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Home World क्या LPG के बाद PNG संकट से रूबरू होगा भारत? कतर के दो जहाजों को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोका

क्या LPG के बाद PNG संकट से रूबरू होगा भारत? कतर के दो जहाजों को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोका

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क्या LPG के बाद PNG संकट से रूबरू होगा भारत? कतर के दो जहाजों को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोका
होर्मुज स्ट्रेट को पार नहीं कर पाए कतर के जहाज, सांकेतिक तस्वीर

Gas Crisis India : ईरान युद्ध की वजह से भारत में एलपीजी का संकट तो है ही अब जैसी सूचना सामने आ रही है, ऐसा लगता है कि कुछ ही दिनों में देश में पीएनजी और सीएनजी का संकट भी दिखने लगेगा. न्यूज एजेंसी रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी कि है कि ईरान ने कतर के दो जहाजों को होर्मुज स्ट्रेज से गुजरने नहीं दिया है जिसपर एलएनजी के टैंकर भरे हुए थे. LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से ही पीएनजी और सीएनजी का निर्माण किया जाता है.

ईरान ने रोका कतर का तेल टैंकर

सूत्रों के हवाले से रायटर्स ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार कतर का दो जहाज अल दायेन और राशिदा पूर्व की ओर बढ़ रहा था, लेकिन रास्ता नहीं मिलने की वजह से दोनों जहाज वापस कतर की ओर चले गए हैं. ये दोनों जहाज चीन और पाकिस्तान की ओर आ रहे थे, लेकिन अब वापस कतर चले गए हैं. 28 फरवरी से ईरान युद्ध शुरू हुआ है और उसके बाद से होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही प्रभावित है, जिसकी वजह से भारत में गैस का संकट बरकरार है.

कतर से सप्लाई रूकी, तो भारत में गहराएगा पीएनजी और सीएनजी संकट

भारत में अभी पीएनजी और सीएनजी की जितनी डिमांड है, उसका 50% भारत आयात करता है. शेष 50% का भारत में उत्पादन होता है.भारत जितना एलएनजी आयात करता है उसका अधिकतर हिस्सा कतर से आता है, लेकिन युद्ध के बाद से कतर से एलएनजी की सप्लाई बाधित है. अगर यही स्थिति रही, तो संभव है कि देश में पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई भी बाधित हो जाए. एलपीजी संकट को देखते हुए पिछले दिनों सरकार ने पीएनजी को बढ़ावा देने की बात कही थी. इसके पीछे का उद्देश्य देश में गैस संकट को नियंत्रित रखना था, लेकिन अब जैसी सूचना सामने आ रही है, वह कुछ और संकेत देते हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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