Jharkhand News:द केरल स्टोरी फेम सुदीप्तो सेन को इस वजह से है झारखंड से खास लगाव

सुदीप्तो सेन ने इस इंटरव्यू में अपनी हालिया रिलीज फिल्म चरक के अलावा द केरल स्टोरी 2 पर भी बात की है.

By Urmila Kori | March 14, 2026 11:47 PM

jharkhand news :‘केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ जैसी फिल्मों के निर्देशक सुदीप्तो सेन इन दिनों बतौर निर्माता अपनी नयी फिल्म ‘चरक’ को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने इस फिल्म की कहानी, उसकी मेकिंग और इससे जुड़े विवादों पर खुलकर अपनी बात उर्मिला कोरी के साथ साझा की.

फिल्म ‘चरक’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी हैं लेकिन सेंसर बोर्ड में फिल्म को लेकर बहुत खींचतान हुई थी ?

फिल्म ‘चरक’ को लेकर इतना बड़ा हंगामा होगा, इसकी मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी. सेंसर बोर्ड को आशंका थी कि फिल्म को लेकर किसी तरह का बैकलैश हो सकता है. इसी वजह से हमारी फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया गया था, जो स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय था . जहां तक यह कहा जा रहा है कि फिल्म हिंदू भावनाओं को आहत करेगी, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. कोई भी समझदार और पढ़ा-लिखा व्यक्ति इस फिल्म का विरोध नहीं करेगा, क्योंकि यह फिल्म कहीं भी हिंदू धर्म को गलत या बुरा नहीं ठहराती है.

‘चरक’ की कहानी क्या है?

मेरी फिल्म ‘चरक’ दरअसल पाखंड की कहानी है. बंगाल, ओडिशा और झारखंड में ‘चरक’ उत्सव लंबे समय से मनाया जाता रहा है. मैंने बचपन में इस उत्सव को करीब से देखा है. उस पर्व में बहुत कुछ सकारात्मक और आस्था से जुड़ा होता था, लेकिन समय-समय पर उससे जुड़ी नरबलि जैसी चिंताजनक बातें भी सामने आती रही हैं. यह फिल्म उसी तरह के पाखंड और कुरीतियों पर सवाल उठाती है.

आप इस फिल्म से निर्माता भी बन गये हैं?

बेहद मुश्किल रहा अनुभव रहा. मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि आप एक अच्छे इंसान हो सकते हैं, पर निर्माता की भूमिका निभाना आसान नहीं है. अभी तो मुझे नहीं लगता कि मैं आगे दोबारा यह जिम्मेदारी उठाना चाहूंगा. ईरान और दूसरे देशों के सिनेमा को देखकर लगता था कि हमें भी कुछ ऐसा बनाना चाहिए. जब हिंदी सिनेमा के बड़े अभिनेता और निर्माता कॉपी से आगे बढ़कर कुछ नया करने की कोशिश नहीं करते, तो मैंने सोचा कि ‘केरल स्टोरी’ से जो भी कुछ पैसे आये हैं, उनसे ही कुछ अलग तरह का सिनेमा बना लूं. निर्माता के तौर पर इतना ज्यादा काम था कि मैं चरक का निर्देशन नहीं कर पाया. मैंने करीबी दोस्त शिलादित्य ने इस फिल्म का निर्देशन किया.

इस फिल्म की शूटिंग झारखंड में भी हुई है. कैसा अनुभव था?

झारखंड के देवघर के पास दो-तीन गांवों में फिल्म की शूटिंग हुई. देवघर एयरपोर्ट से करीब 16 से 17 किलोमीटर दूर वह गांव था. हमें लोगों ने बहुत डराया, कहा कि झारखंड में बहुत गुंडागर्दी होगी, ऊपर से चुनाव का समय है. आप यकीन नहीं करेंगे, झारखंड पुलिस ने खुद हमें कहा था कि अगर कोई छोटा-सा भी इंसिडेंट हो, तो तुरंत इस नंबर पर कॉल कीजिए, लेकिन बीस दिनों की शूटिंग में एक भी समस्या नहीं हुई. हम लोग रात-रात भर काम करते थे. सुबह तीन-चार बजे होटल पहुंचते थे. सिर्फ पुलिस ही नहीं, वहां की पब्लिक भी बहुत अच्छी थी.एक सीन में ऐतराज होने पर कुछ लोगों ने शूटिंग से मना कर दिया था, तब देवघर के स्थानीय लोगों ने मुझे कहा कि आप हमें बोलिये. हम आपको सीन करके देंगे. इतने अच्छे लोग हैं. मैं तो चाहूंगा कि अपनी हर फिल्म की शूटिंग झारखंड में ही करूं.

केरल स्टोरी के आप पार्ट टू से क्यों नहीं जुड़े ?

मुझे विपुल शाह ने निर्देशन के लिए कहा था, लेकिन मैंने मना कर दिया, क्योंकि पार्ट 2 ‘केरल स्टोरी’ की कहानी नहीं है. यह राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की कहानी है और इन विषयों पर मेरा उतना गहरा नॉलेज नहीं है. इतना सेंसिटिव सब्जेक्ट है कि अगर आप उस पर गहराई से रिसर्च नहीं करेंगे, तो फिल्म बहुत सुपरफिशियल बन जायेगी और मेरे हिसाब से सुपरफिशियल फिल्म इस देश के लिए सबसे खतरनाक चीज है.

आपने केरल स्टोरी पार्ट 2 देखी है ?

नहीं, मैंने नहीं देखी है. बिना देखें मैं किसी फिल्म को अच्छी या बुरी नहीं कहूंगा.