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Home World वेनेजुएला में भूकंप की तबाही: अबतक 235 की मौत, 4300 से ज्यादा घायल; हजारों लापता

वेनेजुएला में भूकंप की तबाही: अबतक 235 की मौत, 4300 से ज्यादा घायल; हजारों लापता

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वेनेजुएला में भूकंप की तबाही: अबतक 235 की मौत, 4300 से ज्यादा घायल; हजारों लापता
मलबे से लोगों को बचाने में लगे राहतकर्मी. फोटो- PTI.

Venezuela Earthquake Death Toll: वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है. शक्तिशाली झटकों के बाद अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कम से कम 4,300 लोग घायल बताए जा रहे हैं. प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन हजारों लोगों के लापता होने की खबर के कारण मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है. वेनेजुएला के स्वास्थ्य मंत्री कार्लोस अल्वाराडो ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा, ‘दुर्भाग्यवश हमारे स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 235 ऐसे लोग लाए गए, जो या तो पहले ही दम तोड़ चुके थे या अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी मौत हो गई.’

बुधवार शाम वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों को पिछले एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जा रहा है. भूकंप के तेज झटके पूरे क्षेत्र में महसूस किए गए. कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए. एहतियात के तौर पर वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि ब्राजील के अमेजन क्षेत्र तक कई इमारतों को खाली कराया गया.

सड़कों पर उतरे लोग, मलबे में तलाश रहे अपनों को

भूकंप के बाद उत्तरी वेनेजुएला के कई शहरों में लोग सड़कों पर निकल आए. कई परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में मलबे के बीच जुटे रहे. घायलों को धूल और खून से लथपथ हालत में मलबे से बाहर निकाला गया. इनमें बच्चे और जानवर भी शामिल थे.

वेनेजुएला के सरकारी टेलीविजन ने बचाव अभियानों के कई भावुक कर देने वाले दृश्य दिखाए. एक वीडियो में एक महिला भारी सीमेंट के स्लैब के नीचे फंसी नजर आई. मलबे से उसका सिर्फ एक पैर दिखाई दे रहा था. काफी मशक्कत के बाद बचाव दल ने उसे जिंदा बाहर निकाल लिया. एक पूरा परिवार मलबे में दबा हुआ था, जिसे समय रहते बचा लिया गया.

लोगों ने उठाए राहत व्यवस्था पर सवाल

राजधानी काराकस के बाहर सरकारी खोज और बचाव दलों की मौजूदगी कम दिखाई देने को लेकर लोगों में नाराजगी भी नजर आई. तीन बच्चों की मां दयाना डेलगाडो ने सवाल उठाया कि सरकार की भारी मशीनें आखिर कहां हैं. उन्होंने कहा कि मलबा हटाने का काम स्थानीय लोग और पड़ोसी खुद कर रहे हैं.

अपने आठ वर्षीय लापता बेटे को लेकर उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ यह जानना चाहती हूं कि मेरा बच्चा कहां है. क्या वह मलबे में फंसा है या किसी राहत शिविर में है?’

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सड़कों पर टेंट लगाकर रहने को मजबूर लोग. फोटो- pti.

परिवारों का दर्द, अपनों की तलाश में टूटे लोग

इस त्रासदी के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने लोगों को झकझोर दिया. एक महिला अपने तीन और दस साल के बच्चों के शवों को कंबल में लपेटकर ले जाते हुए फूट-फूटकर रो पड़ी. कुछ देर बाद वह सदमे में जमीन पर गिर गई. वहीं कई लोग अपने लापता परिजनों के नाम पुकारते हुए मदद की गुहार लगाते रहे, जबकि कुछ लोग सदमे में बिना कुछ बोले खड़े रहे.

ला ग्वायरा बना सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र

राजधानी काराकस के उत्तर में स्थित तटीय इलाका ला ग्वायरा भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा. यहां भारी तबाही और सबसे ज्यादा जनहानि की खबर है. देश का प्रमुख हवाई अड्डा भी इसी क्षेत्र में स्थित है, जिसे नुकसान पहुंचने के कारण बंद करना पड़ा. इससे राहत और बचाव अभियान को और मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

मलबे में फंसी महिला को बचाने की कोशिश

ला ग्वायरा में सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक जुआन अल्बर्टो मेंदान्यो तबाही के बीच मलबे से गुजर रहे थे. उन्होंने रास्ते में एक शव देखा. आगे बढ़ने पर उनकी नजर एक ऐसी महिला पर पड़ी जो मलबे में फंसी हुई थी और हाथ हिलाकर मदद मांग रही थी. मेंदान्यो ने कहा, ‘ईश्वर करे, उसे जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाए. जब हमने उसकी चीख सुनी, तब हमारे पास उसकी मदद करने का कोई साधन नहीं था.’

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भूकंप के बाद एक घर से निहारता व्यक्ति. फोटो- pti.

कई देशों ने भेजी मदद की पेशकश

इस भीषण आपदा के बाद दुनिया के कई देशों ने वेनेजुएला को राहत सामग्री और मानवीय सहायता भेजने की पेशकश की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा पर शोक जताते हुए मृतकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं. भारत अंतर्राष्ट्रीय आपदा में मानवीय सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की एक विशेष टीम को वेनेजुएला भेजने की तैयारी शुरू हो गई है.  भूकंप के बाद अब प्राथमिकता बड़े पैमाने पर राहत, बचाव और लापता लोगों को खोजने की है.

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अमेरिका ने प्रतिबंधों में दी ढील

वेनेजुएला को सहायता देने वाले देशों में अमेरिका भी शामिल है. अमेरिका ने इसी साल की शुरुआत में एक अप्रत्याशित सैन्य अभियान के दौरान वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था. हालांकि, इस आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों को आसान बनाने के लिए अमेरिका ने भी कदम उठाया है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में 23 अक्टूबर तक अस्थायी छूट देने का फैसला किया, ताकि वेनेजुएला में भूकंप राहत से जुड़े ऐसे वित्तीय लेन-देन किए जा सकें, जो सामान्य परिस्थितियों में प्रतिबंधों के कारण प्रतिबंधित होते. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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