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Home World पोक्रोव्स्क क्यों कब्जाना चाहता है रूस? अगर यूक्रेन से छूटा यह एरिया तो क्या पुतिन हो जाएंगे मालामाल?

पोक्रोव्स्क क्यों कब्जाना चाहता है रूस? अगर यूक्रेन से छूटा यह एरिया तो क्या पुतिन हो जाएंगे मालामाल?

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पोक्रोव्स्क क्यों कब्जाना चाहता है रूस? अगर  यूक्रेन से छूटा यह एरिया तो क्या पुतिन हो जाएंगे मालामाल?
युद्ध क्षेत्र में रूस का एक सैनिक. फोटो- सोशल मीडिया (एक्स Tass).

Why does Russia want to capture Pokrovsk? रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई अब धीरे-धीरे चौथा साल पूरा करने के करीब है. 22 फरवरी 2022 से शुरू हुए इस युद्ध में अब रूस विजेता साबित होता दिख रहा है. हालांकि इसे सिद्ध करना मुश्किल है, क्योंकि यूक्रेन रूस के अंदर तक हमले कर रहा है. हालांकि जमीन की लड़ाई में रूस जरूर बाजी मार रहा है. रूस ने नवंबर में पोक्रोव्स्क इलाके में हमला तेज कर दिया. रूसी जनरल वालेरी गेरासिमोव द्वारा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दी गई ब्रीफिंग के अनुसार रूस अब शहर के 75% से अधिक हिस्से पर नियंत्रण का दावा कर रहा है. वहीं यूक्रेनी रक्षक बलों का कहना है कि वे शहर के उत्तरी हिस्सों में रूसी सैनिकों को अतिरिक्त जमीन कब्जा करने से रोक रहे हैं और उनकी यूनिटें रक्षा पंक्ति को मजबूती से थामे हुए हैं. लेकिन इस जगह को लेकर रूस इतनी आक्रामकता क्यों दिखा रहा है?

पोक्रोव्स्क कहाँ है, और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

पोक्रोव्स्क पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र में स्थित है, जो रूसी नियंत्रण वाले डोनेट्स्क शहर से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है. युद्ध से पहले यहाँ करीब 60,000 की आबादी थी और यह क्षेत्र एक अहम सड़क और रेल जंक्शन था, जिससे यूक्रेनी सेना अन्य अग्रिम मोर्चों तक सप्लाई भेजती थी. यह शहर पहले कई महत्वपूर्ण मोर्चों तक सैनिकों और उपकरणों की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग था. 

एक पूर्व लॉजिस्टिक्स हब, पश्चिमी दोनेत्स्क का आखिरी बड़ा यूक्रेनी शहर और क्रामातोर्स्क व स्लोवियान्स्क के निकट स्थित होने के कारण यह दोनों देशों की सैन्य योजनाओं का मुख्य तत्व बन गया है. पोक्रोव्स्क पश्चिमी दोनेत्स्क में यूक्रेन के नियंत्रण वाला आखिरी बड़ा शहर है, जो इसे रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों से यूक्रेन के मध्य भागों की ओर जाने वाला द्वार बनाता है. यही भौगोलिक स्थिति इसे रूस की सैन्य रणनीति का केंद्र बना चुकी है.

पोक्रोव्स्क के लिए यह लड़ाई एक साल से भी अधिक समय से चल रही है. जो अभियान धीरे-धीरे बढ़ते दबाव से शुरू हुआ था, अब इस पूरे संघर्ष की सबसे निर्णायक लड़ाइयों में से एक बन चुका है. संघर्ष के दौरान लगभग सभी नागरिक शहर छोड़ चुके हैं. सभी बच्चों को भी निकाला जा चुका है और केवल कुछ ही निवासी शेष बचे हैं, जो क्षतिग्रस्त अपार्टमेंट ब्लॉक्स और गड्ढों से भरी सड़कों के बीच रह रहे हैं. शहर के पश्चिम में लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित कोकिंग-कोल खदान ने अपने संचालन रोक दिए हैं. कभी क्षेत्र की सबसे बड़ी टेक्निकल यूनिवर्सिटी भी यहीं थी, जो लगातार गोलाबारी के बाद अब पूरी तरह वीरान पड़ी है.

Ukraine Russia Map In Donbas Region
रूस-यूक्रेन मैप.

रूस पोक्रोव्स्क क्यों चाहता है?

रूस का घोषित लक्ष्य पूरे डोनबास पर नियंत्रण स्थापित करना है, जिसमें दोनेत्स्क और लुहान्स्क प्रांत आते हैं. वालेरी गेरासिमोव ने हाल ही में बयान दिया कि रूस इस इलाके के 80% प्रतिशत हिस्से पर काबिज है, जबकि 15 यूक्रेनी बटालियनें कुपियांस्क में पूरी तरह से घिरी हुई हैं. इस क्षेत्र का लगभग 10% हिस्सा लगभग यानी लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर अब भी यूक्रेन के पास है, जो मुख्य रूप से उत्तरी दोनेत्स्क में स्थित है. पोक्रोव्स्क पर कब्जा रूस को क्रामातोर्स्क और स्लोवियान्स्क की ओर बढ़ने का मार्ग देगा. ये दोनेत्स्क में यूक्रेन के नियंत्रण वाले सबसे बड़े शहर हैं. पोक्रोव्स्क और पास के कोस्तिआन्तिनिवका को कब्जे में लेकर रूस उत्तर की ओर दबाव बढ़ा सकता है और डोनबास में अपने अभियान को मजबूत कर सकता है.

पोक्रोव्स्क रूस के लिए राजनीतिक लक्ष्य भी बन चुका है. शहर को घेरने और कब्जे में लेने के लिए रूस ने लगभग 1,50,000 सैनिक तैनात किए हैं, जो यह दिखाने का प्रयास है कि युद्ध रूसी पक्ष में झुक रहा है. यह संदेश घरेलू जनता, कीव, और वाशिंगटन सबके लिए है. खासकर अमेरिका के लिए, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भविष्य की यूक्रेन नीति इसी पर निर्भर हो सकती है कि युद्ध में किसका पलड़ा भारी है. 

अगर पोक्रोव्स्क गिर गया तो क्या होगा?

पोक्रोव्स्क का पतन युद्ध के सैन्य और राजनीतिक परिदृश्य को बदल देगा. रूस को क्रामातोर्स्क और स्लोवियान्स्क तक बढ़ने का सीधा मार्ग मिल जाएगा. पश्चिम की ओर स्थित द्नीप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र अधिक असुरक्षित हो जाएगा. रूस अपनी बढ़त का तेजी से लाभ उठा सकता है. अवदीवका के 2024 में खोने के बाद, रूस पोक्रोव्स्क की ओर लगभग बिना रोक-टोक बढ़ा था. यूक्रेन पहले ही शहर के पीछे नई रक्षा पंक्तियाँ तैयार कर चुका है ताकि आवश्यक होने पर नियंत्रित तरीके से पीछे हट सके. 

शहर का पतन रूस को बड़ा राजनीतिक और प्रतीकात्मक लाभ देगा, ऐसे समय में जब रूसी अर्थव्यवस्था युद्ध खर्च पर निर्भर होते हुए भी धीमी होती दिख रही है और कीमतें बढ़ रही हैं. अगर पोक्रोव्स्क गिरता है, तो यूक्रेन की रक्षा क्षमता पर सवाल और गहरे होंगे. इससे अमेरिका में भी ऐसे आवाजें मजबूत हो सकती हैं जो वार्ता की ओर झुकाव रखती हैं.

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किस जगह पर चल रही रूस यूक्रेन की लड़ाई. फोटो- सोशल मीडिया.

ट्रंप का पीस प्लान चर्चा में

ट्रंप का यूक्रेन पीस प्लान वैसे भी चर्चा में है. उन्होंने अपने 28 सूत्रीय इस योजना के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को 27 नवंबर तक का समय दिया है. इस योजना में उन्होंने रूस के कब्जाए गए क्षेत्रों में उसका क्लेम स्वीकार किया है. यानी डोनबास एरिया पर रूस का कब्जा होगा. क्रीमिया पर रूस का नियंत्रण सभी स्वीकार करेंगे. रूस ने भी इस परिस्थिति का फायदा उठाया और अपनी शर्तें थोप दीं. उन्होंने कहा कि यूक्रेन सैन्य विस्तार नहीं करेगा और नाटो की सदस्यता नहीं लेगा. वहीं जेलेंस्की ने इसे अधर वाली स्थिति बताते हुए कहा कि वह अगर इस योजना को स्वीकार करता है, तो अपना क्षेत्र खो देगा और अस्वीकार करता है, तो एक दोस्त.

रूस के लिए यह स्थिति उन आर्थिक चुनौतियों के बीच भी महत्वपूर्ण है, जहाँ देश धीमी विकास दर, बढ़ती महंगाई और विदेशी कंपनियों की वापसी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे समय में सैन्य जीत सरकार के इस नैरेटिव को बल दे सकती है कि युद्ध अभी भी रूस की शर्तों पर आगे बढ़ रहा है.

रूस ने यह लड़ाई कैसे लड़ी है?

बाखमुत जैसी पिछली लड़ाइयों के विपरीत जहाँ रूस ने सीधे और भारी हमले किए, पोक्रोव्स्क पर अभियान अलग रहा है. रूस ने एक वर्ष से अधिक समय तक पिंसर (कैंची जैसी) रणनीति अपनाई, जिसमें, सीधे हमला करने की जगह शहर को धीरे-धीरे घेरने की कोशिश की. आपूर्ति मार्गों को निशाना बनाया और कई दिशाओं से दबाव बनाया. उसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेनी रसद को बाधित करना और अंदर मौजूद सैनिकों की आपूर्ति रोकना था. इस अभियान में रूस ने, 2–3 सैनिकों की छोटी टीमों द्वारा धुंध का फायदा उठाते हुए घुसपैठ की, लगातार आर्टिलरी, ग्लाइड बम और FPV ड्रोन हमले किए. नागरिक वाहनों और मोटरसाइकिलों से नजदीकी पहुँचे और धुंध भरे मौसम का फायदा उठाकर यूक्रेन की ड्रोन निगरानी कमजोर करने जैसी रणनीतियाँ अपनाईं.

Ukraine Russia Map In Donbas Region 3
रूस को कहां होगा फायदा?

पोक्रोव्स्क में वर्तमान स्थिति क्या है?

पोक्रोव्स्क का मोर्चा अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण है. रूस के विपरीत कीव स्थित 7वीं रैपिड रिस्पॉन्स कॉर्प्स ने कहा है कि यूक्रेनी सैनिक रूसी बलों को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं और ड्रोन यूनिटों के जरिए अपनी स्थितियाँ मजबूत कर रहे हैं. उनके अनुसार रूस रेलवे पार कर कब्ज़ा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यूक्रेनी सैनिक इन प्रयासों को रोक रहे हैं. रूसी सैनिक बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं. 

ओपन-सोर्स मैपिंग के अनुसार रूसी सेना ने 14 और 20 नवंबर को शहर के दो हिस्सों में रेलवे लाइन को पार कर लिया है. गेरासिमोव ने पुतिन को बताया कि रूसी बलों ने पोक्रोव्स्क के आसपास कई बस्तियाँ कब्जे में ले ली हैं और क्षेत्र में यूक्रेनी प्रतिरोध को खत्म कर रहे हैं. रूसी रक्षा मंत्रालय ने फुटेज जारी की है जिसमें रूसी सैनिक दक्षिणी पोक्रोव्स्क की खाली और क्षतिग्रस्त सड़कों से गुजरते दिखते हैं, हालाँकि इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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