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Home World ट्रंप के खिलाफ राष्ट्रपति उम्मीदवार रहे भारतवंशी नेता ने छोड़ा सोशल मीडिया, बढ़ते ‘नस्लीय अपमान’ के बीच लिया फैसला

ट्रंप के खिलाफ राष्ट्रपति उम्मीदवार रहे भारतवंशी नेता ने छोड़ा सोशल मीडिया, बढ़ते ‘नस्लीय अपमान’ के बीच लिया फैसला

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ट्रंप के खिलाफ राष्ट्रपति उम्मीदवार रहे भारतवंशी नेता ने छोड़ा सोशल मीडिया, बढ़ते ‘नस्लीय अपमान’ के बीच लिया फैसला
विवेक रामास्वामी ने सोशल मीडिया से दूरी बनाने का किया फैसला. फोटो- एक्स.

Vivek Ramaswamy to leave Social Media: नए साल के आगमन के साथ ही दुनिया भर में लोग तरह-तरह के संकल्प लेते हैं. इनमें से कुछ संकल्प समय के साथ टूट जाते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें पूरी लगन और प्रतिबद्धता के साथ निभाने की कोशिश करते हैं. इसी संदर्भ में अमेरिका के ओहायो राज्य में गवर्नर पद के दावेदार विवेक रामास्वामी का फैसला चर्चा में है. उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखे अपने लेख में बताया कि नए साल के संकल्प के तहत वे 2026 में सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखेंगे. रामास्वामी के मुताबिक, चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल उनकी टीम करेगी, जबकि वे खुद जमीन पर उतरकर सीधे मतदाताओं से संवाद करेंगे. उनका मानना है कि यह तरीका उन्हें अधिक संतुष्टि और खुशी देगा.

उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखा, “मैं 2026 में सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहने का फैसला कर चुका हूं. नए साल की पूर्व संध्या पर मैंने अपने फोन से एक्स (X) और इंस्टाग्राम डिलीट कर दिए. अपने संदेश को फैलाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने और लगातार ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं को अपने संदेश को बदलने देने के बीच एक बहुत बारीक रेखा होती है. यह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया को आपको इस्तेमाल करने देना है.”

सोशल मीडिया एल्गोरिदम बॉट्स की वजह से असंतुलित

डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ, 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए रिपब्लिकन पार्टी से विवेक रामास्वामी ने दावेदारी ठोकी थी. हालांकि बाद में ट्रंप ने उनके खिलाफ खड़े सभी लोगों को हरा दिया. ट्रंप ने पार्टी के लिए फंड भी सबसे ज्यादा इकट्ठा किया था, इसमें रामास्वामी पिछड़ गए थे. रामास्वामी ने बताया कि शुरुआत में सोशल मीडिया का उद्देश्य नेताओं को मतदाताओं से जोड़ना था, क्योंकि इससे तुरंत प्रतिक्रिया मिलती थी. लेकिन आज के दौर में सोशल मीडिया एल्गोरिदम बॉट्स के भारी इस्तेमाल की वजह से असंतुलित हो गया है. उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति किसी पोस्ट पर क्लिक करता है, उसी तरह के विचारों वाली पोस्ट्स हर जगह दिखने लगती हैं, जिससे नेता आम जनता से कटने लगते हैं.

उन्होंने लिखा, “सोशल मीडिया एक लुभावना विकल्प देता है मुफ्त और भरपूर रियल-टाइम फीडबैक. इससे ऐसा लगता है कि आप सीधे ‘लोगों’ की आवाज सुन रहे हैं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया दे रहे हैं. लेकिन आधुनिक सोशल मीडिया तेजी से वास्तविक मतदाता वर्ग से कटता जा रहा है. सबसे ज्यादा नकारात्मक और उग्र संदेश ही सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं, क्योंकि उन्हें ज्यादा ‘लाइक्स’ और ‘रीपोस्ट’ मिलते हैं और यही सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कमाई का जरिया बनता है.”

मस्क के साथ DOGE में भी किया था काम

रामास्वामी वर्तमान ट्रंप शासन में DOGE में एलन मस्क के साथ अहम पद पर थे. हालांकि, उन्होंने इससे इस्तीफा देकर ओहायो के गवर्नर पद के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. उन्होंने आगे कहा, “अगर आप किसी एक विषय से जुड़ी पोस्ट पर क्लिक करते हैं, तो अचानक वही नजरिया हर जगह दिखने लगता है, जिससे आपकी वास्तविकता की समझ बिगड़ जाती है. यह तब तक नुकसानदेह नहीं है, जब तक आप बुनाई के शौकीन हों और यह मान बैठें कि कितने लोग निट और पर्ल स्टिच का फर्क जानते हैं.”

रामास्वामी ने ऑनलाइन टिप्पणियों को वास्तविक दुनिया की तस्वीर समझने और उससे पैदा होने वाले ध्रुवीकरण के प्रति भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा, “अपने आप में इंटरनेट पर बेतुकी बातें करने वाले लोग और उससे पैसे कमाना, कोई बड़ी समस्या नहीं है. लेकिन जब सत्ता में बैठे लोग ऑनलाइन टिप्पणियों को वास्तविक दुनिया की सहमति समझने लगते हैं, तो वे इस बात की गलत तस्वीर के आधार पर फैसले लेने लगते हैं कि नागरिक वास्तव में क्या चाहते हैं.”

बदनाम श्वेत राष्ट्रवादी निक फुएंटेस के अकाउंट्स में असामान्य गतिविधि

रामास्वामी ने बताया कि सोशल मीडिया पर रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिशें हुईं, यहां तक कि पेंसिल्वेनिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले को साजिश बताने तक की बातें फैलाई गईं. उन्होंने लिखा, “एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया कि अब बदनाम हो चुके श्वेत राष्ट्रवादी निक फुएंटेस के एक्स अकाउंट पर हुई गतिविधियों में ‘असामान्य रूप से तेज, असामान्य रूप से केंद्रित और असामान्य रूप से विदेशी स्रोतों’ के संकेत मिले हैं. एक अन्य जांच में यह भी पाया गया कि सैकड़ों बॉट्स ने डेमोक्रेट समर्थक #BlueCrew हैशटैग को आगे बढ़ाया और राष्ट्रपति ट्रंप पर पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुए हमले को staged बताने वाले झूठे दावों को फैलाया.”

जमीन पर अलग है स्थिति

रामास्वामी ने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि दिसंबर में Turning Point USA के AmericaFest सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. उस भाषण में उन्होंने कहा था कि अमेरिका एक ऐसा राष्ट्र है जिसकी पहचान साझा नस्ल या खून से नहीं, बल्कि मूल्यों से होती है. हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग थी. उन्होंने लिखा कि वहां मौजूद 20,000 से अधिक राजनीतिक रूप से जागरूक लोगों ने उन्हें खड़े होकर तालियां बजाईं.

रामास्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य लोगों को सोशल मीडिया से दूर करना नहीं है, बल्कि नेताओं को यह चेतावनी देना है कि सोशल मीडिया को जनमत समझने का रियल-टाइम जरिया मानना ऐसा है जैसे “टूटे हुए आईने में खुद को देखना.” भारतीय मूल के होने को लेकर सोशल मीडिया पर मिले नस्लीय अपशब्दों पर बात करते हुए रामास्वामी ने कहा कि जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है. 

2025 में नस्लवादी गालियों से भी बदतर की बाढ़ देखी

उन्होंने लिखा, “2025 में मैंने सोशल मीडिया पर नस्लवादी गालियों और उससे भी बदतर चीजों की बाढ़ देखी. लेकिन उसी साल मैंने ओहायो के सभी 88 काउंटियों में शहरों से लेकर खेतों तक, यूनियन हॉल से फैक्ट्रियों तक, रिपब्लिकन रैलियों से लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ आमने-सामने की बातचीत तक दसियों हजार मतदाताओं से मुलाकात की, और पूरे साल मुझे एक भी ओहायो मतदाता से कोई कट्टर या नस्लवादी टिप्पणी सुनने को नहीं मिली.”

अंत में हल्के-फुल्के अंदाज में रामास्वामी ने लिखा कि अगर यह संकल्प भी उनके पिछले संकल्पों जैसा ही रहा, तो वे “मार्च तक फिर से एक्स स्क्रॉल करते नजर आ सकते हैं.” उन्होंने अपने साथी रिपब्लिकनों से भी इस पहल में शामिल होने की अपील की और अनुमान जताया कि यह 2026 में जीत दिलाने वाला एक “अतिरिक्त एक्स-फैक्टर” साबित हो सकता है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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