम आज फैक्ट-फाइंडिंग जांच के लिए बेंगलुरु जाएगी.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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