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Home World इजरायल ने 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट कैसल पर किया कब्जा, क्या है इस लेबनानी किले की अहमियत? बीच-बचाव के लिए कूदा फ्रांस

इजरायल ने 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट कैसल पर किया कब्जा, क्या है इस लेबनानी किले की अहमियत? बीच-बचाव के लिए कूदा फ्रांस

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इजरायल ने 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट कैसल पर किया कब्जा, क्या है इस लेबनानी किले की अहमियत? बीच-बचाव के लिए कूदा फ्रांस
ब्यूफोर्ट कैसल पर इजरायली कब्जे की एआई तस्वीर. फोटो- एक्स (@@IsraelIDFend).

Israel Captures Beaufort Castle: इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी टकराव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है. अप्रैल में हुए युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष जारी है.  ताजा सैन्य अभियान के तहत इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में स्थित लगभग 900 साल पुराने ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कैसल और उससे जुड़ी एक रणनीतिक पहाड़ी पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को दक्षिणी लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई और आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है.

2 मार्च को हिजबुल्लाह ने अपने सहयोगी ईरान के समर्थन में इजरायल की ओर रॉकेट और ड्रोन हमले शुरू किए थे. इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया. इसके बाद दोनों देशों की सीमा पर संघर्ष लगातार बढ़ता गया. लेबनान सरकार के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में अब तक 3,370 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इजरायल का कहना है कि इस दौरान उसके 24 सैनिक और चार नागरिक मारे गए हैं. संघर्ष के कारण लेबनान में 12 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि उत्तरी इजरायल के हजारों नागरिकों को भी अपने घर छोड़ने पड़े हैं.

ब्यूफोर्ट कैसल पर फहराया गया इजरायली झंडा

टीवी पर प्रसारित अपने एक संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सैनिकों ने शनिवार रात ब्यूफोर्ट कैसल पर नियंत्रण स्थापित किया और वहां इजरायल का राष्ट्रीय ध्वज तथा गोलानी ब्रिगेड का झंडा फहराया. उन्होंने कहा कि चार दशक पहले यह स्थान इजरायली सैनिकों की बहादुरी का प्रतीक था, लेकिन उस समय देश के भीतर मतभेदों की भी याद दिलाता था. अब इजरायली सेना एकजुट होकर और पहले से अधिक मजबूत स्थिति में यहां लौटी है.

नेतन्याहू ने बताया कि इजरायली सेना लितानी नदी को पार कर चुकी है और उसने कई रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया है. उनके अनुसार अब सेना का अगला लक्ष्य उन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करना है, जो पहले हिजबुल्लाह के प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाते थे.

क्यों अहम है ब्यूफोर्ट कैसल?

ब्यूफोर्ट कैसल (Beaufort Castle), जिसे अरबी में क़लात अल-शकीफ कहा जाता है, दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित मध्यकालीन किला है. माना जाता है कि इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में क्रूसेडर्स (धर्मयुद्ध लड़ने वाले यूरोपीय योद्धाओं) ने कराया था. समुद्र तल से लगभग 700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला लितानी नदी घाटी और इजरायल-लेबनान सीमा क्षेत्र पर नजर रखने के लिए आदर्श स्थान माना जाता है.

सदियों से सैन्य ताकत का प्रतीक

इतिहास में इस किले पर कई शक्तियों का कब्जा रहा है. क्रूसेडर्स के बाद अय्यूबी, मामलुक और फिर ओटोमन साम्राज्य ने इसका इस्तेमाल किया. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक स्थिति है. यहां से दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर निगरानी रखी जा सकती है, इसलिए हर दौर में इसे सैन्य चौकी की तरह इस्तेमाल किया गया.

1982 के लेबनान युद्ध से जुड़ी है खास पहचान

ब्यूफोर्ट कैसल का नाम दुनिया भर में 1982 के लेबनान युद्ध के दौरान चर्चा में आया. उस समय इजरायली सेना ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (PLO) के लड़ाकों से इसे छीनने के लिए बड़ा सैन्य अभियान चलाया था. किले पर कब्जे के लिए हुई लड़ाई में इजरायल को सैनिकों का नुकसान भी उठाना पड़ा था. यही वजह है कि यह स्थान इजरायल की सैन्य स्मृतियों में एक विशेष जगह रखता है.

2000 में छोड़ा, अब फिर कब्जा

इजरायल ने 1982 से 2000 तक दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर सैन्य उपस्थिति बनाए रखी थी. लेकिन मई 2000 में उसने अपनी सेना वापस बुला ली और ब्यूफोर्ट कैसल भी छोड़ दिया. इसलिए अब, लगभग 25 साल बाद, इजरायली सेना द्वारा इस किले पर फिर से कब्जा करने का दावा केवल सामरिक नहीं बल्कि राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी रखता है.

हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान में क्यों अहम?

ब्यूफोर्ट कैसल जिस पहाड़ी रिज पर स्थित है, वहां से हिजबुल्लाह के कई पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस इलाके पर नियंत्रण मिलने से इजरायल को:

  • दक्षिणी लेबनान में बेहतर निगरानी क्षमता मिलती है.
  • हिजबुल्लाह की आवाजाही और हथियारों के नेटवर्क पर नजर रखना आसान होता है.
  • सीमा पार हमलों को रोकने में मदद मिल सकती है.
  • आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए एक मजबूत ऊंचाई वाला आधार क्षेत्र मिल जाता है.
  • लितानी और जाहरानी नदियों के बीच रणनीतिक स्थिति

यह किला दक्षिणी लेबनान के उस क्षेत्र में स्थित है, जहां से लितानी नदी घाटी का बड़ा हिस्सा दिखाई देता है. इजरायल लंबे समय से लितानी नदी के उत्तर तक हिजबुल्लाह की सैन्य मौजूदगी को सीमित करने की बात करता रहा है. अब जब इजरायली सेना जाहरानी नदी की ओर बढ़ रही है, तो ब्यूफोर्ट कैसल उसके लिए एक महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑब्जर्वेशन पोस्ट की भूमिका निभा सकता है.

हिजबुल्लाह के गढ़ों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब युद्धविराम के बाद शनिवार को हिजबुल्लाह की ओर से उत्तरी इजरायल पर सबसे बड़े हमलों में से एक किया गया. हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि कई इलाकों में स्कूल बंद करने पड़े और सुरक्षा प्रतिबंध लागू किए गए. नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने सेना को लेबनान में जमीनी अभियान का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया है.

इजरायली सेना पहले ही लितानी नदी तक के इलाके पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर चुकी है. अब सैनिक जाहरानी नदी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है. जाहरानी नदी के दक्षिण में रहने वाले लोगों को इजरायली सेना ने क्षेत्र खाली करने की चेतावनी जारी की है. 

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अमेरिका की मध्यस्थता के बीच बढ़ी सैन्य कार्रवाई

संघर्ष के बीच अमेरिका दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की कोशिशों में लगा हुआ है. शुक्रवार को वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों ने इजरायल और लेबनान के रक्षा प्रतिनिधियों की बैठक कराई थी. इससे पहले 15 मई को दोनों पक्षों ने युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति जताई थी. हालांकि जमीनी स्तर पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं.

फ्रांस ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक बुलाने की रखी मांग

लेबनान में बढ़ती हिंसा को देखते हुए फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है. फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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