[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Education CBSE ने मानी भूल, फॉरेन लैंग्वेज की डिमांड को लेकर जानिए क्या है शिक्षकों का कहना

CBSE ने मानी भूल, फॉरेन लैंग्वेज की डिमांड को लेकर जानिए क्या है शिक्षकों का कहना

0
CBSE ने मानी भूल, फॉरेन लैंग्वेज की डिमांड को लेकर जानिए क्या है शिक्षकों का कहना
बाएं- फूलदेव सोरेंग, दाएं- अमित श्रीवास्तव, बैकग्राउंड-CBSE ऑफिस

CBSE Three Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 29 जून 2026 को थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) को लेकर एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि क्लास 10वीं के मौजूदा स्टूडेंट पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी. क्लास 9वीं के मौजूदा छात्रों को छूट दी गई है. वे दो विदेशी भाषा और एक इंडियन लैंग्वेज पढ़ सकते हैं. इस बीच लगातार न्यूज और खबरों में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी छाई हुई है. स्कूल में पढ़ाई जाने वाली भाषा को लेकर शिक्षकों की राय अलग-अलग है.

थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर क्या है शिक्षकों का कहना?

कुछ का कहना है कि स्थानीय लैंग्वेज से छात्रों को इंडियन कल्चर को जानने में मदद मिलेगी. वहीं कुछ का कहना है कि एक साथ इतनी भाषाओं को पढ़ाने के फैसले पर इसलिए भी विचार करना चाहिए क्योंकि इससे स्टूडेंट्स पर प्रेशर बढ़ेगा. रांची के डोरंडा स्थित St. Xavier’s school के प्रिंसिपल फूलदेव सोरेंग का कहना है कि CBSE द्वारा थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से अधिक समृद्ध बनाना है.

यह भी पढ़ें- भूल जाएं असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना, अगर नहीं है ये 5 स्किल्स! इंफ्लुएंसर ने दिखाया आईना

इंडियन लैंग्वेज से पर्सनालिटी होगी बूस्ट

शिक्षा के क्षेत्र में कई सालों से काम करने वाले फूलदेव सोरेंग ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में कम-से-कम दो भारतीय भाषाओं का नॉलेज छात्रों की पर्सनालिटी के ग्रोथ के लिए जरूरी है. मातृभाषा और भारतीय भाषाएं केवल कम्युनिकेशन का ही जरिया नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की पहचान भी हैं.

Ranchi Teacher On Cbse
फूलदेव सोरें रांची के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल

हालांकि, St. Xavier’s स्कूल के प्रिंसिपल ने आगे कहा कि आज का समय टफ कंपटीशन का है. ऐसे में फॉरेन लैंग्वेज के नॉलेज से उन्हें फ्यूचर में कई फायदे हो सकते हैं. फ्रेंच, जर्मन, जापानी या स्पेनिश जैसी भाषाएं विद्यार्थियों को भविष्य में नए आयाम प्रदान कर सकती हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि भारतीय भाषाओं को पूरी तरह हटाकर उनकी जगह केवल विदेशी भाषा ही सिखाई जाए.

CBSE को प्रैक्टिकल होकर नियम बनाने की जरूरत

पटना स्थित DY Patil स्कूल के इंग्लिश (पीजीटी) शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि CBSE ने पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे विद्यार्थियों को राहत देकर ये दिखाया है कि किसी भी पॉलिसी को प्रैक्टिकल दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए.

लोकल लैंग्वेज हमारी असली पहचान है: इंग्लिश शिक्षक

एक शिक्षक के रूप में वे मानते हैं कि छात्रों को कम-से-कम दो भारतीय भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए. लोकल लैंग्वेज हमारी असली पहचान है. उन्होंने कहा कि कुछ पेरेंट्स ऐसा तर्क देते हैं कि आज के समय में फॉरेन लैंग्वेज की अधिक डिमांड है. मैं मानता हूं कि फॉरेन लैंग्वेज की काफी डिमांड है, इससे रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं. लेकिन क्या विदेशी भाषा के कारण भारतीय भाषा की उपेक्षा (अनदेखा) नहीं किया जा सकता है.

Amit Sirvastav On Cbse
PGT शिक्षक अमित कुमार श्रीवास्तव

शिक्षक ने कहा विदेशी भाषा भारतीय भाषा का रिपेल्समेंट नहीं हो सकती

अपनी भाषा से दूर रहकर छात्रों की पर्सनालिटी कमजोर रह जाती है. विदेशी भाषा सीखना निश्चित रूप से लाभकारी है. लेकिन यह भारतीय भाषाओं का विकल्प नहीं, बल्कि उनका पूरक होना चाहिए. न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत CBSE इस बैलेंस को बनाने की कोशिश कर रही है.

यह भी पढ़ें- CBSE ने बदला अपना ही नियम, 10वीं कक्षा पर नहीं लागू होगी थ्री लैंग्वेज पॉलिसी

Previous article पश्चिमी सिंहभूम: किरीबुरू में जंगली हाथी की मौजूदगी से लोगों में डर, ड्रोन से निगरानी में जुटा वन विभाग
Next article जुलाई में लॉन्च होंगी एक से बढ़कर एक कारें, नई Brezza से Kwid Facelift तक, देखें पूरी लिस्ट
Avatar Of Shambhavi Shivani
शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel