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Home Business IDBI बैंक में बढ़ेगी पब्लिक की हिस्सेदारी, सरकार लाने वाली है OFS, जानें पूरी डिटेल

IDBI बैंक में बढ़ेगी पब्लिक की हिस्सेदारी, सरकार लाने वाली है OFS, जानें पूरी डिटेल

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IDBI बैंक में बढ़ेगी पब्लिक की हिस्सेदारी, सरकार लाने वाली है OFS, जानें पूरी डिटेल
IDBI Bank

Idli Bank: IDBI बैंक के निजीकरण की कोशिशों के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है. सरकार अब बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) का रास्ता अपना सकती है. दरअसल, बैंक को सीधे बेचने की पिछली कोशिशें उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रहीं, जिसके बाद अब रणनीति में बदलाव की तैयारी है.

क्या होता है OFS ?

सरल भाषा में समझें तो OFS (Offer for Sale) एक ऐसा तरीका है जिसमें प्रमोटर (सरकार या LIC) शेयर बाजार के जरिए अपनी हिस्सेदारी सीधे निवेशकों को बेचते हैं. इससे बाजार में शेयरों की संख्या बढ़ती है और बैंक की वास्तविक वैल्यू का पता चलता है.

क्यों बदला जा रहा है प्लान?

सरकार और LIC मिलकर बैंक की करीब 60.72% हिस्सेदारी बेचना चाहते थे. हाल ही में इस बिक्री प्रक्रिया को इसलिए रोकना पड़ा क्योंकि संभावित खरीदारों की बोलियां सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम कीमत से कम थीं. इसके अलावा, बैंक में आम जनता (Public) की हिस्सेदारी बहुत कम होना भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है.

पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने पर जोर

वर्तमान में IDBI बैंक में आम लोगों की हिस्सेदारी (Public Shareholding) केवल 5.29% है. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी कम हिस्सेदारी की वजह से बैंक की सही बाजार कीमत (Market Valuation) तय करना मुश्किल होता है.

  • सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि पब्लिक शेयरहोल्डिंग को बढ़ाकर 10% से 15% किया जाए.
  • इससे शेयर की कीमत ज्यादा पारदर्शी होगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा.
  • एक या दो बार OFS लाने के बाद बैंक की रणनीतिक बिक्री (Strategic Sale) करना आसान हो जाएगा.

IDBI बैंक में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

फिलहाल इस बैंक के मालिकाना हक का ढांचा कुछ इस प्रकार है:

  • LIC 49.24% हिस्सेदारी के साथ मैनेजमेंट कंट्रोल संभाल रही है.
  • भारत सरकार 45.48% हिस्सेदारी सरकार के पास है.
  • आम जनता केवल 5.29% हिस्सेदारी पब्लिक के पास है.

2016 से अटका है निजीकरण का मामला

IDBI बैंक को प्राइवेट करने की घोषणा सबसे पहले साल 2016 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की थी. इसके बाद 2019 में LIC ने बैंक को डूबने से बचाने के लिए 51% हिस्सेदारी खरीदी थी. हालांकि, 2021 में मोदी सरकार ने फिर से इसे पूरी तरह प्राइवेट करने की मंजूरी दी. फरवरी 2026 में एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया जैसे बड़े ग्रुप्स ने इसमें दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन बात कीमत पर आकर अटक गई.

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Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

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