[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World ‘ट्रंप की शक्तियों’ पर US सीनेट का प्रहार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, क्या फर्क पड़ेगा?

‘ट्रंप की शक्तियों’ पर US सीनेट का प्रहार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, क्या फर्क पड़ेगा?

0
‘ट्रंप की शक्तियों’ पर US सीनेट का प्रहार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, क्या फर्क पड़ेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स (@WhiteHouse).

US Senate Iran War Resolution: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य नीति को लेकर बड़ा टकराव सामने आया है. अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत भी कर रहा है.

सीनेट में 50-48 वोट से पास हुआ प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार एक प्रस्ताव पर मतदान किया, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी सैन्य भागीदारी को सीमित करने की मांग की गई. प्रस्ताव के पक्ष में 50 वोट पड़े, जबकि 48 सांसदों ने इसका विरोध किया.

इस मतदान में ट्रंप की पार्टी के चार रिपब्लिकन सांसदों- रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया. वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैककॉनेल और डेव मैककॉर्मिक मतदान में मौजूद नहीं थे. दोनों पहले इस तरह के युद्ध शक्तियों से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का विरोध कर चुके थे.

पहले प्रतिनिधि सभा में भी मिली थी मंजूरी

यह प्रस्ताव इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी पारित हो चुका था. वहां इसे 215-208 वोट से मंजूरी मिली थी. प्रतिनिधि सभा में चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसका समर्थन किया था.

इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस कदम की आलोचना की थी. उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को ‘ग्रैंडस्टैंडर्स’ बताया था और उनके कदम को ‘देशभक्ति के खिलाफ’ करार दिया था.

प्रस्ताव का मतलब क्या है?

यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान में कांग्रेस और राष्ट्रपति के बीच युद्ध शक्तियों के संतुलन से जुड़ा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के किसी बड़े सैन्य संघर्ष को आगे न बढ़ा सकें.

हालांकि यह एक ‘कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन’ है, इसलिए इसे राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं है और यह कानून की तरह बाध्यकारी भी नहीं है.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन से बातचीत में कहा, ‘कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन राष्ट्रपति के पास नहीं जाते और इनका कोई कानूनी प्रभाव नहीं होता.’

अधिकारी ने इसे मुख्य रूप से प्रतीकात्मक कदम बताया और कहा कि कुछ रिपब्लिकन सांसदों की अनुपस्थिति की वजह से यह प्रस्ताव पास हो पाया.

व्हाइट हाउस ने खारिज किया प्रभाव

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस प्रस्ताव का सैन्य नीति पर कोई वास्तविक असर नहीं पड़ेगा. व्हाइट हाउस ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ किसी संघर्ष से हटाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके अनुसार ‘7 अप्रैल को युद्धविराम के साथ ही शत्रुता समाप्त हो चुकी है.’

हालांकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले एक डेमोक्रेटिक सहयोगी ने इस दावे से असहमति जताई. उनका कहना है कि प्रस्ताव का प्रभाव होगा और अगर इसे लेकर विवाद पैदा होता है तो मामला कानूनी लड़ाई तक जा सकता है.

ये भी पढ़ें:- इतिहास बदल कर दुनिया को गुमराह करने में जुटा पाकिस्तान, अब ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ के सहारे पानी पर ठोक रहा दावा

ये भी पढ़ें:- 60 दिन की राहत, लेकिन सख्त चेतावनी भी; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को किया आगाह

कांग्रेस में बढ़ रही चिंता

सीनेट में यह मतदान दिखाता है कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी संसद में चिंता बढ़ रही है. कई सांसदों को डर है कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के राष्ट्रपति के पास सैन्य कार्रवाई का अधिकार बहुत अधिक बढ़ सकता है और इससे मध्य पूर्व में तनाव और गहरा सकता है.

सीएनएन के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक सीनेट ईरान से जुड़े युद्ध शक्तियों के प्रस्तावों पर 10 बार मतदान कर चुकी है. पिछले महीने भी ऐसा ही एक प्रस्ताव आगे बढ़ा था, लेकिन उस पर अंतिम मतदान नहीं हुआ.

ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच बातचीत जारी

सीनेट के फैसले के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति के डिजिटल सिग्नेचर के बाद, स्विट्जरलैंड में जेडी वेंस और ईरानी अधिकारियों ने पीस डील को लागू करवाने के लिए चर्चा की. हालांकि इन वार्ताओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

Previous article siwan news: 24 जून को सीवान सदर अस्पताल में चिकित्सकों की ड्यूटी
Next article Kaimur News : भभुआ सदर अस्पताल में आज चर्म रोग से लेकर स्त्री रोग विशेषज्ञों की रहेगी ड्यूटी
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel