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Home Business ’90 घंटे काम’ बोलने वाले एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन की कितनी है सैलरी?

’90 घंटे काम’ बोलने वाले एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन की कितनी है सैलरी?

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’90 घंटे काम’ बोलने वाले एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन की कितनी है सैलरी?
लार्सन एंड ट्रुबो के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन. फोटो साभार: लाइव मिंट

SN Subrahmanyan Salary: सप्ताह में ’90 घंटे काम’ की विवादित बात बोलकर बुरी तरह फंसने वाले लार्सन एंड ट्रुबो (L&T) के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वे विवादित बयान को लेकर नहीं, बल्कि सैलरी को लेकर सुर्खियों में हैं. चर्चा इस बात की जोरों पर है कि एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन की सैलरी कितनी है? नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें, तो एलएंडटी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एसएन सुब्रह्मण्यन की सैलरी वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 51 करोड़ रुपये रही, जो कंपनी के औसत कर्मचारी वेतन से 534.47 गुना अधिक है.

एसएन सुब्रह्मण्यन की सैलरी का ब्योरा

  • बेसिक सैलरी: 3.6 करोड़ रुपये
  • भत्ते: 1.67 करोड़ रुपये
  • कमीशन: 35.28 करोड़ रुपये
  • रिटायरमेंट बेनिफिट्स: 10.5 करोड़ रुपये
  • कुल सैलरी 51.05 करोड़ रुपये, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 43.11% अधिक है.

एसएन सुब्रह्मण्यन की सैलरी में बढ़ोतरी

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान एसएन सुब्रह्मण्यन की सैलरी की कुल सैलरी 35.66 करोड़ रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 51.05 करोड़ रुपये हो गई. यह वृद्धि कंपनी के प्रदर्शन और एसएन सुब्रह्मण्यन के नेतृत्व को दर्शाती है.

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एसएन सुब्रह्मण्यन की सैलरी बनाम औसत कर्मचारी वेतन

एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन ने हाल के दिनों में सप्ताह में 90 घंटे काम करने की सलाह दी थी, जिससे सोशल मीडिया पर उनकी सैलरी और वर्क कल्चर को लेकर बहस छिड़ गई. सुब्रह्मण्यन की सैलरी कंपनी के औसत कर्मचारी वेतन से 534.47 गुना अधिक है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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