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Twitter vs Threads : एलन मस्क के ट्विटर पर कितना भारी पड़ेगा मार्क जुकरबर्ग का थ्रेड्स ?

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Twitter vs Threads : एलन मस्क के ट्विटर पर कितना भारी पड़ेगा मार्क जुकरबर्ग का थ्रेड्स ?

Twitter vs Threads : एलन मस्क के स्वामित्व वाले माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लैटफॉर्म ट्विटर को टक्कर देने के लिए मार्क जुकरबर्ग ने नया थ्रेड्स ऐप लॉन्च कर दिया है. थ्रेड्स मेटा के फोटो + वीडियो शेयरिंग प्लैटफॉर्म इंस्टाग्राम का टेक्स्ट शेयरिंग एडिशन है. आप अपने इंस्टाग्राम क्रेडेंशियल्स के साथ इस पर साइन-इन कर सकते हैं और अपना यूजर नेम, फॉलोअर्स और वेरिफिकेशन बैज जारी रख सकते हैं. यह ऐप डिजाइन के मामले में ट्विटर से काफी मिलता-जुलता है. यह इंस्टाग्राम पर आधारित ऐप है. इससे ट्विटर की मुसीबत बढ़ सकती है.

4 घंटे में 50 लाख साइन-अप्‍स

इंस्‍टाग्राम के इस ऐप ने लॉन्च होने के केवल 2 घंटे में 20 लाख साइन-अप्‍स का आंकड़ा पार कर लिया. वहीं, मात्र 4 घंटे में यह आंकड़ा 50 लाख पहुंच गया. माना जा रहा है कि मार्क जकरबर्ग का यह ऐप मूल रूप से एलन मस्‍क के ऐप ट्विटर को कड़ी टक्‍कर दे सकता है. इंस्‍टा के ब्‍लॉग पोस्‍ट के अनुसार, 100 से ज्यादा देशों में ऐपल और गूगल एंड्रॉयड ऐप स्टोर पर उपलब्ध हो गया है. इसका मतलब यह कि अब यूजर्स थ्रेड्स को ऐपल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल करके इसे यूज करना शुरू कर सकते हैं.

Also Read: Meta ने लॉन्च किया Twitter को टक्कर देनेवाला ऐप Threads पर्सनल इंफॉर्मेशन इकट्ठा कर सकता है थ्रेड्स

मेटा के नये ऐप थ्रेड्स को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐप स्टोर पर उपलब्ध इसकी डेटा प्राइवेसी से जुड़ी जानकारी के अनुसार, थ्रेड्स अपने यूजर्स की हेल्थ, फायनांस, कॉन्टैक्ट्स, ब्राउजिंग और सर्च, लोकेशन, शॉपिंग और सेंसिटिव व पर्सनल इंफॉर्मेशन इकट्ठा कर सकता है. ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने ऐप स्टोर पर थ्रेड्स से जुड़ी जानकारी की एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ट्वीट किया, आपके सभी थ्रेड्स हमारे हैं. एलन मस्क ने इस ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा- हां.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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