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Home World ईरान युद्ध: ‘यूरोप के प्लेग्राउंड’ का बड़ा फैसला, US मिलिट्री विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस 

ईरान युद्ध: ‘यूरोप के प्लेग्राउंड’ का बड़ा फैसला, US मिलिट्री विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस 

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ईरान युद्ध: ‘यूरोप के प्लेग्राउंड’ का बड़ा फैसला, US मिलिट्री विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस 
अमेरिकी एयरफोर्स का विमान. फोटो- एक्स (@MarioNawfal)

US Iran War: ईरान के ऊपर 28 फरवरी से अमेरिका लगातार हमले कर रहा है. उसके सैन्य ठिकाने हों या ऑयल टर्मिनल या फिर कोई गुप्त जगह, अमेरिकी फाइटर जेट, मिसाइलें और ड्रोन ईरान को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसी बीच यूरोप के प्लेग्राउंड- स्विट्जरलैंड ने बड़ा फैसला किया है. स्विट्जरलैंड ने ईरान युद्ध में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का ऐलान किया है.  स्विट्जरलैंड  ने यह निर्णय उसकी सशस्त्र संघर्षों में लंबे समय से चली आ रही तटस्थता (न्यूट्रैलिटी) की नीति का हवाला देते हुए लिया. 

शनिवार को स्विस सरकार ने जारी एक बयान में कहा कि 15 मार्च को अमेरिकी टोही विमानों को स्विट्जरलैंड के ऊपर से उड़ान भरने की दो अनुमति-प्रार्थनाएं खारिज कर दी गईं, क्योंकि वे सीधे तौर पर ईरान में चल रहे युद्ध से जुड़ी थीं. हालांकि, अधिकारियों ने अमेरिका की तीन अन्य उड़ानों को मंजूरी दे दी है. इनमें 15 मार्च को निर्धारित दो परिवहन विमान और 17 मार्च को प्रस्तावित एक मेंटेनेंस से जुड़ी उड़ान शामिल है.

यह फैसला स्विस फेडरल काउंसिल ने संघीय नागरिक उड्डयन कार्यालय (FOCA) को भेजे गए ओवरफ्लाइट अनुरोधों की समीक्षा के बाद लिया. FOCA अन्य संघीय विभागों के साथ मिलकर राजनयिक मंजूरी से जुड़े आवेदनों को प्रोसेस करता है. स्विट्जरलैंड ने यह भी स्पष्ट किया कि मानवीय या चिकित्सीय उद्देश्यों से होने वाली उड़ानों- जैसे घायल लोगों को ले जाने वाली उड़ानें को उसकी तटस्थता नीति के तहत अनुमति मिलती रहेगी.

यूरोप का प्लेग्राउंड क्यों कहा जाता है स्विट्जरलैंड?

स्विट्जरलैंड को ‘यूरोप का प्लेग्राउंड’ कहा जाता है, क्योंकि यहां प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन और एडवेंचर गतिविधियों के भरपूर अवसर हैं. आल्प्स की बर्फ से ढकी पहाड़ियां, साफ झीलें और खूबसूरत घाटियां इसे टूरिस्ट्स के लिए सालभर आकर्षक बनाती हैं. सर्दियों में यहां स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसे खेल होते हैं, जबकि गर्मियों में हाइकिंग, माउंटेन बाइकिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां लोकप्रिय हैं. यहां बड़ी संख्या में  लोग छुट्टियां और मनोरंजन के लिए आते हैं, इसलिए इसे ‘यूरोप का प्लेग्राउंड’ कहा जाता है.

विश्व युद्धों में भी न्यूट्रल रहा था स्विट्जरलैंड

इसके अलावा स्विट्जरलैंड लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय युद्धों में तटस्थ (न्यूट्रल) रहा है और बड़े युद्धों में हिस्सा नहीं लेता, जिससे यह देश शांति और पर्यटन का केंद्र बना रहा. स्विट्जरलैंड ने न तो पहले विश्व युद्ध और न ही द्वितीय विश्व युद्ध में किसी पक्ष के साथ युद्ध में हिस्सा लिया. 1815 से अपनाई गई उसकी स्थायी तटस्थता (न्यूट्रैलिटी) की नीति के कारण उसने दोनों विश्व युद्धों के दौरान अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखते हुए खुद को संघर्ष से दूर रखा. 

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हालांकि, तटस्थ रहने के बावजूद उसने मजबूत रक्षा तैयारियां बनाए रखीं और लगभग 4.3 लाख सैनिकों की सेना को सक्रिय रखा, जिसे ‘नेशनल रिडबॉट’ रणनीति के तहत तैयार किया गया था. इसके साथ ही, स्विट्जरलैंड ने मानवीय भूमिका निभाते हुए एक लाख से अधिक शरणार्थियों को शरण दी और चारों ओर से धुरी शक्तियों से घिरे होने के बावजूद अपनी मजबूत रक्षा रणनीति के कारण सुरक्षित बना रहा.

ईरान युद्ध से प्रभावित हो रहा ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन

स्विट्जरलैंड की तटस्थता (न्यूट्रैलिटी) की नीति फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है. 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में पूरे मिडिल ईस्ट में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश (1300 से ज्यादा) ईरान के नागरिक हैं. 

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इस युद्ध के कारण ईरन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया था. जिसकी वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं. हालांकि, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबके लिए खुला है, केवल दुश्मनों- अमेरिका और इजरायल को छोड़कर. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर देशों से इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक बल भेजने की अपील की है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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