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Home World दुनिया का सबसे दुष्ट व्यक्ति ट्रंप अब तक जीवित क्यों है? अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में गूंजा यह सवाल

दुनिया का सबसे दुष्ट व्यक्ति ट्रंप अब तक जीवित क्यों है? अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में गूंजा यह सवाल

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दुनिया का सबसे दुष्ट व्यक्ति ट्रंप अब तक जीवित क्यों है? अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में गूंजा यह सवाल
अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार

Ayatollah Ali Khamenei Funeral : ईरान के दिवंगत शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का छह दिवसीय कार्यक्रम जारी है. इस कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुति देने वाले एक कवि ने देश की राजधानी तेहरान में रविवार को लाखों लोगों की भीड़ के सामने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मार डालने का आह्वान किया.

अमेरिका मुर्दाबाद और इजरायल मुर्दाबाद के नारों से गूंजा तेहरान

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कवि मोहम्मद रसूली ने भीड़ से अमेरिका मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगवाए. अपनी प्रस्तुति के दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए भीड़ से यह पूछा कि आखिर दुनिया का सबसे दुष्ट व्यक्ति अब तक जीवित क्यों है? उनकी इस बात पर भीड़ ने उत्साह जताया. यह जानकारी पीटीआई न्यूज एजेंसी ने दी है.

काले कपड़े और काले झंडे में आयोजन स्थल पहुंचे समर्थक

रविवार को अंतिम संस्कार में एक दिन पहले की तुलना में कहीं अधिक लोग शामिल हुए. काले कपड़े पहने शोकाकुल लोग खामेनेई के सम्मान में बैनर और झंडे लेकर आयोजन स्थल तक पहुंचे. कुछ बैनरों में ट्रंप को मार डालने का आह्वान भी किया गया था. खामेनेई ने कई दशकों तक ईरान पर शासन किया था. वह ईरान युद्ध की शुरुआत में 28 फरवरी को हुए हवाई हमले में मारे गए थे. वह 86 वर्ष के थे.
अली खामेनेई का अंतिम संस्कार देश की धर्मतांत्रिक व्यवस्था और नए सर्वोच्च नेता एवं उनके बेटे अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई के लिए समर्थन बढ़ाने का अवसर बन सकता है.युद्ध के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई है. ईरान और अमेरिका की वार्ता अंतिम संस्कार पूरा होने तक रोक दी गई है. 9 जुलाई को खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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