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Home Life and Style गोल्ड ज्वेलरी खरीदते समय लोग अक्सर कर बैठते हैं ये 6 गलतियां, नुकसान और धोखे से बचना है तो जरूर जान लें

गोल्ड ज्वेलरी खरीदते समय लोग अक्सर कर बैठते हैं ये 6 गलतियां, नुकसान और धोखे से बचना है तो जरूर जान लें

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गोल्ड ज्वेलरी खरीदते समय लोग अक्सर कर बैठते हैं ये 6 गलतियां, नुकसान और धोखे से बचना है तो जरूर जान लें
सोना खरीदते समय कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? Ai image

Gold Buying Mistakes: हमारे लिए सोना खरीदना सिर्फ एक इन्वेस्टमेंट नहीं है, बल्कि ये हमारे इमोशंस और ट्रेडिशन से जुड़ा हुआ एक जश्न भी है. शादी का मौका हो या फिर धनतेरस की रौनक, सोने की चमक देखते ही महिलाओं के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है. लेकिन सोना खरीदना जितना अच्छा एहसास होता है, उतना ही इसे खरीदते समय रिस्क भी रहता है. अगर आप सोना खरीदते समय छोटी-सी लापरवाही कर देते हैं, तो इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. आपको शायद यह सुनकर अजीब लगे, लेकिन सही जानकारी की कमी की वजह से अक्सर लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनके कारण उन्हें हजारों रुपये का नुकसान झेलना पड़ जाता है. ऐसे में सोना खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम हो जाता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी ही 6 कॉमन गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको सोना खरीदते समय भूलकर भी नहीं करना चाहिए. जब आप इन गलतियों से बचते हैं, तो आपके पैसे और आपका कीमती सोना, दोनों ही सुरक्षित रहते हैं.

हॉलमार्क को नजरअंदाज करना

सोना खरीदते समय सबसे बड़ी और आम गलती है बिना हॉलमार्क के ज्वेलरी खरीदना. हॉलमार्क इस बात की गारंटी होता है कि जो सोना आप खरीद रहे हैं, वह पूरी तरह से प्योर है. भारत सरकार के नियमों के अनुसार अब केवल छह डिजिट्स वाले यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (एचयूआईडी) वाले सोने की बिक्री को ही माना जाएगा. बिना हॉलमार्क का सोना आपको सस्ता लग सकता है, लेकिन आने वाले समय में जब आप इसे बेचने जाएंगे, तो इसकी सही कीमत नहीं मिलेगी. इसलिए हमेशा छह डिजिट्स वाले यूनिक आइडेंटिफिकेशन कोड को चेक करके ही अपने लिए सोना खरीदें.

सोने के कैरट को सही से न समझना

अक्सर लोग 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के बीच का फर्क नहीं समझ पाते. 24 कैरेट का सोना सबसे प्योर (99.9 प्रतिशत) होता है, लेकिन यह इतना सॉफ्ट होता है कि इससे ज्वेलरी नहीं बनाई जा सकती. आम तौर पर गहने 22 कैरेट यानी कि 91.6 प्रतिशत प्योर या 18 कैरेट यानी कि 75 प्रतिशत प्योर सोने से बनते हैं. कई बार दुकानदार 18 कैरेट की ज्वेलरी को 22 कैरेट के दाम में बेच देते हैं. इसलिए बिल बनवाने से पहले हमेशा यह क्लियर कर लें कि आप कितने कैरेट का सोना खरीद रहे हैं.

मेकिंग चार्ज पर मोलभाव न करना

जब आप कोई गहना खरीदते हैं, तो उसकी कुल कीमत में सोने के दाम के साथ-साथ मेकिंग चार्ज यानी गहने को बनाने की मजदूरी भी जुड़ी हुई होती है. मेकिंग चार्ज अलग-अलग दुकानों पर 8 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत या फिर कई बार उससे भी ज्यादा हो सकता है. लोग अक्सर सोने के भाव पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन मेकिंग चार्ज पर मोलभाव करना भूल जाते हैं. यह एक ऐसी जगह है जहां आप थोड़ा सा मोलभाव करके अपने अच्छे-खासे पैसे बचा सकते हैं.

आज की कीमत की जानकारी न होना

यह बात हम सभी जानते हैं कि सोने की कीमत हर दिन बदलती रहती है. कई बार लोग बिना उस दिन का सही रेट जाने ही दुकान पर चले जाते हैं. कुछ चालाक दुकानदार कस्टमर्स की इस जानकारी में कमी का फायदा उठाकर पुराने या महंगे रेट पर सोना बेच देते हैं. इसलिए घर से निकलने से पहले इंटरनेट पर या किसी भरोसेमंद सोर्स से उस दिन का 22 कैरेट और 24 कैरेट का लाइव रेट जरूर चेक कर लें.

स्टोन्स और मोतियों का वजन भी कीमत में जुड़वाना

आज के समय में इस तरह की ज्वेलरी काफी ज्यादा ट्रेंड में हैं जिनमें कलरफुल स्टोन्स, जेमस्टोन्स या फिर मोतियां लगी हुई होती हैं. लोग अक्सर यह गलती करते हैं कि वे पूरी ज्वेलरी का वजन एक साथ करवा लेते हैं और दुकानदार भी उन पत्थरों का वजन सोने की कीमत में ही जोड़ देता है. नियम यह है कि गहने में लगे स्टोन्स का वजन सोने के टोटल वजन से घटाया जाना चाहिए. जब आप इस ज्वेलरी को बेचने जाएंगे, तो कोई भी सुनार इन स्टोन्स की कीमत आपको नहीं देगा, वह केवल आपको सोने का ही पैसा देगा. इसलिए हमेशा स्टोन्स का वजन अलग से नोट करवाएं.

पक्का बिल या इनवॉइस न लेना

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो मेकिंग चार्ज पर पैसे या टैक्स बचाने के चक्कर में पक्का बिल या फिर इनवॉइस नहीं लेते हैं. वे कच्चा बिल ले लेते हैं या बिना बिल के ही सोना खरीद लेते हैं. आपके लिए यह बहुत ही बड़ी गलती साबित हो सकती है. अगर फ्यूचर में आपके सोने के गहने नकली निकलते हैं या उनमें कोई खराबी आती है, तो बिना इनवॉइस के आप कानूनी तैर पर कुछ नहीं कर पाएंगे. एक इनवॉइस में सोने का वजन, कैरेट, मेकिंग चार्ज और यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर साफ-साफ लिखा हुआ होना चाहिए.

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सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.
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