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Home National सरकारी अधिकारियों ने दी जानकारी–खाड़ी क्षेत्र में फंसे 20 जहाज और सभी 540 लोग सुरक्षित

सरकारी अधिकारियों ने दी जानकारी–खाड़ी क्षेत्र में फंसे 20 जहाज और सभी 540 लोग सुरक्षित

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सरकारी अधिकारियों ने दी जानकारी–खाड़ी क्षेत्र में फंसे 20 जहाज और सभी 540 लोग सुरक्षित
स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा

Iran War : ईरान–अमेरिका युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों और उनपर सवार लोगों की जानकारी देते हुए राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले 24 घंटे में कहीं से किसी तरह की दुर्घटना की खबर नहीं है. राजेश सिन्हा पोर्ट्स, शिपिंग और वॉटरवेज मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी हैं. उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में हमारे  20 जहाज हैं, जिनपर सवार सभी 540 लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं.

DG शिपिंग का DGComm सेंटर 24 घंटे है एक्टिव

राजेश सिन्हा ने खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के दौरान भारतीयों की सुरक्षा को लेकर अपडेट देते हुए बताया कि डीजी शिपिंग DGComm सेंटर 24X7 एक्टिव रहता है, उसने 98 कॉल और 335 ईमेल हैंडल किए हैं. डीजी काॅम सेंटर की मदद से  25 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की गई है. किसी भी पोर्ट, बड़े या छोटे, पर किसी भी तरह की भीड़ की खबर नहीं है. इस बात की  पुष्टि सभी बड़े पोर्ट और गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के स्टेट मैरीटाइम बोर्ड से बातचीत के बाद की गई है.

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध से LPG और LNG की सप्लाई पर असर 

प्रेस काॅन्फ्रेंस में पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि मिडिल ईस्ट में लड़ाई की वजह से भारत में कच्चे तेल, LPG और LNG की सप्लाई पर असर पड़ा है. इंटरनेशनल मार्केट में दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने कई जरूरी फैसले किए हैं.

रिफाइनरियां पूरी कैपेसिटी से ज्यादा पर काम कर रही हैं

सुजाता शर्मा ने बताया कि हमारे पास क्रूड ऑयल का स्टॉक है और अगले दो महीनों तक सप्लाई की कोई दिक्कत नहीं है.  उन्होंने बताया कि हमारी रिफाइनरियां अपनी पूरी कैपेसिटी से ज्यादा पर काम कर रही हैं. घरेलू LPG प्रोडक्शन लगभग 40% बढ़ गया है. भारत की इम्पोर्ट पर डिपेंडेंसी बहुत अधिक है और लगभग 90% LPG इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट से होता है. इसी वजह से सप्लाई पर असर पड़ा है और सरकार ने कमर्शियल सप्लाई के बजाय घरेलू कंज्यूमर्स को प्रायोरिटी देने का फैसला किया है.  कुछ जगहों पर अफवाहों के बावजूद, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग गईं, कोई कमी नहीं है. भले ही इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत करीब $70 प्रति बैरल से बढ़कर $100 से ज़्यादा हो गई, सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रोडक्ट की कमी न हो. कई पड़ोसी देशों के उलट, जहां फ्यूल की कीमतें बढ़ी हैं, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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