खोए हुए खजाने और खतरनाक रहस्यों पर बनी है ‘नागबंधम’, ऋषभ साहनी और नभा नतेश का दमदार अभिनय
Nagabandham Review: ‘नागबंधम’ एक पौराणिक फिल्म है जिसमें प्राचीन मंदिर, छिपा खजाना और दो समय-काल की कहानी जुड़ी है. भव्य विजुअल्स और एक्शन के साथ यह फिल्म रहस्य और रोमांच पेश करती है.
मूवी रिव्यू: ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’
कलाकार: विराट कर्णा, नभा नतेश, महेश मांजरेकर, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, रामचंद्र राजू, अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन, ऋषभ साहनी, दक्षा नागरकर
निर्देशक: अभिषेक नामा
निर्माता: किशोर अन्नापुरेड्डी, निशिता नागिरेड्डी
भाषा: हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु
सेंसर: यू/ए
रेटिंग: 3.5
आज 3 जुलाई को फिल्म ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म की शुरुआत साल 1953 से होती है. आर्कियोलॉजिकल सर्वे की एक टीम गुफाओं में किसी खास रहस्य की खोज कर रही होती है. इसी दौरान टीम के एक सदस्य पर एक रहस्यमयी पेड़ हमला कर देता है, जबकि दूसरा सदस्य नागबंधम से जुड़ी एक खास किताब लेकर वहां से निकल जाता है. बाद में पता चलता है कि वह पेड़ असल में एक शक्तिशाली बैरागी साधु की कैद का हिस्सा है. यह साधु कई सालों से बंद है और अपनी आजादी के लिए ब्रह्मकमल की तलाश कर रहा है.
कहानी में क्या है ट्विस्ट?
इसी बीच कहानी रुद्र नाम के युवक की जिंदगी की तरफ बढ़ती है. रुद्र को बार-बार नागों से जुड़े अजीब सपने आते हैं. उसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसकी बहन की शादी के दौरान हमला होता है और कई लोगों की हत्या कर दी जाती है. इसके बाद रुद्र को महसूस होता है कि यह सब किसी पुराने रहस्य से जुड़ा है. धीरे-धीरे कहानी साल 1747 तक पहुंचती है, जहां ब्रह्मकमल को पाने के लिए खून-खराबा हुआ था. दोनों समय की घटनाएं आगे जाकर एक बड़े रहस्य से जुड़ती हैं. प्राचीन मंदिर, गायब हुआ ब्रह्मकमल और नागबंधम का रहस्य कहानी को आगे बढ़ाते हैं.
निर्देशन और विजुअल्स फिल्म को भव्य बनाने की कोशिश करते हैं
निर्देशक अभिषेक नामा ने कहानी को इतिहास, धार्मिक मान्यताओं और रहस्यमयी तत्वों को मिलाकर एक अलग दुनिया बनाने का प्रयास किया है. फिल्म में दक्षिण भारत के पुराने विष्णु मंदिरों को काफी भव्य तरीके से दिखाया गया है. बड़े सेट्स, मंदिरों की डिजाइन और विजुअल स्केल कई जगह प्रभावित करते हैं. सिनेमैटोग्राफी भी कुछ दृश्यों में अच्छी लगती है और एक्शन सीक्वेंस अच्छे लेवल पर फिल्माए गए हैं.
कलाकारों की परफॉर्मेंस कहानी को संभालने में मदद करती है
रुद्र के रोल में विराट कर्णा अच्छा काम करते हैं. उन्होंने इमोशनल और एक्शन दोनों तरह के सीन में संतुलन बनाए रखा है. नभा नतेश, पार्वती के किरदार में सहज दिखाई देती हैं. ‘फाइटर’ के बाद ऋषभ साहनी एक बार फिर मेगा विलेन अब्दाली के किरदार में अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से गहरी छाप छोड़ते हैं. जगपति बाबू अपने किरदार में गंभीरता लेकर आते हैं. वहीं मुरली शर्मा हमेशा की तरह सहज अभिनय करते नजर आते हैं. रामचंद्र राजू कहानी में डर और तनाव बनाए रखते हैं. इसके अलावा महेश मांजरेकर, अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन और दक्षा नागरकर भी अपने-अपने किरदारों में ठीक काम करते हैं.
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