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Home World यूरोपीय जंगलों के ‘राजकुमार’ पर भेड़ियों का हमला, कैमरे में दिखा दुर्लभ शिकार का प्रयास; Video

यूरोपीय जंगलों के ‘राजकुमार’ पर भेड़ियों का हमला, कैमरे में दिखा दुर्लभ शिकार का प्रयास; Video

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यूरोपीय जंगलों के ‘राजकुमार’ पर भेड़ियों का हमला, कैमरे में दिखा दुर्लभ शिकार का प्रयास; Video
भेड़ियों की सांकेतिक फोटो. क्रेडिट- कैनवा.

Wolves Attack European Bison: दुनिया के सबसे पुराने जंगलों में से एक पोलैंड के बियालोविएजा प्राइमिवल फॉरेस्ट से जंगली जानवरों की दुनिया का हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है. कैमरा ट्रैप में पहली बार ऐसा दुर्लभ दृश्य रिकॉर्ड हुआ है, जिसमें भेड़ियों के एक झुंड ने यूरोपीय बाइसन के समूह पर हमला किया और उसके एक नवजात बच्चे को अपना शिकार बनाने की कोशिश की. बाइसन को यूरोपीय जंगलों का राजा इसके साइज की वजह से कहा जाता है. यहाँ जंगल से मतलब यूरोप के प्राचीन घने वनों और विशाल वन क्षेत्रों से है. 

भेड़ियों के बाइसन के बच्चे पर अटैक की यह घटना 15 सितंबर 2025 की है. वीडियो में दिखाई देता है कि पांच भेड़िए (Canis lupus) कैमरे के सामने आते हैं. उनके पीछे तीन मादा बाइसन और उनका नवजात बच्चा भी नजर आता है.

शुरुआत में बाइसन भेड़ियों का पीछा करते हैं, लेकिन इस दौरान बच्चा झुंड से अलग होकर अकेला रह जाता है. इसी मौके का फायदा उठाकर भेड़िए उसे घेर लेते हैं. वे उसके गले पर हमला करते हैं और उसे खींचकर ले जाने की कोशिश करते हैं.

हालांकि, दो मादा बाइसन तुरंत बच्चे को बचाने के लिए आगे आती हैं और भेड़ियों को पीछे हटना पड़ता है. कुछ समय बाद भेड़िए दोबारा लौटते हैं और वीडियो के दूसरे हिस्से में फिर बच्चे को पकड़ने की कोशिश करते हैं. इस बार पूरा बाइसन झुंड एक साथ सामने आ जाता है और हमला रोक देता है.

यूरोप के सबसे पुराने जंगल में रिकॉर्ड हुई घटना

यह वीडियो पोलैंड और बेलारूस की सीमा पर मौजूद बियालोविएजा प्राइमिवल फॉरेस्ट का है. यह यूरोप का सबसे पुराना और सबसे अच्छी तरह संरक्षित समशीतोष्ण मैदानी जंगल माना जाता है. करीब 3,50,600 एकड़ यानी 1,41,900 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जंगल में दुनिया में यूरोपीय बाइसन (Bison bonasus) की सबसे बड़ी आबादी पाई जाती है. लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, एक नए अध्ययन के अनुसार, पोलैंड वाले हिस्से में 870 से ज्यादा बाइसन हैं, जबकि बेलारूस वाले हिस्से में इनकी संख्या करीब 730 है.

एक वयस्क नर बाइसन का वजन 900 किलोग्राम से भी अधिक हो सकता है. उसकी विशाल शक्ति और प्रभावशाली उपस्थिति उसे जंगल का राजा जैसा बनाती है. बाइसन केवल एक बड़ा जानवर ही नहीं, बल्कि जंगल के पर्यावरण को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह घास, झाड़ियाँ और अन्य वनस्पतियाँ खाकर तथा जंगल में घूमकर प्राकृतिक खुली जगहें बनाता है.

इससे अनेक प्रकार के पौधों, पक्षियों और अन्य जीवों को रहने और बढ़ने का अवसर मिलता है. इसी कारण इसे ‘इकोसिस्टम इंजीनियर’ भी कहा जाता है. 1919 में यूरोपीय बाइसन जंगलों से लगभग खत्म हो गए थे. इसके बाद 1952 में इन्हें दोबारा बियालोविएजा जंगल में बसाया गया.

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क्या बाइसन सबसे शक्तिशाली शिकारी भी है?

नहीं. बाइसन जंगल का राजा अपनी विशालता और प्रभाव के कारण कहलाता है, लेकिन वह शिकारी नहीं है. लंबे समय से माना जाता रहा है कि यूरोपीय बाइसन, ऐसा जीव है जिसका शिकार लगभग कोई दूसरा जानवर नहीं करता, सिर्फ इंसान ही इसका सबसे बड़ा खतरा रहा है. यूरोप के प्रमुख शिकारी जीव भेड़िया और भूरा भालू हैं. हालांकि एक स्वस्थ वयस्क बाइसन इतना शक्तिशाली होता है कि अधिकांश शिकारी उससे दूर ही रहना पसंद करते हैं. लेकिन इस नए वीडियो ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

शोधकर्ताओं ने क्या कहा?

29 मई को जर्नल ‘इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ में प्रकाशित हुए एक शोध के अनुसार, बियालोविएजा प्राइमिवल फॉरेस्ट में भेड़ियों द्वारा यूरोपीय बाइसन के झुंड पर हमला करने का पहला वीडियो रिकॉर्ड किया गया प्रमाण है. हालांकि, वीडियो में बाइसन की सीधी मौत रिकॉर्ड नहीं हुई, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह घटना संकेत देती है कि भविष्य में ऐसे हमले सफल भी हो सकते हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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