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Home World ‘डॉक्टर बनना था, लेकिन…’ पूर्व सुरक्षाकर्मी ने खोल दिया हाफिज सईद का कच्चा चिट्ठा, कहा- पाकिस्तान में हैं 10 लाख आतंकी

‘डॉक्टर बनना था, लेकिन…’ पूर्व सुरक्षाकर्मी ने खोल दिया हाफिज सईद का कच्चा चिट्ठा, कहा- पाकिस्तान में हैं 10 लाख आतंकी

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‘डॉक्टर बनना था, लेकिन…’ पूर्व सुरक्षाकर्मी ने खोल दिया हाफिज सईद का कच्चा चिट्ठा, कहा- पाकिस्तान में हैं 10 लाख आतंकी
Hafiz Saeed, Lashkar-e-Taiba (LeT) Chief.

Hafiz Saeed: भारत में आतंकवादी हमलों और सबसे ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार रहा है, वो है नाम है हाफिज सईद. उसका आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा 2001 के जम्मू कश्मीर विधान सभा, गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला 2002 और सबसे भयावह 2008 के मुंबई हमलों में पूरी तरह से शामिल रहा था. वह भारत में न केवल लोगों की मौत का कारण बना, बल्कि कितने ही नौजवानों को तरक्की की राह से भटका दिया. ऐसी ही एक कहानी बताई है लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के एक पूर्व कार्यकर्ता ने. उसने हजारों पाकिस्तानियों की मौत के लिए आतंकी समूह के प्रमुख हाफिज सईद को जिम्मेदार ठहराया है. उसने आरोप लगाया है कि वह राज्य के राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए युवाओं को ‘राख के युद्ध’ में भेज रहा है. 

एलईटी को ‘मृत्यु पंथ’ करार देते हुए कभी डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखने वाले नूर दाहरी ने बताया कि सईद से प्रभावित होकर लश्कर में शामिल होने के उसके फैसले ने उसके सुनहरे भविष्य को कैसे पटरी से उतार दिया. एक्स अकाउंट पर साझा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ संगठन (ITCT) चलाने वाले दाहरी ने बताया, “मैं अपनी दिवंगत मां की इच्छा के अनुसार डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन मैं अपनी इस महत्वाकांक्षा को पूरा नहीं कर पाया. विश्वविद्यालय की शिक्षा लेने के बजाय, मैंने एक ऐसे व्यक्ति (हाफिज सईद) से प्रभावित होकर लश्कर में शामिल होने का फैसला किया, जिसने मेरे सुनहरे भविष्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया.”

एक लंबी पोस्ट में दाहरी ने याद किया कि कैसे उन्हें मुरीदके में सईद की सुरक्षा का काम सौंपा गया था, जहां आतंकी सरगना आराम से रहता था और अपने इस्तेमाल के लिए पीछे की तरफ आरामदायक स्लीपिंग एरिया के साथ संशोधित टोयोटा विगो में यात्रा करता था. उन्होंने कहा कि सईद के उग्र उपदेशों से प्रभावित होकर अनगिनत युवकों को लश्कर में भर्ती किया गया और उन्हें अफगानिस्तान और कश्मीर भेजा गया.

उन्होंने कहा, “हर गुरुवार को देश भर से लगभग 500 लोग कुनार प्रांत में स्थित म’अस्कर तैयबा नामक शिविर में प्रशिक्षण लेने के लिए अफगानिस्तान जाते थे.” उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहने के दौरान लश्कर की असली पहचान देखने के बाद उन्होंने इसे छोड़ने का फैसला किया. इस फैसले पर दाहरी ने कहा, “मुझे याद है कि जब लश्कर कमांडरों ने मौत के पंथ से अलग होने के मेरे फैसले के बारे में सुना तो उन्होंने मुझे कायर कहा था.”

दाहरी ने कहा कि लश्कर के पास अब लगभग दस लाख प्रशिक्षित आतंकवादी हैं और यह राज्य के भीतर एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में काम करता है. उन्होंने आगे कहा, “वह राज्य के राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हजारों पाकिस्तानियों को राख के युद्ध में भेजकर उनकी मौत के लिए जिम्मेदार है. मैं अपने जीवन में उसका शर्मनाक अंत देखना चाहता हूं.” उन्होंने कहा कि वह अब सईद की अपेक्षा से बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि ईश्वर ने उन्हें इस्लामवादियों के काले चेहरे को उजागर करने के लिए चुना है.

भारत में आतंक और यह नाम पर्याय बन चुके हैं. युनाइटेड नेशन की तरफ से भी हाफिज सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया है और इसके संगठन को बैन करने की सिफारिश की गई है. लेकिन पाकिस्तान की ओर से ऊपरी कार्रवाई दिखाकर अंदर ही अंदर पूरा सहयोग करता है. भारत में यह चर्चा एकबार फिर से तूल पकड़ चुकी है, क्योंकि पहलगाम में एकबार फिर आतंकियों ने 26 मासूम पर्यटकों की जान ली है. हालांकि इस बार भारत ने इस अन्याय और आतंक का बदला लेने की ठान ली है. भारत ने इस हमले के जवाब में ऑपरेशन पहलगाम को अंजाम देकर पाकिस्तान के 9 आंतकी ठिकानों को नष्ट किया. इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं. 

पाकिस्तान ने भारत के हमले के बाद से 7-8 मई की रात से लगातार आक्रामक ढंग से ड्रोन हमले किए जा रहे हैं. भारतीय सेना ने इस हमले का मुंहतोड़ जवाब भी दिया है. हमले के कारण भारत ने एहतियातन उत्तरी क्षेत्र के 15 एयरपोर्ट 15 मई तक बंद कर दिए हैं.  

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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