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Home World भारत का पड़ोसी क्यों सुलग रहा? नेपाल से श्रीलंका तक बवाल… इमरान जेल में, हसीना छोड़ गईं देश  

भारत का पड़ोसी क्यों सुलग रहा? नेपाल से श्रीलंका तक बवाल… इमरान जेल में, हसीना छोड़ गईं देश  

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भारत का पड़ोसी क्यों सुलग रहा? नेपाल से श्रीलंका तक बवाल… इमरान जेल में, हसीना छोड़ गईं देश  
भारत का पड़ोसी देश क्यों जल रहा है / एआई ईमेज

Why India Neighboring Country Burning: नेपाल में सोशल मीडिया बैन ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. सोमवार को राजधानी काठमांडू समेत कई हिस्सों में जेन-जी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. यहां तक कि पीएम ओली का पैतृक घर भी प्रदर्शनकारियों के गुस्से से अछूता नहीं रहा. इस घटना के दौरान 20 लोगों की मौत हुई. इसके बाद आखिरकार सरकार को झुकना ही पड़ा और सोशल मीडिया बैन हटा दिया गया.यह घटना दिखाती है कि भारत के पड़ोस में लोकतंत्र, सत्ता संघर्ष और आर्थिक असुरक्षा जैसे मुद्दों ने पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता को गहरा किया है.

Why India Neighboring Country Burning: अस्थिरता की नई तस्वीर

पिछले चार सालों में भारत के कई पड़ोसी देशों में घरेलू कारणों से उभरे आंदोलनों ने न सिर्फ सत्ता परिवर्तन को जन्म दिया बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए. नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार की सड़कों पर उतरी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि इन देशों में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष अपने चरम पर है.

बांग्लादेश, सत्ता संघर्ष और लोकतांत्रिक असुरक्षा

बांग्लादेश में अशांति का माहौल 2022 से ही बनने लगा था, लेकिन मई 2024 में यह गुस्सा चरम पर पहुंच गया. राजधानी ढाका और अन्य शहरों में शेख हसीना सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि अवामी लीग और उसकी छात्र इकाई पर प्रतिबंध लगाया जाए. आरोप था कि पार्टी लंबे समय से सत्ता पर काबिज रहकर विपक्ष को कमजोर कर रही है और छात्र संगठन हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. सरकार के प्रयासों के बावजूद विरोध थमा नहीं और आखिरकार अगस्त 2024 में शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा.

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इमरान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में भड़की आग

पाकिस्तान में मई 2023 में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हालात और बिगाड़ दिए. लाहौर से लेकर इस्लामाबाद और रावलपिंडी तक उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए. सरकारी इमारतों, पुलिस चौकियों और सेना के प्रतिष्ठानों तक पर हमले हुए. कई शहरों में इंटरनेट बंद कर दिया गया और कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई. इस दौरान 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और हजारों गिरफ्तारियां हुईं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहला मौका था जब जनता का गुस्सा सीधे सेना की ओर मुड़ा.

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Sri Lanka Economic Crisis: श्रीलंका में आर्थिक संकट से उपजा आंदोलन

श्रीलंका में साल 2022 में गहरे आर्थिक संकट ने जनता का सब्र तोड़ दिया. राजधानी कोलंबो, कैंडी और अन्य शहरों में महंगाई, बेरोजगारी, बिजली कटौती और ईंधन संकट के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए. यह आंदोलन अरगलाया मूवमेंट के नाम से जाना गया. प्रदर्शन के दौरान गुस्साई भीड़ राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई और तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा. फिलहाल पूर्व पीएम रानिल विक्रमसिंघे सरकारी फंड के दुरुपयोग के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं.

म्यांमार में स्प्रिंग रेवॉल्यूशन अब भी जारी

म्यांमार में फरवरी 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट ने देश को गहरे संकट में डाल दिया. सेना सत्ता पर काबिज है और आंग सान सू की अब भी जेल में हैं. छात्र, नागरिक समूह और भिक्षु लोकतंत्र की बहाली की मांग करते हुए लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. गिरफ्तारियां, गोलीबारी, इंटरनेट ब्लैकआउट और मीडिया पर पाबंदियां अब आम हो चुकी हैं. इस आंदोलन को स्प्रिंग रेवॉल्यूशन कहा गया, जो 2025 तक भी जारी है.

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध, बांग्लादेश में सत्ता संघर्ष, पाकिस्तान में इमरान की गिरफ्तारी के बाद हिंसा, श्रीलंका का आर्थिक संकट और म्यांमार का सैन्य शासन, इन सभी घटनाओं ने साबित कर दिया है कि भारत का पड़ोस राजनीतिक रूप से बेहद अस्थिर दौर से गुजर रहा है. यह अस्थिरता न सिर्फ इन देशों की दिशा तय करेगी बल्कि दक्षिण एशिया की सुरक्षा और भारत की कूटनीति के लिए भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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