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Home World ईरान की घेराबंदी तोड़ने मिडिल ईस्ट पहुंचे 3500 अमेरिकी मरीन; शहरी जंग में माहिर है ’24th MEU’ फोर्स

ईरान की घेराबंदी तोड़ने मिडिल ईस्ट पहुंचे 3500 अमेरिकी मरीन; शहरी जंग में माहिर है ’24th MEU’ फोर्स

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ईरान की घेराबंदी तोड़ने मिडिल ईस्ट पहुंचे 3500 अमेरिकी मरीन; शहरी जंग में माहिर है ’24th MEU’ फोर्स
अमेरिकी सैनिक की तस्वीर. इमेज सोर्स क्रेडिट- @CENTCOM

US Marines: 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव चरम पर है. ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मिसाइलों, ड्रोन्स और समुद्री बारूद (माइन्स) का जाल बिछाकर घेराबंदी कर दी है. ईरान का कहना है कि वह भारत और चीन जैसे अपने ‘दोस्त’ देशों के जहाजों को रास्ता देगा, लेकिन अमेरिका, इजरायल और उनका साथ देने वाले देशों के लिए यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा.

क्यों अहम है यह समुद्री रास्ता?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल शिपिंग रूट है. यहां से हर दिन करीब 2 करोड़ (20 मिलियन) बैरल तेल गुजरता है. ईरान की इस ब्लॉकबंदी की वजह से ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल मची है. इसे देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए जंग जैसा रुख अपना लिया है.

मैदान में अमेरिका की सबसे घातक यूनिट

ईरान की चुनौती का जवाब देने के लिए अमेरिका ने 3,500 मरीन और नौसैनिकों की तैनाती की है. इस मिशन की कमान एलीट ’24th मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट’ (MEU) के हाथों में है. यह फोर्स समंदर में हाईजैक हुए जहाजों को छुड़ाने और किसी भी सीधी सैन्य टक्कर के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है. ‘स्पेशल ऑपरेशंस’ में माहिर यह यूनिट अब फारस की खाड़ी और लाल सागर में मोर्चा संभाल चुकी है.

क्या है 24th MEU और यह इतनी खास क्यों है?

24th MEU कोई सामान्य पैदल सेना नहीं है, बल्कि यह एक ‘मरीन एयर-ग्राउंड टास्क फोर्स’ है. यह अपने आप में एक छोटी सेना की तरह काम करती है. यह मुख्य रूप से ‘यूएसएस वास्प’ (USS Wasp) नाम के युद्धपोत पर तैनात रहती है. इसमें कमांड कोर, ग्राउंड कॉम्बैट टीम, विमान विंग और रसद विभाग शामिल हैं. इसके पास एमवी-22बी ऑस्प्रे (MV-22B Osprey) और हैरियर जेट्स जैसे आधुनिक विमान हैं. फरवरी 2026 में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद यह यूनिट अब किसी भी आपातकालीन मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है.

हाईजैक जहाजों को कैसे छुड़ाते हैं ये मरीन?

ईरान समर्थित ताकतों द्वारा कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद, इस यूनिट की ‘विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर’ (VBSS) स्किल सबसे ज्यादा काम आने वाली है. इसकी एक खास टीम ‘मरीन रेड फोर्स’ रात के अंधेरे में चलते हुए जहाजों पर उतरने में माहिर है. ये मरीन ऑस्प्रे विमानों से रस्सियों के सहारे या तेज नावों के जरिए दुश्मन के जहाज पर धावा बोलते हैं. इनकी ट्रेनिंग तंग कमरों में घुसकर दुश्मनों को खत्म करने और मिनटों में जहाज के कंट्रोल रूम को कब्जे में लेने की होती है.

शहरों की लड़ाई में भी माहिर है यह यूनिट

24th MEU सिर्फ समंदर ही नहीं, बल्कि तटीय शहरों की गलियों में लड़ने की भी ट्रेनिंग ले चुकी है. साल 2026 की शुरुआत में इन्होंने ‘कैम्प लेजेयून’ में शहरी युद्ध का कड़ा अभ्यास किया था. इनका काम बंदरगाहों और दूतावासों की सुरक्षा करना है. अगर समंदर की जंग जमीन तक पहुंचती है, तो ये मरीन भीड़भाड़ वाले शहरों में भी मोर्चा संभालने में सक्षम हैं.

यूएसएस त्रिपोली भी है तैनात

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 27 मार्च को ‘यूएसएस त्रिपोली’ नाम का बड़ा युद्धपोत इस इलाके में पहुंच चुका है. यह जहाज एक चलते-फिरते एयरबेस जैसा है, जिस पर दर्जनों हेलीकॉप्टर और एफ-35बी (F-35B) लड़ाकू विमान तैनात हैं. यह जहाज अब जापान से शिफ्ट होकर सीधे युद्ध क्षेत्र में आ गया है. इसके साथ ही, यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश स्ट्राइक ग्रुप भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है.

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिकी सेना ईरान के ठिकानों पर हमले कर रही है. CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक 11,000 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भरी गई हैं और ईरान के लगभग 150 जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है.

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दुनिया की सबसे बड़ी वॉरशिप अभी मरम्मत पर

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ फिलहाल ईरान के मोर्चे से बाहर है. 29 मार्च को यह क्रोएशिया के स्प्लिट पोर्ट पर खड़ा मिला. रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज की लॉन्ड्री में आग लगने और प्लंबिंग की समस्याओं के कारण यह अगले एक साल तक सेवा से बाहर रह सकता है. इसकी जगह अब अन्य अमेरिकी युद्धपोत मोर्चा संभाल रहे हैं ताकि वैश्विक तेल व्यापार में हो रही 20% की रुकावट को कम किया जा सके.

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