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Home World वेनेजुएला: मादुरो के बेटे के सामने सेल्सी रोड्रिगेज बनीं राष्ट्रपति, चीनी राजदूत ने लगाया गले, रूस-ईरान भी मौजूद, अब क्या करेंगे ट्रंप?

वेनेजुएला: मादुरो के बेटे के सामने सेल्सी रोड्रिगेज बनीं राष्ट्रपति, चीनी राजदूत ने लगाया गले, रूस-ईरान भी मौजूद, अब क्या करेंगे ट्रंप?

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वेनेजुएला: मादुरो के बेटे के सामने सेल्सी रोड्रिगेज बनीं राष्ट्रपति, चीनी राजदूत ने लगाया गले, रूस-ईरान भी मौजूद, अब क्या करेंगे ट्रंप?
डेल्सी रोड्रिगेज बनीं वेनेजुएला की राष्ट्रपति. फोटो- एक्स.

Venezuela President Delcy Rodriguez: अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के कुछ ही घंटों बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने आधिकारिक तौर पर वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाल लिया. सोमवार को दोपहर उन्हें उनके भाई और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने पद की शपथ दिलाई. उनके शपथ ग्रहण के दौरान पवित्र पुस्तक को निकोलस मादुरो के बेटे ने पकड़ा हुआ था. रोड्रिगेज ने कहा कि उन्होंने यह जिम्मेदारी भारी मन से स्वीकार की है. उन्होंने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और प्रथम महिला सिलिया फ्लोरेस को अमेरिका द्वारा गिरफ्तार किया जाना अपहरण करार दिया. इस दौरान चीन, रूस और ईरान के राजदूत डेल्सी रोड्रिगेज के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद उन्हें बधाई देने वाले पहले विदेशी राजनयिकों में शामिल थे. ये तीनों देश वेनेजुएला के करीबी सहयोगी माने जाते हैं.

डेल्सी अपने शपथ ग्रहण के दौरान काफी भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा, “मैं बोलिवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला के संवैधानिक राष्ट्रपति निकोलस मादुरो मोरोस की कार्यकारी उपराष्ट्रपति के रूप में यहां पद की शपथ लेने आई हूं.” इस दौरान उन्होंने ह्यूगो शावेज की शपथ ली और कहा कि मदरलैंड के खिलाफ अमेरिका की नाजायज कार्रवाई से देश में पीड़ा और गुस्सा है और वे बड़े दुख के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर रही हैं.

सीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, शपथ ग्रहण के तुरंत बाद चीन के वेनेजुएला में राजदूत लान हू ने रोड्रिगेज को गले लगाया. इसके बाद रूसी राजदूत सर्गेई मेलिक-बागदासारोव ने भी उन्हें बधाई दी. ईरान के राजदूत अली चेगिनी ने हाथ जोड़कर सम्मान के प्रतीक के रूप में उनके सामने झुककर अभिवादन किया. शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ये तीनों राजनयिक एक साथ खड़े नजर आए. चीन, रूस और ईरान,  इन तीनों देशों ने 3 जनवरी को गई उस अमेरिकी सैन्य अभियान की निंदा की है, जिसके तहत वेनेज़ुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़कर मुकदमे के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया.

इसी दौरान, वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के समर्थक सोमवार को काराकास की सड़कों पर उतर आए, जब डेल्सी रोड्रिगेज को औपचारिक रूप से देश की अंतरिम नेता के रूप में शपथ दिलाई गई. सैकड़ों प्रदर्शनकारी वेनेजुएला के झंडे लेकर सड़कों पर दिखे और अपदस्थ नेता के समर्थन में तख्तियां उठाए हुए थे. मादुरो ने इससे पहले शनिवार को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के तहत पकड़े जाने के बाद न्यूयॉर्क की अदालत में खुद को निर्दोष बताया था.

मादुरो के बेटे ने प्रदर्शन की दी है चेतावनी

वेनेजुएला सरकार अपने फैसलों के समर्थन को दिखाने के लिए अक्सर सड़क प्रदर्शनों का आयोजन करती रही है. अगस्त में, जब अमेरिका ने मादुरो पर इनाम बढ़ाकर 5 करोड़ डॉलर कर दिया था, तब काराकास में सैकड़ों समर्थक इकट्ठा हुए थे. उस रैली में चाविस्मो आंदोलन (वेनेजुएला का समाजवादी राजनीतिक धड़ा) के वरिष्ठ नेताओं के साथ डेल्सी रोड्रिगेज भी मौजूद थीं. हालांकि इस बार मामला अलग है. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह एकजुट है और देश अब भी स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहा है. इस प्रदर्शन में मादुरो के बेटे गुएरा भी शामिल हुए. वे पहले ही कह चुके हैं कि इतिहास याद रखेगा कि कौन गद्दार है. उन्होंने कहा कि हम सड़क पर उतरेंगे.

रात में राष्ट्रपति भवन के पास हुई गोलीबारी

हालांकि इस शपथ ग्रहण के बाद, सोमवार की रात कराकास में राष्ट्रपति भवन के पास काफी गोलीबारी सुनी गई. कुछ स्थानीय लोगों के मुताबिक ड्रोन भी देखे गए हैं. रूसी मीडिया के अनुसार बोलेवेरियन आर्मी ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है. प्रशासन का कहना है कि स्थिति उसके नियंत्रण में है. 

अब क्या करेंगे ट्रंप?

वहीं वेनेजुएला में अमेरिका के पूर्व राजदूत चार्ल्स शैपिरो ने कहा कि इस सोच का एक संकेत यह है कि वाशिंगटन ने वेनेज़ुएला के आंतरिक मंत्री डियोसदादो कैबेलो को उनके पद पर बनाए रखने का फैसला किया है, जो अब भी देश की पुलिस व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं. शैपिरो ने यह भी बताया कि कैबेलो का नाम उसी अमेरिकी अभियोग में शामिल है, जिसमें अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का नाम है. उन्होंने यह भी कहा कि दिन में पहले वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेना इस बात का संकेत है कि वह लंबे समय से मादुरो की करीबी सहयोगी रही हैं.

शैपिरो ने कहा कि इससे साफ है कि अमेरिका लोकतंत्र के बजाय स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि वही लोग बने हुए हैं, वही तेल क्षेत्र से जुड़े लोग बने हुए हैं, वही पुलिस और वही सेना भी बनी हुई है. पूर्व अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के विपक्षी नेता एडमुनदो गोंजालेज उरुतिया को फिर से सत्ता में लाने में “कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई,” जबकि विपक्ष का दावा है कि उन्होंने 2024 का राष्ट्रपति चुनाव जीता था.

शैपिरो के मुताबिक, ट्रंप ने विपक्ष की नेता मारिया कोरीना माचाडो को लेकर भी बहुत कम भरोसा जताया और उनके अंतरिम नेता बनने की संभावना को खारिज कर दिया. इसके बजाय, शैपिरो ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को देश के पुनर्निर्माण के लिए संभावित वित्तीय स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने पर ध्यान केंद्रित करता दिख रहा है. हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि “यह एक जटिल प्रक्रिया है कि इसे आखिर कैसे किया जाएगा.”

ANI के इनपुट के साथ.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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