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हिंदी के 7 सबसे कठिन शब्द, बोलने में जुबान जरूर फंसेगी, आप भी करें कोशिश

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हिंदी के 7 सबसे कठिन शब्द, बोलने में जुबान जरूर फंसेगी, आप भी करें कोशिश
Most Hardest Hindi Words (AI Generated Image)

Most Hardest Hindi Words: हिंदी भाषा अपनी समृद्धता और विविधता के लिए जानी जाती है. यहां ऐसे कई शब्द मिलते हैं जिन्हें बोलना आसान नहीं होता. कई बार तो जुबान लड़खड़ा जाती है और सही उच्चारण करने में मुश्किल आती है. ऐसे ही कुछ कठिन शब्द हम आपके लिए लेकर आए हैं जिनका अर्थ भी जानना जरूरी है. आइए जानते हैं हिंदी के 7 सबसे कठिन शब्द (Most Hardest Hindi Words) और उनके अर्थ.

Most Hardest Hindi Words: हिंदी के सबसे कठिन शब्द

  1. अतिदुर्व्यवहार्य

यह शब्द उच्चारण में कठिन है और इसका अर्थ जिससे व्यवहार करना बहुत मुश्किल हो. आम बोलचाल में यह शब्द उन परिस्थितियों या व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जा सकता है जिनसे तालमेल बैठाना आसान न हो. यह शब्द भाषा की गहराई और अभिव्यक्ति की क्षमता को दर्शाता है.

  1. अतिसूक्ष्मदर्शी

यह शब्द लंबा होने के कारण बोलने में कठिन लगता है. इसका अर्थ है- बहुत ही छोटे कणों को देखने वाला यंत्र (Microscope). विज्ञान और चिकित्सा की भाषा में यह शब्द विशेष महत्व रखता है क्योंकि कई बार सूक्ष्म स्तर पर जांच करने के लिए ऐसे यंत्रों का उपयोग किया जाता है.

  1. निदानोपचारात्मक

यह शब्द चिकित्सकीय शब्दावली से जुड़ा है. इसका अर्थ है- बीमारी का कारण खोजकर उसका इलाज करने की प्रक्रिया. चिकित्सा शास्त्र में रोग की जड़ तक पहुंचकर उपचार करना इसी श्रेणी में आता है. कठिन शब्द होने के बावजूद इसका महत्व व्यावहारिक जीवन में अत्यधिक है.

  1. अनुपलब्ध्यर्थ

उच्चारण में बेहद कठिन यह शब्द का अर्थ है- जो उपलब्ध न हो, उसकी पूर्ति के लिए प्रयुक्त. दार्शनिक और साहित्यिक संदर्भों में यह शब्द अक्सर दिखाई देता है. इसका उपयोग कमी को पूरा करने या अनुपस्थित चीज़ के विकल्प के लिए किया जाता है.

  1. उच्छ्वास

यह अपेक्षाकृत छोटा शब्द है लेकिन जीभ को घुमा देता है. इसका अर्थ है – सांस का बाहर आना. आयुर्वेद और योग की शब्दावली में उच्छ्वास का विशेष महत्व है क्योंकि प्राणायाम और श्वसन क्रियाओं में इसका बार-बार उल्लेख होता है.

  1. औदासीन्य

यह शब्द बोलने में कठिन और लंबा है. इसका अर्थ है- उदासीनता या निष्क्रिय भाव. यह शब्द अक्सर साहित्यिक रचनाओं और मनोविज्ञान के संदर्भों में प्रयोग किया जाता है. व्यक्ति के भावनात्मक व्यवहार को समझने में इसका उपयोग होता है.

  1. दुर्भेद्य

दुर्भेद्य शब्द का अर्थ है- जिसे तोड़ना, भेदना या जीतना अत्यंत कठिन हो. यह शब्द प्रायः किले, दुर्ग, या मजबूत दीवारों के लिए प्रयोग किया जाता है. इसका प्रयोग दृढ़ निश्चय और अडिग व्यक्तित्व के लिए भी किया जाता है.

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रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से एजुकेशन जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं. एजुकेशन, करियर, जॉब, NEET, JEE, बैंकिंग, SSC, UPSC, UPPSC, BPSC और ICAI CA जैसी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है. फिलहाल वो प्रभात खबर डिजिटल की एजुकेशन टीम को लीड कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने TV9 भारतवर्ष डिजिटल, Times Network और अमर उजाला जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है. रवि युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करेंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना पसंद करते हैं. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE, CUET और NEET जैसे कॉम्पिटेटिव एग्जाम इनके लिए स्मार्ट टिप्स तैयार करना अच्छा लगता है. एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में छात्रों को बताना पसंद है. डिजिटल युग में पत्रकारिता की शुरुआत होने के चलते रवि मल्लिक Digital News को अच्छे से समझते भी हैं और उसे यूजर के अनुसार तराशना भी जानते हैं. यही वजह है कि उनकी रिपोर्ट को IGNOU, JNU, IIT गुवाहाटी और NIT जालंधर जैसे संस्थानों ने भी शेयर किया है. रवि की पढ़ाई वाराणसी से हुई है. यहीं के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय (MGKVP) से उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए वो लखनऊ आ गए. स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान लखनऊ में रहकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और साल 2019 के लोकसभा चुनाव को करीब से देखा और एक लोकल वेबसाइट के साथ काम किया. पॉलिटिक्स, क्राइम और बिग ब्रेकिंग खबरों पर हाथ साफ करने के साथ रवि की रुचि एजुकेशन न्यूज की ओर हुई. साल 2019 में ही अमर उजाला के सफलता प्लेटफॉर्म से उन्होंने एजुकेशन की खबरों पर काम करना शुरू किया. इसके बाद साल 2020 में उन्होंने TV9 भारतवर्ष डिजिटल ज्वाइन किया और यहां Career कैटेगरी की शुरुआत की. एजुकेशन की खबरों को कवर करते हुए JNU, DU, जामिया और IIT दिल्ली के कई इवेंट का हिस्सा रहे. रवि के करियर की गाड़ी आगे बढ़ी और साल 2024 में उन्हें Times Now Hindi में एजुकेशन टीम में सीनियर कंटेंट एडिटर का पोस्ट मिला. जॉब, स्कूली शिक्षा, बोर्ड परीक्षा और रिजल्ट की खबरों पर काम करते हुए एक साल पूरा किया. साल 2025 से रवि प्रभात खबर डिजिटल की एनर्जेटिक टीम के साथ जुड़े हैं.
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