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Home World कौन हैं मारिया जखारोवा? विदेशियों के लिए पुतिन सरकार की जुबान; 23 साल में लगातार बढ़ा पद और कद

कौन हैं मारिया जखारोवा? विदेशियों के लिए पुतिन सरकार की जुबान; 23 साल में लगातार बढ़ा पद और कद

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कौन हैं मारिया जखारोवा? विदेशियों के लिए पुतिन सरकार की जुबान; 23 साल में लगातार बढ़ा पद और कद
मारिया व्लादिमीरोवना जखारोवा.

Maria Zakharova Russia: रूस की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जब भी मॉस्को का आधिकारिक पक्ष सामने आता है, तो सबसे प्रमुख चेहरों में मारिया व्लादिमीरोवना जखारोवा का नाम शामिल होता है. अपनी बेबाक टिप्पणियों, तेजतर्रार शैली और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रुख के कारण वह रूस की सबसे चर्चित राजनयिकों में गिनी जाती हैं. 2003 से लेकर आज तक वह पुतिन सरकार का पक्ष रखती आई हैं. साल 2015 से वह रूसी विदेश मंत्रालय के सूचना एवं प्रेस विभाग का नेतृत्व कर रही हैं और इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला भी हैं.

राजनयिक परिवार में हुआ जन्म

मारिया जखारोवा का जन्म 24 दिसंबर 1975 को मॉस्को में हुआ था. उनका परिवार लंबे समय से कूटनीतिक सेवाओं से जुड़ा रहा है. उनके पिता व्लादिमीर जखारोव सोवियत संघ की राजनयिक सेवा में थे. जब उनके पिता की नियुक्ति 1981 में चीन की राजधानी बीजिंग स्थित सोवियत दूतावास में हुई, तब पूरा परिवार वहां चला गया. सोवियत संघ के विघटन के बाद परिवार ने 1991 में चीन छोड़ा और कुछ वर्षों बाद 1993 में रूस लौट आया. उनकी मां इरीना जखारोवा एक कला इतिहासकार हैं और मॉस्को के प्रसिद्ध पुश्किन संग्रहालय में कार्य कर चुकी हैं.

पत्रकारिता और प्राच्य अध्ययन की पढ़ाई

रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार,  मारिया जखारोवा ने मॉस्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस (एमजीआईएमओ) विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की. साल 1998 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता संकाय से प्राच्य अध्ययन और पत्रकारिता विषयों में स्नातक की डिग्री हासिल की. इसके अलावा उनके पास ऐतिहासिक विज्ञान में उच्च शोध उपाधि भी है, जिसे रूस में पीएचडी के समकक्ष माना जाता है. वह रूसी के अलावा अंग्रेजी और चीनी भाषा भी फर्राटेदार बोलती हैं.

विदेश मंत्रालय में शुरू हुआ करियर

पढ़ाई पूरी करने के बाद जखारोवा ने रूसी विदेश मंत्रालय में अपना करियर शुरू किया. शुरुआती दौर में उन्होंने मंत्रालय की मासिक पत्रिका ‘डिप्लोमैटिक बुलेटिन’ की संपादक के रूप में काम किया. धीरे-धीरे उनकी पहचान एक प्रभावशाली कूटनीतिक अधिकारी के रूप में बनने लगी और उन्हें विदेश मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने लगीं.

संयुक्त राष्ट्र में निभाई अहम भूमिका

वर्ष 2005 से 2008 के बीच मारिया जखारोवा न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी मिशन की प्रेस सचिव रहीं. इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कूटनीतिक मामलों में रूस का पक्ष मजबूती से रखा. इसी दौरान 7 नवंबर 2005 को उन्होंने आंद्रेई मकारोव से विवाह किया. दोनों की एक बेटी मारियाना है, जिसका जन्म 2010 में हुआ था.

विदेश मंत्रालय की उप प्रमुख से निदेशक तक का सफर

2011 में उन्हें रूसी विदेश मंत्रालय के सूचना एवं प्रेस विभाग की उप निदेशक बनाया गया. अगले चार वर्षों तक उन्होंने मंत्रालय की मीडिया रणनीति, प्रेस ब्रीफिंग और डिजिटल संचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी जिम्मेदारियों में विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस वार्ताओं का संचालन, सोशल मीडिया खातों की निगरानी और विदेश मंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान सूचना प्रबंधन शामिल था.

फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी

10 अगस्त 2015 को रूसी विदेश मंत्रालय ने उन्हें सूचना एवं प्रेस विभाग का निदेशक नियुक्त किया. इस नियुक्ति के साथ ही वह विभाग के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बन गईं. फिलहाल वह सूचना और प्रेस विभाग की निदेशक होने के साथ-साथ विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता भी हैं. इतना ही नहीं, जखारोवा विदेश मंत्रालय कॉलेजियम और रूसी विदेश और रक्षा नीति परिषद की सदस्य भी हैं.

टीवी बहसों और सोशल मीडिया से मिली अलग पहचान

मारिया जखारोवा केवल एक अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक चेहरा भी बन चुकी हैं. रूसी टेलीविजन के राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी नियमित मौजूदगी और सोशल मीडिया पर सक्रियता ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई. संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी टिप्पणियां अक्सर सुर्खियां बनती हैं. इसी कारण उन्हें रूस की सबसे चर्चित और प्रभावशाली राजनयिकों में गिना जाता है.

बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं में मिली जगह

उनकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान का असर 2016 में भी देखने को मिला, जब बीबीसी ने उन्हें दुनिया की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया. यह सम्मान उन्हें वैश्विक कूटनीति और सार्वजनिक संवाद में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए मिला था.

यूक्रेन युद्ध से पहले लगा यूरोपीय संघ का प्रतिबंध

फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने से ठीक एक दिन पहले यूरोपीय संघ ने मारिया जखारोवा पर प्रतिबंध लगा दिया था. यूरोपीय संघ ने उन पर रूसी सरकारी प्रचार का प्रमुख चेहरा होने और यूक्रेन में रूसी सैन्य तैनाती का समर्थन करने का आरोप लगाया था. इन प्रतिबंधों के तहत उन्हें यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में प्रवेश करने से रोक दिया गया और वहां मौजूद उनकी संभावित संपत्तियों को फ्रीज करने का फैसला लिया गया.

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रूस की कूटनीतिक आवाज के रूप में स्थापित पहचान

करीब दो दशकों से अधिक लंबे सार्वजनिक और कूटनीतिक करियर में मारिया जखारोवा ने खुद को रूस की सबसे प्रभावशाली सरकारी आवाजों में स्थापित किया है. चाहे अंतरराष्ट्रीय संकट हो, पश्चिमी देशों के साथ तनाव हो या रूस की विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसले, जखारोवा आज भी मॉस्को के आधिकारिक रुख को दुनिया के सामने रखने वाले सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. 

पुतिन प्रशासन की विश्वस्त मारिया

व्लादिमीर पुतिन दिसंबर 1999 से रूस में सत्ताधीन हैं. पहले दो कार्यकाल में वे राष्ट्रपति बने, फिर प्रधानमंत्री और फिर लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति हैं. अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल में व्लादिमीर पुतिन ने शासन तंत्र का कड़ा जाल बुना है. इसमें उनके विश्वासपात्र और रूस को आगे ले जाने वाले लोग शामिल हैं. पुतिन केजीबी के पूर्व जासूस रहे हैं. ऐसे में अगर वह किसी पर विश्वास करते हैं, तो उस व्यक्ति की पुतिन के प्रति निष्ठा बहुत ही प्रतिबद्ध होगी. पिछले 23 सालों में अगर मारिया का कद लगातार बढ़ा है, तो इसमें उनकी काबिलियत के साथ साथ पुतिन का भरोसा भी बड़ी वजह है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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