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Home Business ₹5 लाख की एक एफडी या ₹1-1 लाख की पांच? जानिए निवेश का कौन सा तरीका है सबसे बेस्ट और क्यों

₹5 लाख की एक एफडी या ₹1-1 लाख की पांच? जानिए निवेश का कौन सा तरीका है सबसे बेस्ट और क्यों

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₹5 लाख की एक एफडी या ₹1-1 लाख की पांच? जानिए निवेश का कौन सा तरीका है सबसे बेस्ट और क्यों
FD Investment Tips (Photo: Freepik)

FD Investment Tips : सुरक्षित रिटर्न और बिना किसी रिस्क के पैसों को बढ़ाने के लिए आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है. लेकिन जब किसी के पास एक बड़ी रकम (जैसे ₹5 लाख) निवेश करने के लिए होती है, तो उनके सामने एक बड़ा सवाल आता है, क्या पूरा पैसा एक ही एफडी में डाल देना चाहिए या उसे छोटी-छोटी कई एफडी में बांटकर निवेश करना चाहिए?

अगर आप अगले 10 सालों के लिए ₹5 लाख का निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो एक बड़ी एफडी और ₹1-1 लाख की पांच अलग-अलग एफडी के बीच का चुनाव आपके रिस्क, पैसों की जरूरत (Liquidity) और वित्तीय सुरक्षा को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है. आइए आंकड़ों और फायदों के गणित से इसे आसान भाषा में समझते हैं.

बड़ी एफडी बनाम 5 छोटी एफडी

मान लेते हैं कि निवेश की शर्तें दोनों ही मामलों में बिल्कुल एक जैसी हैं

  • ब्याज दर: 7% सालाना
  • अवधि: 10 साल
  • ब्याज की गणना: तिमाही (Quarterly Compounding)

विकल्प 1: ₹5 लाख की एक ही FD कराने पर

  • निवेश की रकम: ₹5,00,000
  • अनुमानित ब्याज (कमाई): लगभग ₹5,00,799
  • मैच्योरिटी पर कुल रकम: लगभग ₹10,00,799
  • (यानी 7% ब्याज दर पर 10 साल में आपका पैसा लगभग दोगुना हो जाएगा.)

विकल्प 2: ₹1-1 लाख की 5 अलग-अलग FD कराने पर

  • एक एफडी से कुल मैच्योरिटी: लगभग ₹2,00,160 (निवेश: ₹1,00,000 + ब्याज: ₹1,00,160)
  • पांचों एफडी को मिलाकर कुल मैच्योरिटी रकम: लगभग ₹10,00,800

रिटर्न के मामले में दोनों ही विकल्पों में कोई अंतर नहीं है. आप चाहे एक एफडी कराएं या पांच, आपको मिलने वाला कुल पैसा लगभग बराबर ही रहेगा.

5 छोटी एफडी कराने के ‘स्मार्ट’ फायदे

भले ही रिटर्न एक जैसा हो, लेकिन ज्यादातर फाइनेंशियल प्लानर्स (वित्तीय सलाहकार) एक के बजाय कई एफडी बनाने की सलाह देते हैं. इसके पीछे 3 बड़े कारण हैं.

  • इमरजेंसी में पैसों की तुरंत व्यवस्था (Better Liquidity) : मान लीजिए आपको अचानक किसी जरूरत के लिए ₹50,000 की सख्त जरूरत पड़ जाती है:
  • अगर एक ही एफडी है: आपको अपनी पूरी ₹5 लाख की एफडी को समय से पहले तोड़ना (Premature Withdrawal) पड़ेगा. इससे आपको पूरे ₹5 लाख पर बैंक को पेनल्टी (जुर्माना) देनी होगी और भविष्य का ब्याज नुकसान में चला जाएगा.
  • अगर 5 अलग-अलग एफडी हैं: आप अपनी पांच में से सिर्फ एक एफडी (₹1 लाख वाली) को तोड़कर अपना काम चला सकते हैं. आपकी बाकी 4 एफडी बिना किसी नुकसान के सुरक्षित चलती रहेंगी और उन पर पूरा ब्याज मिलता रहेगा.
  • एफडी लैडरिंग (FD Laddering) का फायदा : अलग-अलग एफडी कराकर आप उनकी मैच्योरिटी की तारीखों को अलग-अलग समय (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) पर सेट कर सकते हैं. इसे ‘एफडी लैडरिंग’ कहते हैं. इससे आपके पास समय-समय पर लिक्विड कैश आता रहता है और अगर भविष्य में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो आप उस पैसे को ज्यादा ब्याज पर दोबारा निवेश कर सकते हैं.
  • ₹5 लाख का सरकारी बीमा और बैंक सुरक्षा : डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के नियमों के मुताबिक, किसी बैंक के डूबने की स्थिति में एक निवेशक की केवल ₹5 लाख तक की ही जमा राशि (ब्याज समेत) बीमित (Insured) यानी सुरक्षित होती है.
  • अगर आप अपने ₹5 लाख को अलग-अलग बैंकों की छोटी एफडी में बांट देते हैं, तो आपका पूरा पैसा 100% सुरक्षित रहता है और आपका रिस्क भी कम हो जाता है.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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