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Home Business CBDT का बड़ा फैसला, अब क्रिप्टो और ई-रुपी भी आएंगे टैक्स दायरे में

CBDT का बड़ा फैसला, अब क्रिप्टो और ई-रुपी भी आएंगे टैक्स दायरे में

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CBDT का बड़ा फैसला, अब क्रिप्टो और ई-रुपी भी आएंगे टैक्स दायरे में
आयकर नियमों में नया संशोधन 2026 (Freepik)

New Amendment To Income Tax Rules 2026: भारत सरकार के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने इनकम टैक्स नियमों (Rule 114F, 114G और 114H) में बड़े बदलाव किए हैं. 1 जनवरी 2026 से लागू हुए ये नए नियम अब आपकी डिजिटल संपत्ति और विदेशी लेन-देन की जानकारी सरकार तक पहुंचाने का रास्ता साफ कर चुके हैं.

क्या अब क्रिप्टो और डिजिटल वॉलेट भी रिपोर्ट होंगे?

जी हां, गुडरिटर्न्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक फाइनेंशियल एसेट्स की परिभाषा में बैंक बैलेंस या शेयर ही आते थे, लेकिन अब इसमें क्रिप्टो-एसेट्स और डिजिटल करेंसी (CBDC) को भी जोड़ दिया गया है. अगर आप किसी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं, तो अब वो संस्थान आपकी जानकारी टैक्स विभाग को देने के लिए बाध्य हैं. हालांकि, 10,000 डॉलर (लगभग 8.3 लाख रुपये) से कम बैलेंस वाले छोटे इलेक्ट्रॉनिक मनी अकाउंट्स को फिलहाल इस रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है.

बैंकों को अब आपसे कौन सी नई जानकारी चाहिए?

अब जब भी आप बैंक जाएंगे या अपना KYC अपडेट करेंगे, तो बैंक आपसे TIN (टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर) और डेट ऑफ बर्थ जैसी अतिरिक्त जानकारियां मांगेंगे. इसके अलावा, अगर आपका कोई जॉइंट अकाउंट है, तो बैंक को अब यह भी बताना होगा कि उसमें कितने लोग शामिल हैं और अकाउंट होल्डर की असल भूमिका क्या है. यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि टैक्स चोरी को रोका जा सके और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स (CRS) का पालन हो सके.

क्या आम जनता के लिए बढ़ेगी कागजी कार्रवाई?

सीधे तौर पर तो यह नियम बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए हैं, लेकिन इसका असर आप पर भी पड़ेगा. आपको अब ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ (खुद से दी गई जानकारी) ज्यादा सावधानी से देनी होगी. अगर आप किसी कंपनी में कंट्रोलिंग पर्सन हैं या किसी ट्रस्ट से जुड़े हैं, तो आपकी पूरी कुंडली टैक्स विभाग के पास होगी. अच्छी बात यह है कि अगर आपकी क्रिप्टो जानकारी किसी दूसरे फ्रेमवर्क (CARF) में रिपोर्ट हो चुकी है, तो उसे दोबारा रिपोर्ट नहीं किया जाएगा ताकि डुप्लीकेशन न हो.

नियमों में बदलाव का असली मकसद क्या है?

सरकार का उद्देश्य साफ है, वो है ट्रांसपेरेंसी. डिजिटल दुनिया में पैसे के लेन-देन को ट्रैक करना मुश्किल होता था, लेकिन अब क्रिप्टो से लेकर ई-रुपी (CBDC) तक सब कुछ टैक्स रडार पर है. इससे न केवल विदेशों में जमा काले धन पर लगाम लगेगी, बल्कि टैक्स विभाग के पास आपके निवेश का एकदम सटीक डेटा मौजूद रहेगा.

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