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Home World बंधकों की रिहाई के साथ युद्धविराम समझौता लागू, लेकिन क्या गाजा में आ पाएगी स्थायी शांति? असमंजस अब भी बरकरार

बंधकों की रिहाई के साथ युद्धविराम समझौता लागू, लेकिन क्या गाजा में आ पाएगी स्थायी शांति? असमंजस अब भी बरकरार

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बंधकों की रिहाई के साथ युद्धविराम समझौता लागू, लेकिन क्या गाजा में आ पाएगी स्थायी शांति? असमंजस अब भी बरकरार
गाजा में राइफल के साथ इजरायल की कैद से रिहा हुए फिलिस्तीनी कैदी. फोटो- PTI.

Will Israel Hamas Truce bring Peace: इजरायल और हमास के बीच दो साल से जारी युद्ध समाप्ति की राह पर चल चुका है. सोमवार को इजरायल और हमास ने सोमवार को बंधकों तथा कैदियों को रिहा कर गाजा युद्धविराम समझौते के पहले महत्वपूर्ण चरण को आगे बढ़ाया, जिसने उम्मीद जगायी है कि अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ यह समझौता शायद दो साल से जारी उस युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त कर सके, जिसने गाजा को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है. हालांकि, हमास के निरस्त्रीकरण, गाजा के शासन और फलस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने जैसे जटिल मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह समझौता फिलहाल केवल युद्ध को रोकने का अस्थायी उपाय है.

इस युद्ध की शुरुआत सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से हुई थी, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और हमास ने 251 इजरायली लोगों को बंधक बना लिया गया. इजरायल की जवाबी कार्रवाई में 67,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें आम नागरिक भी शामिल हैं. दो साल तक हमास की कैद में रहे बंधकों की रिहाई पर पूरे इजरायल में जश्न मनाया गया. वहीं, इजरायल ने लगभग 1,900 फलस्तीनी कैदियों को छोड़ा, जिनमें से 250 उम्रकैद की सजा काट रहे थे. मिस्र में आयोजित सम्मेलन में ट्रंप, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अन्य देशों के नेताओं ने गाजा के भविष्य पर चर्चा की.

दोनों ओर से हुई कैदियों की रिहाई

अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से पेश की गई 20 सूत्रीय योजना के पहले चरण में दोनों पक्षों ने कैदियों की रिहाई को आगे बढ़ाया है. गाजा में रिहा कैदियों की वापसी पर खुशी दिखी, लेकिन वहां की स्थिति अब भी दयनीय है. शहर मलबे में बदल चुका है, अर्थव्यवस्था बर्बाद है और पुनर्निर्माण में वर्षों लग सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का जश्न मनाने के लिए पश्चिम एशिया की यात्रा की. इजरायली संसद में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अब समय है कि इस युद्ध की जीत को शांति और समृद्धि में बदला जाए. मिस्र में उन्होंने अन्य विश्व नेताओं के साथ बैठक की, ताकि समझौते के अगले चरणों को लागू किया जा सके.

इजरायल के लिए 20 जीवित बंधकों की रिहाई ने उत्साह और राहत का माहौल रहा, लेकिन उनके लौटने के बाद युद्ध समाप्त करने का दबाव अब घट सकता है, जिससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को समझौते के अगले चरणों को आगे बढ़ाने का समय मिल सकता है. समझौते के पहले चरण के तहत इजरायल को चार मृत बंधकों के शव भी मिले हैं तथा 24 और लौटाए जाने हैं. इसके लिए गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने का वादा किया गया है.

ट्रंप ने निभाई बड़ी भूमिका

इस शांति समझौते को लागू करवाने में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा हाथ रहा. ट्रंप नेतन्याहू से नाराज थे, क्योंकि उन्होंने युद्ध को लंबा खींचा और अंत समय में कतर पर भी हमला कर दिया, जो पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे खास दोस्त है. अमेरिका का सबसे बड़ा एयर बेस भी इसी देश में है. ऐसे में नेतन्याहू के पास ट्रंप की बात मानने के अलावा कोई चारा नहीं था. वहीं ट्रंप ने हमास को भी भरपूर धमकी दी. उन्होंने उसको पूरी तरह से समाप्त करने की चेतावनी दी, अगर वह पीस प्लान पर राजी नहीं होता है तो. ट्रंप की घुड़की ने दोनों पर असर किया और शांति समझौता लागू हो गया. अरब देश और तुर्की के साथ यूरोपीय देशों ने भी इसमें सकारात्मक भूमिका निभाई. 

क्या गाजा में आ पाएगी शांति?

इस समझौते को लागू करवाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और मिस्र की यात्रा की. उन्होंने इजरायली संसद (नेसेट) को भी संबोधित किया. इस दौरान बेंजामिन नेतन्याहू ने संसद में कहा कि यह समझौता “हमारे सभी लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए युद्ध को समाप्त करता है.” बहरहाल, आलोचकों ने उन पर युद्ध को राजनीतिक कारणों से लंबा खींचने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने नकार दिया. हालांकि इस योजना से क्या शांति आएगी? क्योंकि इजरायली प्रधानमंत्री ने हमास को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की थी, जबकि हमास ने भी इजरायल के अस्तित्व तक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया था. फिलहाल गाजा के आम निवासी अपने घर लौट रहे हैं, एक शांति की आस में, जो केवल जुबान और कागजों पर हुए हस्ताक्षर की आशा पर निर्भर है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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