ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका, हफ्तों चल सकती है जंग; ट्रंप का नया प्लान तैयार

US Iran War Plan: ईरान और अमेरिका के बीच भयंकर युद्ध छिड़ सकता है. राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने हफ्तों चलने वाले सैन्य ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. मिडिल ईस्ट में एयरक्राफ्ट कैरियर और घातक मिसाइलों की तैनाती के साथ ही ईरान में सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, यह टकराव अब तक का सबसे बड़ा क्षेत्रीय युद्ध बन सकता है.

By Govind Jee | February 15, 2026 11:42 AM

US Iran War Plan: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ एक-दो दिन नहीं, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाले बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी कर रही है. यह पिछली भिड़ंतों के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर युद्ध हो सकता है.

बातचीत और बमबारी की तैयारी साथ-साथ

एक तरफ कूटनीति की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का साया मंडरा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर मंगलवार को जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता के साथ ईरान से बातचीत करेंगे. हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कर दिया है कि ट्रंप समझौता तो चाहते हैं, लेकिन यह बहुत मुश्किल काम है.

भारी मात्रा में हथियारों का जमावड़ा

पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत झोंक दी है. अधिकारियों ने बताया कि वहां एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भेजा जा रहा है. इसके साथ ही हजारों सैनिक, फाइटर जेट्स और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं जो हमला करने और बचाव करने दोनों में माहिर हैं.

क्या ईरान में बदलेगी सरकार?

नॉर्थ कैरोलिना में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने खुलकर कहा कि ईरान में सरकार का बदलना ही सबसे अच्छा होगा. जब उनसे पूछा गया कि वह किसे सत्ता में देखना चाहते हैं, तो उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन कहा कि कुछ लोग हैं. ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि पिछले 47 सालों से सिर्फ बातें ही हो रही हैं.

आसमान से होगा प्रहार

जानकारों का मानना है कि ट्रंप ईरान में अपनी सेना (ग्राउंड ट्रूप्स) जमीन पर उतारने के पक्ष में नहीं हैं. उनका जोर हवाई हमलों और समुद्री ताकत पर है. हालांकि, वे स्पेशल फोर्सेस का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसा उन्होंने पिछले महीने वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ किया था.

क्या हैं बड़े खतरे?

निशाने पर सिर्फ न्यूक्लियर साइट्स नहीं: रॉयटर्स के अनुसार, इस बार अमेरिका सिर्फ परमाणु ठिकानों को ही नहीं, बल्कि ईरान के सरकारी और सुरक्षा ठिकानों को भी निशाना बना सकता है.

  • ईरान का पलटवार: विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास मिसाइलों का बड़ा जखीरा है. अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान आसपास के देशों में मौजूद अमेरिकी बेस (जैसे कुवैत, कतर, सऊदी अरब) पर हमला कर सकता है.
  • क्षेत्रीय युद्ध का डर: अधिकारियों का मानना है कि यह सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो लंबे समय तक ‘हमले और जवाबी हमले’ का दौर चल सकता है.

इजरायल और ईरानी विपक्ष का रुख

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात कर कहा है कि किसी भी समझौते में इजरायल के हितों का ध्यान रखना जरूरी है. वहीं, अमेरिका में रह रहे ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने कहा कि अमेरिकी हमला ईरान की सरकार को गिराने में मदद कर सकता है. उनके मुताबिक, ईरान की जनता सरकार से परेशान है और एक हमला इस बदलाव की प्रक्रिया को तेज कर देगा.

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