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Home World ऐसे ही अमेरिका का पक्का प्यादा नहीं बने आसिम मुनीर, सालों किया गया खेल, अब हुआ खुलासा

ऐसे ही अमेरिका का पक्का प्यादा नहीं बने आसिम मुनीर, सालों किया गया खेल, अब हुआ खुलासा

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ऐसे ही अमेरिका का पक्का प्यादा नहीं बने आसिम मुनीर, सालों किया गया खेल, अब हुआ खुलासा
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ (बाएं), अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बीच में), पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर (दाएं)

US Regime Change Pakistan: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का पतन और आर्मी चीफ आसिम मुनीर का उभार केवल सेना बनाम नागरिक सरकार की कहानी नहीं है. यह ग्लोबल पावर अमेरिका की ताकत और पाकिस्तान की लोकेशन का स्ट्रेटजिक अहमियत का बड़ा उदाहरण है. पाकिस्तान की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जो घटनाएं हुईं, उन्हें अब एक बड़े जियो स्ट्रेटजिक गेम के तौर पर देखा जा रहा है. खान का सत्ता से बाहर होना, जेल जाना और दूसरी ओर मुनीर का पाकिस्तान के सबसे ताकतवर चेहरे के रूप में उभरना, ये सब एक-दूसरे से जुड़े माने जा रहे हैं.

अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म Drop Site News की रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान में यह पूरा घटनाक्रम किसी बड़े रणनीतिक खेल जैसा था, जिसमें वॉशिंगटन दूर से हालात को प्रभावित कर रहा था. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन की तैयारी काफी पहले शुरू हो चुकी थी. जब इमरान खान को इसका अंदाजा भी नहीं था, तब तक घटनाओं की दिशा तय की जा चुकी थी. इमरान खान का सत्ता में आना, अमेरिका विरोधी रुख अपनाना, “एब्सोल्यूटली नॉट” नीति, रूस यात्रा, सेना से टकराव, सत्ता से हटना और फिर आसिम मुनीर का तेजी से उभरना. ये सभी घटनाओं को एक ही सीरीज का हिस्सा थे.

क्या था पाकिस्तान का ‘साइफर केस’?

पूरा विवाद एक गोपनीय राजनयिक संदेश यानी “साइफर” से शुरू हुआ. मार्च 2022 में पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिका स्थित राजदूत असद मजीद खान ने इस संदेश को इस्लामाबाद भेजा था. रिपोर्ट के अनुसार, इसमें अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू का कथित बयान शामिल था कि अगर इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है, तो “वॉशिंगटन सब कुछ माफ कर देगा”.

इमरान खान ने इसे विदेशी साजिश का सबूत बताया. यही वह “चिट्ठी” थी, जिसका जिक्र उन्होंने कई रैलियों में किया था. उन्होंने इसे लंदन प्लान बताया था, जिसमें नवाज शरीफ, आसिफ जरदारी और आसिम मुनीर के भी शामिल होने का आरोप लगाया था. 

अमेरिका और इमरान खान के रिश्ते क्यों बिगड़े?

प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान की विदेश नीति धीरे-धीरे अमेरिका से दूरी बनाने की ओर बढ़ने लगी. उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिका को सैन्य ठिकाने देने से इनकार कर दिया था. अमेरिकी मीडिया एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा था, “बिल्कुल नहीं”.

सबसे बड़ा विवाद रूस यात्रा को लेकर हुआ. 24 फरवरी 2022 को, जिस दिन रूस ने यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू किया, उसी दिन इमरान खान ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी. इस मुलाकात की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा में रहीं और रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे वॉशिंगटन नाराज हो गया.

सेना और इमरान खान के बीच बढ़ी दूरी

पाकिस्तानी सेना को लगने लगा था कि इमरान खान की नीति पाकिस्तान को अमेरिका से दूर कर सकती है और इससे रणनीतिक नुकसान हो सकता है. यहीं से सेना और इमरान के बीच टकराव तेज हो गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि आसिम मुनीर का उभार भी इसी दौर में शुरू हुआ.

आसिम मुनीर कैसे बने सबसे ताकतवर चेहरा?

रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में इमरान खान के ईरान दौरे के दौरान आसिम मुनीर ने ईरानी अधिकारियों के साथ बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल किया था. मुनीर उस समय ISI प्रमुख थे. यह पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक रणनीति से अलग था. 

रिपोर्ट में इसे इस बात का संकेत माना गया कि मुनीर पहले से अमेरिकी रणनीतिक सोच के करीब थे, क्योंकि उस समय अमेरिका पाकिस्तान-ईरान रिश्तों को मजबूत होते नहीं देखना चाहता था. कुछ समय बाद इमरान खान ने खुद आसिम मुनीर को ISI प्रमुख पद से हटा दिया. उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहा.

CIA प्रमुख से मिलने से भी किया था इनकार

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इमरान खान ने 2021 में सीआईए प्रमुख विलियम जे बर्न्स से मिलने से इनकार कर दिया था. इमरान सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात करना चाहते थे. हालांकि बाइडेन ने भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बातचीत के अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया.

अविश्वास प्रस्ताव और सत्ता से बाहर होना

अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिर गई. तकनीकी रूप से यह संवैधानिक प्रक्रिया थी, लेकिन उनके समर्थकों ने इसे सेना और अमेरिका के बीच समझौते का परिणाम बताया. इमरान खान ने इसे ही “लंदन साजिश” कहा था. सरकार गिरने के बाद पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पर कार्रवाई शुरू हुई. इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को जेल भेज दिया गया. पार्टी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी.

यूक्रेन युद्ध के बाद बदला पाकिस्तान का रुख

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इमरान खान के हटने के बाद पाकिस्तान धीरे-धीरे अमेरिका के करीब आने लगा और रूस से दूरी बढ़ी. पाकिस्तान ने अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन को गोला-बारूद और हथियार उपलब्ध कराए. इसी दौरान पाकिस्तान को IMF से आर्थिक राहत पैकेज भी मिला, जब देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद और मजबूत हुए मुनीर

आसिम मुनीर को नवंबर 2022 में पाकिस्तान का सेना प्रमुख बनाया गया. बाद में उनका कार्यकाल बढ़ाकर 2027 तक कर दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक मई 2025 में भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पाकिस्तान में मुनीर की ताकत और बढ़ गई.

इसके बाद उन्हें फील्ड मार्शल बनाया गया और नवंबर 2025 में नए बनाए गए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) पद पर नियुक्त किया गया. इससे पाकिस्तान की सेना, नौसेना, वायुसेना और रणनीतिक परमाणु ढांचे पर उनका प्रभाव और मजबूत हो गया.

पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की शर्तों और बातचीत का आधार बना है. बीते कुछ समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप मुनीर को अपना फेवरेट फील्ड मार्शल भी कह चुके हैं. अतीत में पाकिस्तान खुद को भारत के समकक्ष दिखाने के लिए वाशिंगटन, बीजिंग, रियाद और रावलपिंडी की उच्च-स्तरीय बैठकों में निर्भरता और सौदेबाजी के बीच लगातार झूलता रहा है.

इतिहास को दोहराते हुए आज भी वह ऐसा ही कर रहा है. इस बार इसका लीड किरदार आसिम मुनीर है. पाकिस्तानी आर्मी अब सऊदी अरब के साथ सैन्य गठबंधन भी कर रहा है, चीफ आसिम मुनीर दुनिया भर के संघर्ष वाले क्षेत्रों- लीबिया और अन्य जगहों की यात्रा भी कर रहे हैं. लेकिन इस सबके पीछे अमेरिका का वरद हस्त ही लगता है.

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आज भी जेल में हैं इमरान खान

2026 तक आते-आते इमरान खान अब भी रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं. हालांकि उनके समर्थकों की संख्या अब भी काफी है और पाकिस्तान में बड़ी आबादी मानती है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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