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30 साल जेल में सड़ने के बाद बेगुनाह को मिला इंसाफ, एक चिट्ठी ने खोल दी हत्यारे की पोल

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30 साल जेल में सड़ने के बाद बेगुनाह को मिला इंसाफ, एक चिट्ठी ने खोल दी हत्यारे की पोल
Wrongful Conviction Innocent Man

Wrongful Conviction: अमेरिका की जेलों में कई कहानियां दबी रह जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां वक्त के साथ इंसाफ की शक्ल ले लेती हैं. एमेल मैकडॉवेल की कहानी भी ऐसी ही है. 1991 में, जब वह न्यूयॉर्क की कुख्यात रिकर्स आइलैंड जेल में बंद था, उसे एक चिट्ठी मिली. यह चिट्ठी उसी इंसान ने लिखी थी, जिसने असल में गोली चलाई थी. उस चिट्ठी ने गुनाह कबूल किया था, लेकिन सिस्टम ने उसे नजरअंदाज कर दिया. इसके बाद शुरू हुआ एक बेगुनाह इंसान का 30 साल लंबा संघर्ष, जिसकी जानकारी सीएनएन रिपोर्ट में सामने आई है.

जेल में मिली वो चिट्ठी, जो कभी अदालत तक नहीं पहुंची

1991 की शुरुआत में, 18 साल के मैकडॉवेल को जेल में एक हाथ से लिखी चिट्ठी मिली. चिट्ठी लिखने वाले ने साफ कहा कि हत्या उसी से हुई थी, और उसे इस बात का गहरा अफसोस था कि उसका दोस्त मैकडॉवेल जेल में बंद है. मैकडॉवेल ने पूरी उम्मीद के साथ वह चिट्ठी अपने सरकारी वकील को सौंप दी. लेकिन न वह चिट्ठी अदालत में पेश हुई, न अभियोजकों को दी गई और न ही उसकी कोई जांच हुई. नतीजा यह हुआ कि मैकडॉवेल को हत्या का दोषी मानकर 22 साल से उम्रकैद की सजा सुना दी गई.

Wrongful Conviction in Hindi: 90 का दशक और न्यूयॉर्क का दबाव वाला माहौल

मैकडॉवेल की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब न्यूयॉर्क शहर में अपराध तेजी से बढ़ रहा था. 90 का दशक था, जब नशे और हिंसा ने शहर को जकड़ रखा था. पुलिस और प्रशासन पर दबाव था कि जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़कर सजा दिलाई जाए. इस माहौल में, खासकर युवा अश्वेत लड़कों को शक की नजर से देखा जा रहा था.

घटना के समय मैकडॉवेल सिर्फ 17 साल का छात्र था. पढ़ाई में अच्छा था और अमेरिकी सेना में जाने का सपना देख रहा था. मां के मना करने के बावजूद वह एक घर की पार्टी में चला गया. वहां झगड़ा हुआ और किसी और ने बंदूक निकालकर गोली चला दी. इस गोली से 19 साल के जोनाथन पॉवेल की मौत हो गई. डर के मारे मैकडॉवेल अपनी गर्लफ्रेंड के साथ वहां से भाग गया. (Wrongful Conviction Innocent Man Freed After 30 Years in Hindi)

खुद थाने गया, लेकिन घर नहीं लौटा

अगले दिन मां के कहने पर मैकडॉवेल खुद पुलिस थाने पहुंचा. उसे लगा कि सच बताकर वह घर लौट आएगा. लेकिन पुलिस ने उसे ही मुख्य आरोपी बना लिया. गवाहों के बयान मेल नहीं खा रहे थे, हत्या का हथियार भी नहीं मिला था, फिर भी जांच का पूरा ध्यान उसी पर रखा गया. बाद में ब्रुकलिन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने माना कि पुलिस ने असली शूटर से जुड़े सबूतों पर ध्यान नहीं दिया. 

1992 में, दो साल से ज्यादा जेल में रहने के बाद, मैकडॉवेल को दोषी ठहरा दिया गया. वह 19 साल की उम्र में स्टेट जेल पहुंच गया. जेल में उसने खुद को मजबूत बनाया. उसने कानून पढ़ा, पढ़ाई पूरी की, और दूसरे कैदियों की कानूनी मदद भी की. उस चिट्ठी को वह बाइबिल के अंदर रखता था, जो उसके लिए सच की एक निशानी थी.

30 साल बाद सच की जीत

2009 में, 19 साल बाद, अभियोजकों ने उसे एक समझौता दिया. कहा गया कि अगर वह हत्या की जगह मानस्लॉटर मान ले, तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाएगा. अगर वह मना करता, तो जेल में और साल बिताने पड़ते. मजबूरी में मैकडॉवेल ने यह समझौता स्वीकार कर लिया. वह जेल से बाहर तो आ गया, लेकिन कागजों में अब भी अपराधी था.

कई सालों बाद, मैकडॉवेल और उसके वकील ऑस्कर मिशेलिन ने ब्रुकलिन डीए की कन्विक्शन रिव्यू यूनिट से मामले को दोबारा खुलवाया. 2023 में, चिट्ठी लिखने वाले शख्स ने कबूल किया कि गोली उसी ने चलाई थी और यह आत्मरक्षा में हुआ था. इसके बाद डीए ऑफिस ने मैकडॉवेल की सजा रद्द कर दी और माना कि न्याय व्यवस्था उससे चूक गई थी. असली शूटर पर केस नहीं चला, लेकिन मैकडॉवेल को बेगुनाह घोषित कर दिया गया.

मुआवजा मिला 

इसके बाद न्यूयॉर्क सिटी ने मैकडॉवेल को 90 लाख डॉलर का मुआवजा दिया. लेकिन मैकडॉवेल ने न्यूयॉर्क स्टेट के खिलाफ अलग केस भी किया है. उसका कहना है कि जेल में उससे जबरन काम कराया गया और मेहनत का सही पैसा नहीं मिला. उसके वकील इसे बेगुनाह इंसान से कराई गई जबरन मजदूरी बताते हैं. मैकडॉवेल मानता है कि पैसा उसकी जिंदगी वापस नहीं ला सकता. उसने अपनी जवानी खो दी, जेल में रहते हुए उसके पिता की मौत हो गई और जिंदगी के कई जरूरी पल छूट गए. आज भी कई बार पुराने रिकॉर्ड सामने आ जाते हैं और उसे बार-बार खुद को बेगुनाह साबित करना पड़ता है.

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