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Home Automobile रोड सेफ्टी टिप्स : बचपन से ही बच्चों को सिखाएं यातायात नियम, सरकार ने दो साल पहले ही बना दिया है ये कानून

रोड सेफ्टी टिप्स : बचपन से ही बच्चों को सिखाएं यातायात नियम, सरकार ने दो साल पहले ही बना दिया है ये कानून

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रोड सेफ्टी टिप्स : बचपन से ही बच्चों को सिखाएं यातायात नियम, सरकार ने दो साल पहले ही बना दिया है ये कानून

रांची : बच्चे जब स्कूल जाने, ट्यूशन पढ़ने, दोस्तों के यहां जाने या फिर बाजार जाने के लिए माता-पिताओं की चिंताएं बढ़ जाती हैं. उनकी चिंता बढ़ने के पीछे सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ने वाली गाड़ियां हैं. आज भारत में जिस तेजी के साथ सड़क हादसों में बढ़ोतरी हो रही है, उससे माता-पिताओं की चिंता बढ़ना लाजिमी है. सबसे बड़ी बात यह है कि सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों में वयस्क चालक तो फिर भी बहुत हद तक यातायात नियमों के आधार पर ड्राविंग करते हैं, लेकिन कई किशोर और नवयुवक बेतरतीब तरीके से वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क हादसे की आशंका सताती रहती है. ऐसे में एक जागरूक नागरिक की तरह यदि हम बचपन से ही अपने बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देना शुरू कर दें, तो भारत में होने वाले सड़क हादसों में बहुत हद तक कमी आ सकती है. हालांकि, केंद्र सरकार ने मोटरसाइकिल समेत अन्य दोपहिया वाहनों के पीछे चार साल से छोटे उम्र के बच्चों को बैठाने को लेकर मोटर वाहन कानून में संशोधन भी किया है, लेकिन बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देने की जिम्मेदारी अभिभावक, माता-पिता और शिक्षकों की ही है.

दोपहिया वाहनों के पीछे छोटे बच्चों को बैठाने के नियम

अंग्रेजी के अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने दो साल पहले अक्टूबर, 2021 में मोटरसाइकिल, स्कूटी समेत अन्य दोपहिया वाहनों पर चार साल से कम उम्र छोटे बच्चों को बैठाकर ले जाने संबंधी मसौदे को अधिसूचित किया था. बाद में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 15 फरवरी, 2022 की अधिसूचना के माध्यम से सीएमवीआर, 1989 के नियम 138 में संशोधन किया है और चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए, मोटर साइकिल पर बैठकर जाने या मोटर साइकिल पर किसी के द्वारा ले जाने के संबंध में सुरक्षा उपायों के लिए नियमों का निर्धारण किया है. इसे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 के तहत अधिसूचित किया गया है. सरकार की ओर से इसे अधिसूचित किया जाने के पीछे बच्चों के यातायात को सुरक्षित बनाना और दोपहिया वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति सचेत करना है.

बच्चों को ऐसे दें यातायात नियमों की जानकारी

आपको बता दें कि बच्चे जब स्कूल जाने, ट्यूशन पढ़ने, दोस्तों के यहां जाने या फिर बाजार जाने के लिए माता-पिताओं की चिंताएं बढ़ जाती हैं. बच्चे जब घर से बाहर जाते हैं, तो सड़क को सुरक्षित तरीके से पार करने के लिए सीखना बेहद महत्वपूर्ण है. पैदल चलते समय अच्छी सड़क होना जरूरी नहीं है, बल्कि बच्चों को अच्छी तरह से सड़क पार करने आना चाहिए. उन्हें इस बात की जानकारी होना चाहिए कि पैदल चलते समय सड़क के किस किनारे पर चलना चाहिए. सड़क पार करने के लिए सड़क पर निशान बनाए जाते हैं, उसे क्या कहते हैं. लाल बत्ती पर पड़े निशान को क्या कहते हैं. इसलिए आपको अपने बच्चों को यह सिखाने की जरूरत है कि पैदल चलते समय वे कैसे सुरक्षित रहें और कार या बस में यात्रा करते समय सुरक्षित यात्री कैसे बनें? बच्चों को केवल निर्देश देना ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं, जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं. पहली चीज वह है, जो आपको करने की जरूरत है और वह है सुरक्षित व्यवहार का मॉडल तैयार करना. आइए, जानते हैं कि बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी कैसे दी जा सकती है.

ऐसे सुरक्षित चलें सुरक्षित और सड़क करें पार

इंडिया पैरेंटिंग डॉट कॉम के अनुसार, जब आप पैदल चल रहे हों या सड़क पार कर रहे हों, तो यह सुनिश्चित करें कि आपका छोटा बच्चा आपका हाथ पकड़ ले या आपसे चिपक जाए. हमेशा जेबरा क्रॉसिंग लाइनों का इस्तेमाल करके सड़कें पार करें और हमेशा यह जांच-परख लें कि ट्रैफिक लाइट आपको सड़क पार करने की अनुमति देती है या नहीं. यदि ट्रैफिक लाइट लाल हो, तो इसका मतलब है कि आपको सड़क पार नहीं करना है. वहीं, ट्रैफिक लाइट ग्रीन है, तो आपको सड़क पार करनी है, जबकि लाइट यदि पीली हो, तो इसका अर्थ यह होता है कि आप चारों दिशाओं में देख-सुनकर सड़क पार करें कि चौराहे पर किसी दिशा से गाड़ी आ तो नहीं रही है? यदि आप लगातार इन नियमों का पालन करते हैं, तो आपका बच्चा भी इसे देखेगा और जब वह अकेले घर से बाहर निकलेगा, तो इसका पालन करेगा. आप अपने बच्चे को यह भी समझाते रह सकते हैं कि सड़क पार करते समय आपने क्या किया और क्या सावधानियां बरतीं.

बाइक सुरक्षा

अपने बच्चों को बाइक चलाने की सुरक्षित आदतें सिखाएं और हमेशा निम्नलिखित सावधानियां बरतें…

  • जब आप या आपके परिवार का कोई वयस्क आसपास हो, तभी अपने बच्चे को हमेशा बाइक, स्कूटी, साइकिल या अन्य दोपहिया वाहन चलाने की अनुमति दें.

  • सुनिश्चित करें कि बाइक या अन्य दोपहिया वाहनों के ब्रेक सही तरीके से काम कर रहे हों.

  • आपको यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि जब आपका बच्चा बाइक, साइकिल या दोपहिया वाहन चलाने जा रहा है, तो उसने हेलमेट पहन रखी है या नहीं.

  • यदि आपका बच्चा कम दृश्यता वाले क्षेत्र में या रात में मोटरसाइकिल, साइकिल या अन्य दोपहिया वाहन चलाने जा रहा है, तो इससे पहले आपको अपनी गाड़ी की हेडलाइट और साइडलाइटों की जांच-परख कर लेनी चाहिए.

  • यह मत भूलिए कि आपके बच्चे तभी ऐसा करेंगे, जब आप सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करते दिखाई देंगे.

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बच्चों साथ बस में कैसे करें सफर

  • इसके लिए सबसे पहले आप अपने बच्चे के साथ बस स्टॉप तक जाएं और उसके आने तक प्रतीक्षा करें. सड़क पर कहीं भी हाथ देकर बस को रुकने का इशारा न करें.

  • बच्चों को सिखाएं कि बस में तभी चढ़ें या उसके अंदर से तभी उतरें, जब बस पूरी तरह रुक जाए.

  • यदि आपके बच्चे को स्कूल बस से उतरने के बाद सड़क पार करने की आवश्यकता है, तो उसे बस से 5-6 कदम दूर रहना सिखाएं और सुनिश्चित करें कि बस चालक उसे सड़क पार करते हुए देख ले.

  • अपने बच्चे को बस के अंदर बैठे रहना और बस चालक के निर्देशों का पालन करना सिखाएं.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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