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Viral Video Fact Check : मौत का ऐसा मंजर कांप जाएगी रूह!

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Viral Video Fact Check : मौत का ऐसा मंजर कांप जाएगी रूह!
अफगानिस्तान भूकंप

Viral Video Fact Check : अफगानिस्तान में सोमवार को 6.0 तीव्रता का भूकंप आया. इस भूकंप में पूर्वी अफगानिस्तान के कुछ गांव तबाह हो गए. अधिकारिक सोर्सेज से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस भूकंप में अबतक 800 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 2500 लोग घायल हैं. अफगानिस्तान में आए भूकंप से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो को डब्ल्यू ए मुबारिज नाम के व्यक्ति ने एक्स पर पोस्ट किया है. मुबारिज का एक्स हैंडल वेरीफाइड है और वे खुद को एक पत्रकार बताते हैं.

सवालों के घेरे में वीडियो की सत्यता

डब्ल्यू ए मुबारिज ने जो वीडियो पोस्ट किया है, उसमें लाशों का रेला दिख रहा है. एक दो नहीं सैकड़ों लाशों को उठाए लोग एक सड़क पर चलते नजर आ रहे हैं. वीडियो को पोस्ट करते हुए एक मैसेज भी लिखा गया है, जिसमें यह दावा किया गया है कि यह यह गाजा नहीं है – यह अफगानिस्तान का कुनार प्रांत है, जहां एक विनाशकारी भूकंप के कारण सिर्फ एक रात में 800 लोगों की जान चली गई और हजारों लोग घायल हो गए है. मैसेज में अल्लाह से मदद की गुहार भी लगाई गई है. सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि इस मैसेज में तीन फोन नंबर को भी शेयर किया गया है, जिसके बारे में यह कहा गया है कि यह नंबर इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता द्वारा साझा किए गए जो लोग भी पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं वे इस नंबर पर सीधे संपर्क करें. यह नंबर सही है और काम कर रहा है. शेयर किए गए नंबर हैं- 0785116622
0711555552
0700281161

कमेंट में बताया गया एआई वीडियो

यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कई लोग इस मैसेज और वीडियो से अचंभित होकर मदद के लिए सामने आ रहे हैं. वहीं कई ऐसे लोग हैं, जो इस वीडियो को एआई द्वारा बनाया गया बताकर इसपर विश्वास करने से मना कर रहे हैं. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि तालिबान के कठपुतले सिर्फ सहानुभूति पाने के लिए इस AI जनरेटेड वीडियो को शेयर कर रहे हैं ताकि उन्हें सहायता प्राप्त हो. कुछ लोग AI Grok से पूछ रहे हैं कि बताएं यह वीडियो सच है या एआई से बनाया हुआ वीडियो है.

एआई से बनाया गया वीडियो

वायरल वीडियो को ध्यान से देखने पर यह सीधा पता चल जाता है कि यह वीडियो असली नहीं है, क्योंकि किसी भी न्यूज एजेंसी या फोटो एजेंसी ने इस तरह की कोई तस्वीर या वीडियो जारी नहीं की है. अगर इतनी बड़ी संख्या में लाशों को एक-जगह से दूसरी जगह लेकर लोग जाते, तो वह बड़ी खबर होती. इस तरह की तस्वीर और वीडियो का जारी ना होना इस वायरल वीडियो के झूठे होने का प्रमाण है. डब्ल्यू ए मुबारिज ने वीडियो को शेयर करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह वीडियो पीड़ित प्रांत के किस हिस्से का है. अगर यह सच होता तो और लोग भी इसकी तस्वीर साझा करते जो नहीं हुआ है. मैसेज पर नंबर शेयर कर सहायता मांगना भी एक वीडियो की सत्यता पर सवाल खड़े करता है, इसलिए अगर आप भी इस मैसेज को पढ़कर अगर भावुक हैं, तो सहायता देने के लिए अधिकारिक सोर्सेज की मदद लें. वायरल मैसेज या वीडियो के झांसे में ना आएं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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