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Home Business LPG छोड़ PNG अपनाने का आदेश, आम आदमी की जेब को कैसे मिलेगी बड़ी राहत ?

LPG छोड़ PNG अपनाने का आदेश, आम आदमी की जेब को कैसे मिलेगी बड़ी राहत ?

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LPG छोड़ PNG अपनाने का आदेश, आम आदमी की जेब को कैसे मिलेगी बड़ी राहत ?
एक घर में 'दो सुविधाएं' अब गैर-कानूनी (फोटो/Canva)

Gas Pipeline Connection Mandatory: मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग ने भारत की रसोई गैस सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव बना दिया है. भविष्य में गैस की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार ने ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत नई गाइडलाइंस जारी की हैं. अब उपभोक्ताओं के पास सिलेंडर या पाइपलाइन में से किसी एक को चुनने का विकल्प नहीं रहेगा, बल्कि पाइपलाइन वाले क्षेत्रों में PNG अपनाना कानूनी जरूरत बन गई है.

3 महीने की डेडलाइन और सप्लाई पर रोक

सरकार ने उन सभी उपभोक्ताओं को 3 महीने (90 दिन) का समय दिया है जिनके इलाके में पाइपलाइन नेटवर्क पहुंच चुका है. 24 मार्च के आदेश के मुताबिक, इस समय सीमा के भीतर आपको अपना पुराना LPG कनेक्शन छोड़कर PNG पर शिफ्ट होना होगा. यदि कोई उपभोक्ता ऐसा नहीं करता है, तो 90 दिन बाद उसके घर की LPG सिलेंडर सप्लाई स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य लोगों को धीरे-धीरे क्लीन और स्वदेशी गैस नेटवर्क की ओर ले जाना है.

PNG पर क्यों जोर दे रही सरकार ?

युद्ध जैसे हालातों में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए सरकार नेचुरल गैस के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है. सरकार का लक्ष्य बड़ी ट्रांसमिशन लाइनों से लेकर हर घर तक गैस पहुंचाना है. इसके लिए ब्यूरोक्रेटिक बाधाओं को खत्म किया जा रहा है. अब कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने के लिए अलग-अलग अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने होंगे. साथ ही, RWA (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) या हाउसिंग सोसायटियों द्वारा काम रोकने की समस्या को भी खत्म कर दिया गया है. अब उन्हें अनिवार्य रूप से रास्ता देना होगा.

एक समान राष्ट्रीय ढांचा (One Nation, One Gas Grid)

अभी तक अलग-अलग राज्यों और शहरों में पाइपलाइन बिछाने और चलाने के नियम अलग-अलग थे. सरकार अब पूरे भारत के लिए एक केंद्रीय कानूनी ढांचा तैयार कर रही है. इससे गैस ग्रिड बनाने और चलाने में एकरूपता आएगी और काम की रफ्तार बढ़ेगी. सरकार चाहती है कि जिस तरह बिजली के तार और पानी की पाइपलाइन घर-घर तक पहुंची है, उसी तरह रसोई गैस भी बिना किसी रुकावट के हर चूल्हे तक पहुंचे.

लोगों को क्या फायदा होगा

LPG की तुलना में PNG न केवल सरकार बल्कि आम आदमी के लिए भी फायदेमंद है. इसमें सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी का इंतजार या बीच में गैस खत्म होने का डर नहीं रहता. आर्थिक रूप से भी PNG सस्ती पड़ती है क्योंकि इसमें ट्रक, बॉटलिंग प्लांट और डीलर का कमीशन शामिल नहीं होता. इसके अलावा, PNG पर्यावरण के लिए भी बेहतर है क्योंकि यह कोयले, लकड़ी और LPG के मुकाबले अधिक साफ जलती है, जिससे प्रदूषण कम होता है.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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